अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- हादू (يَهود): यहूदी, जो मूसा (अलैहिस्सलाम) की उम्मत थे।
- साबिऊन (الصَّابِئُونَ): साबी लोग, जो अपनी प्राकृतिक फ़ितरत पर थे और उनका कोई निश्चित धर्म नहीं था जिसका वे पालन करते।
- नसारा (النَّصَارَى): ईसाई, जो ईसा (अलैहिस्सलाम) के अनुयायी थे।
- आमन (آمَنَ): ईमान लाया, पूर्ण विश्वास किया।
- अमिला सालिहान (عَمِلَ صَالِحًا): अच्छे कर्म किए, नेक कार्य किए।
- ख़ौफ़ (خَوْف): भय, डर।
- हुज़्न (حَزَن): ग़म, उदासी, दुःख।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस पवित्र आयत में बताते हैं कि जो लोग सच्चे दिल से ईमान लाए (अर्थात मुसलमान), और यहूदी, और साबी लोग, और ईसाई — इन सबमें से जो कोई भी अल्लाह पर पूर्ण ईमान रखे, उस ईमान के साथ जो मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर भी ईमान लाना शामिल है, और आख़िरत के दिन (क़ियामत) पर विश्वास रखे, और अच्छे कर्म करे — तो ऐसे लोगों के लिए कोई भय नहीं होगा और न ही वे दुखी होंगे।
यहाँ एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आयत में "ईमान" से मुराद सिर्फ़ ज़ुबानी ईमान नहीं है, बल्कि वह ईमान है जो दिल से हो और अमल से साबित हो। अल्लाह तआला ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग पहले के नबियों पर ईमान रखते थे, उनके लिए नजात (मुक्ति) का रास्ता यही था कि वे अपने समय के नबी की पैरवी करें। लेकिन जब मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आख़िरी नबी बनकर आए, तो अब सच्चा ईमान वही है जो उन पर ईमान लाने के साथ हो। इसलिए इस आयत का मतलब यह नहीं है कि आज यहूदी, ईसाई या साबी अपने वर्तमान धर्म पर रहते हुए नजात पा सकते हैं, बल्कि यह उन लोगों के बारे में है जो अपने समय में सच्चे ईमान और नेक अमल पर थे।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के यहाँ असली चीज़ नाम या लेबल नहीं है, बल्कि सच्चा ईमान और नेक अमल है। अल्लाह तआला इंसाफ़ करने वाला है और किसी के साथ ज़ुल्म नहीं करता। जो भी सच्चे दिल से अल्लाह की ओर रुजू करेगा और उसके भेजे हुए आख़िरी रसूल पर ईमान लाएगा, उसके लिए अल्लाह की रहमत के दरवाज़े खुले हैं।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें खुशखबरी देती है कि अल्लाह की रहमत बहुत विस्तृत है। वह चाहता है कि सभी लोग सीधे रास्ते पर आएं और उसकी रहमत से नवाज़े जाएं। जो लोग ईमान लाएंगे और नेक अमल करेंगे, उनके लिए क़ियामत के दिन न तो कोई डर होगा और न ही कोई ग़म। वे जन्नत में हमेशा हमेशा रहेंगे। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता।
आओ हम सब मिलकर अपने ईमान को मज़बूत करें, अपने अमल को सुधारें, और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें। याद रखें, असली कामयाबी दुनिया की दौलत में नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और जन्नत में है।
📜 आयत 67-71 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 69
सूरा अल-माइदा आयत 69 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें तो शक ही नहीं कि मुसलमान हो या यहूदी…सूरा आयत 69/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 67–71. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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