अल-माइदा · 70/120
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-माइदा
لَقَدْ أَخَذْنَا مِيثَاقَ بَنِي إِسْرَائِيلَ وَأَرْسَلْنَا إِلَيْهِمْ رُسُلًا ۖ كُلَّمَا جَاءَهُمْ رَسُولٌ بِمَا لَا تَهْوَىٰ أَنفُسُهُمْ فَرِيقًا كَذَّبُوا وَفَرِيقًا يَقْتُلُونَ ۝٧٠
Laqad akhaznaa meesaaqa Banee Israaa`eela wa arsalnaaa ilaihim Rusulan kullamaa jaaa`ahum Rasoolum bimaa laa tahwaaa anfusuhum fareeqan kazzaboo wa fareeqany yaqtuloon
📖 हिंदी अर्थ
हमने बनी इसराईल से एहद व पैमान ले लिया था और उनके पास बहुत रसूल भी भेजे थे (इस पर भी) जब उनके पास कोई रसूल उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ हुक्म लेकर आया तो इन (कम्बख्त) लोगों ने किसी को झुठला दिया और किसी को क़त्ल ही कर डाला

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मीथाक़ (مِيثَاق): पक्का और पुष्ट अहद व वचन।
  • ला तहवा (لَا تَهْوَىٰ): जिसे उनका मन न चाहे, जो उनकी इच्छाओं के खिलाफ हो।
  • फ़रीक़न (فَرِيقًا): एक समूह, एक गिरोह।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने बनी इसराईल से पक्का और मज़बूत अहद लिया था कि वे अल्लाह की इबादत करेंगे, उसके हुक्मों को सुनेंगे और उनका पालन करेंगे। इसी अहद के साथ अल्लाह ने उनकी तरफ अपने रसूल भेजे, ताकि वे उन्हें सच्चा रास्ता दिखाएँ और उनके दीन की रहनुमाई करें। लेकिन बनी इसराईल ने अपने इस अहद को तोड़ दिया और अपनी ख्वाहिशों (इच्छाओं) को पैग़म्बरों की तालीमात पर तरजीह दी। जब भी उनके पास कोई रसूल ऐसा पैग़ाम लेकर आया जो उनकी नफ़्सियानी ख्वाहिशों के खिलाफ था, तो उन्होंने उसका विरोध किया। उनका हाल यह था कि किसी रसूल को उन्होंने झुठलाया और किसी को शहीद कर दिया। यानी उन्होंने अल्लाह के रसूलों के साथ सख्त ज़ुल्म और सितम किया — किसी को झुठलाकर रद्द कर दिया और किसी को क़त्ल कर डाला।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह तआला अपने बंदों से अहद लेता है, और अहद को पूरा करना हर हाल में ज़रूरी है। अहद तोड़ना बड़ा गुनाह है।
  2. नबियों और रसूलों की तालीमात को अपनी ख्वाहिशों पर कभी तरजीह नहीं देनी चाहिए। जो इंसान अपनी इच्छाओं को दीन पर मुक़द्दम करता है, वह गुमराही का शिकार होता है।
  3. अल्लाह के रसूलों के साथ बुरा सलूक करने वालों का अंजाम बुरा होता है। बनी इसराईल की तरह जिन्होंने नबियों को झुठलाया और क़त्ल किया, वे अल्लाह की लानत और यज़ीत के मुस्तहिक़ बने।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने नबी मुहम्मद ﷺ की सुन्नत को अपनाएँ और उनके बताए हुए रास्ते पर चलें, क्योंकि उन्हीं के ज़रिए हमें सच्ची हिदायत मिली है।
  5. अल्लाह का दीन हमेशा इंसान की ख्वाहिशों से बुलंद है। जो लोग अपनी ख्वाहिशों को छोड़कर अल्लाह के हुक्मों के सामने सर झुकाते हैं, वही कामयाब होते हैं।


📜 आयत 68-72 — सूरा अल-माइदा

68قُلْ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لَسْتُمْ عَلَىٰ شَيْءٍ حَتَّىٰ تُقِيمُوا التَّوْرَاةَ وَالْإِنجِيلَ وَمَا أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ ۗ وَلَيَزِيدَنَّ كَثِيرًا مِّنْهُم مَّا أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ طُغْيَانًا وَكُفْرًا ۖ فَلَا تَأْسَ عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ अहले किताब जब तक तुम तौरेत और इन्जील और जो (सहीफ़े) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से तुम पर नाज़िल हुए हैं उनके (एहकाम) को क़ायम न रखोगे उस वक्त तक तुम्हारा मज़बह कुछ भी नहीं और (ऐ रसूल) जो (किताब) तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से भेजी गयी है (उसका) रश्क (हसद) उनमें से बहुतेरों की सरकशी व कुफ़्र को और बढ़ा देगा तुम काफ़िरों के गिरोह पर अफ़सोस न करना
69إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَالَّذِينَ هَادُوا وَالصَّابِئُونَ وَالنَّصَارَىٰ مَنْ آمَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَعَمِلَ صَالِحًا فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
इसमें तो शक ही नहीं कि मुसलमान हो या यहूदी हकीमाना ख्याल के पाबन्द हों ख्वाह नसरानी (गरज़ कुछ भी हो) जो ख़ुदा और रोज़े क़यामत पर ईमान लाएगा और अच्छे (अच्छे) काम करेगा उन पर अलबत्ता न तो कोई ख़ौफ़ होगा न वह लोग आज़ुर्दा ख़ातिर होंगे
70لَقَدْ أَخَذْنَا مِيثَاقَ بَنِي إِسْرَائِيلَ وَأَرْسَلْنَا إِلَيْهِمْ رُسُلًا ۖ كُلَّمَا جَاءَهُمْ رَسُولٌ بِمَا لَا تَهْوَىٰ أَنفُسُهُمْ فَرِيقًا كَذَّبُوا وَفَرِيقًا يَقْتُلُونَ
हमने बनी इसराईल से एहद व पैमान ले लिया था और उनके पास बहुत रसूल भी भेजे थे (इस पर भी) जब उनके पास कोई रसूल उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ हुक्म लेकर आया तो इन (कम्बख्त) लोगों ने किसी को झुठला दिया और किसी को क़त्ल ही कर डाला
71وَحَسِبُوا أَلَّا تَكُونَ فِتْنَةٌ فَعَمُوا وَصَمُّوا ثُمَّ تَابَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ ثُمَّ عَمُوا وَصَمُّوا كَثِيرٌ مِّنْهُمْ ۚ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِمَا يَعْمَلُونَ
और समझ लिया कि (इसमें हमारे लिए) कोई ख़राबी न होगी पस (गोया) वह लोग (अम्र हक़ से) अंधे और बहरे बन गए (मगर बावजूद इसके) जब इन लोगों ने तौबा की तो फिर ख़ुदा ने उनकी तौबा क़ुबूल कर ली (मगर) फिर (इस पर भी) उनमें से बहुतेरे अंधे और बहरे बन गए और जो कुछ ये लोग कर रहे हैं अल्लाह तो देखता है
72لَقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۖ وَقَالَ الْمَسِيحُ يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ اعْبُدُوا اللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمْ ۖ إِنَّهُ مَن يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَقَدْ حَرَّمَ اللَّهُ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ وَمَأْوَاهُ النَّارُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे ईसा मसीह ख़ुदा हैं वह सब काफ़िर हैं हालॉकि मसीह ने ख़ुद यूं कह दिया था कि ऐ बनी इसराईल सिर्फ उसी ख़ुदा की इबादत करो जो हमारा और तुम्हारा पालने वाला है क्योंकि (याद रखो) जिसने ख़ुदा का शरीक बनाया उस पर ख़ुदा ने बेहिश्त को हराम कर दिया है और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीअवतरण स्थान
70आयत

अनुवाद — अल-माइदा 70

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Wednesday, September 30, 2026

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