अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मीथाक़ (مِيثَاق): पक्का और पुष्ट अहद व वचन।
- ला तहवा (لَا تَهْوَىٰ): जिसे उनका मन न चाहे, जो उनकी इच्छाओं के खिलाफ हो।
- फ़रीक़न (فَرِيقًا): एक समूह, एक गिरोह।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने बनी इसराईल से पक्का और मज़बूत अहद लिया था कि वे अल्लाह की इबादत करेंगे, उसके हुक्मों को सुनेंगे और उनका पालन करेंगे। इसी अहद के साथ अल्लाह ने उनकी तरफ अपने रसूल भेजे, ताकि वे उन्हें सच्चा रास्ता दिखाएँ और उनके दीन की रहनुमाई करें। लेकिन बनी इसराईल ने अपने इस अहद को तोड़ दिया और अपनी ख्वाहिशों (इच्छाओं) को पैग़म्बरों की तालीमात पर तरजीह दी। जब भी उनके पास कोई रसूल ऐसा पैग़ाम लेकर आया जो उनकी नफ़्सियानी ख्वाहिशों के खिलाफ था, तो उन्होंने उसका विरोध किया। उनका हाल यह था कि किसी रसूल को उन्होंने झुठलाया और किसी को शहीद कर दिया। यानी उन्होंने अल्लाह के रसूलों के साथ सख्त ज़ुल्म और सितम किया — किसी को झुठलाकर रद्द कर दिया और किसी को क़त्ल कर डाला।
फ़ायदे:
- अल्लाह तआला अपने बंदों से अहद लेता है, और अहद को पूरा करना हर हाल में ज़रूरी है। अहद तोड़ना बड़ा गुनाह है।
- नबियों और रसूलों की तालीमात को अपनी ख्वाहिशों पर कभी तरजीह नहीं देनी चाहिए। जो इंसान अपनी इच्छाओं को दीन पर मुक़द्दम करता है, वह गुमराही का शिकार होता है।
- अल्लाह के रसूलों के साथ बुरा सलूक करने वालों का अंजाम बुरा होता है। बनी इसराईल की तरह जिन्होंने नबियों को झुठलाया और क़त्ल किया, वे अल्लाह की लानत और यज़ीत के मुस्तहिक़ बने।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने नबी मुहम्मद ﷺ की सुन्नत को अपनाएँ और उनके बताए हुए रास्ते पर चलें, क्योंकि उन्हीं के ज़रिए हमें सच्ची हिदायत मिली है।
- अल्लाह का दीन हमेशा इंसान की ख्वाहिशों से बुलंद है। जो लोग अपनी ख्वाहिशों को छोड़कर अल्लाह के हुक्मों के सामने सर झुकाते हैं, वही कामयाब होते हैं।
📜 आयत 68-72 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 70
सूरा अल-माइदा आयत 70 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमने बनी इसराईल से एहद व पैमान ले लिया था…सूरा आयत 70/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 68–72. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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