अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- क़रन (قرن): अर्थात समुदाय या पीढ़ी।
- बत्शन (بطشًا): अर्थात शक्ति, सामर्थ्य और पकड़।
- नक़्क़बू (نقبوا): अर्थात उन्होंने धरती में यात्रा की, हर स्थान की खोज की, अर्थात वे देश-देश घूमे।
- महीस (محيص): अर्थात भागने की जगह, बचने का स्थान, कोई आश्रय या पनाह।
तफ़सीर:
यह आयत मक्का के काफ़िरों को चेतावनी दे रही है कि उनसे पहले हमने कितनी ही उम्मतों को हलाक कर दिया, जो ताक़त और सामर्थ्य में उनसे कहीं बढ़-चढ़कर थीं। उनके पास विशाल सेनाएँ थीं, ऊँचे-ऊँचे किले थे, और धरती पर उनका दबदबा था। उन्होंने धरती में दूर-दूर तक सफ़र किया, उसके कोने-कोने में फैल गए, और अपनी ताक़त के दम पर देशों को अपने अधीन कर लिया। उन्होंने सोचा कि शायद कहीं कोई पनाहगाह हो, कोई ऐसी जगह हो जहाँ वे अल्लाह के अज़ाब से बच सकें। मगर जब अल्लाह का फ़ैसला आया, तो न कोई ओट मिली, न कोई बचाव का रास्ता। उनकी सारी ताक़त, उनके किले, उनकी दौलत — कुछ भी उनके काम न आया। वे हलाक कर दिए गए।
यह एक ऐतिहासिक सबक़ है — जो लोग अल्लाह के रसूलों को झुठलाते हैं और हक़ से मुँह मोड़ते हैं, उनकी ताक़त उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकती। आज के लोग भी अगर इसी राह पर चलें, तो उनका अंजाम भी वही होगा। यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ताक़त और सामर्थ्य पर घमंड न करें, बल्कि अल्लाह की तरफ़ रुजू करें। अल्लाह ही सबसे बड़ी ताक़त का मालिक है, और उसकी पकड़ से बचने की कोई जगह नहीं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें, उसकी इबादत करें और उसके दीन को अपनाएँ — यही हमारी सबसे बड़ी कामयाबी है। जो लोग इस नसीहत को क़बूल कर लेंगे, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है, और जो मुँह मोड़ेंगे, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब है। अल्लाह बड़ा मेहरबान है, वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है और रहमत से भर देता है।
📜 आयत 34-38 — काफ
अनुवाद — काफ 36
सूरा काफ आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने तो इनसे पहले कितनी उम्मतें हलाक कर डाली…सूरा आयत 36/45 — काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: काफ सुनें, काफ अनुवाद, काफ mp3, काफ pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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