काफ · 36/45
अनुवाद उच्चारण — काफ
وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هُمْ أَشَدُّ مِنْهُم بَطْشًا فَنَقَّبُوا فِي الْبِلَادِ هَلْ مِن مَّحِيصٍ ۝٣٦
Wa kam ahlaknaa qablahum min qarnin hum ashaddu minhum batshan fanaqqaboo fil bilaad, hal mim mahees
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तो इनसे पहले कितनी उम्मतें हलाक कर डाली जो इनसे क़ूवत में कहीं बढ़ कर थीं तो उन लोगों ने (मौत के ख़ौफ से) तमाम शहरों को छान मारा कि भला कहीं भी भागने का ठिकाना है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • क़रन (قرن): अर्थात समुदाय या पीढ़ी।
  • बत्शन (بطشًا): अर्थात शक्ति, सामर्थ्य और पकड़।
  • नक़्क़बू (نقبوا): अर्थात उन्होंने धरती में यात्रा की, हर स्थान की खोज की, अर्थात वे देश-देश घूमे।
  • महीस (محيص): अर्थात भागने की जगह, बचने का स्थान, कोई आश्रय या पनाह।

तफ़सीर:

यह आयत मक्का के काफ़िरों को चेतावनी दे रही है कि उनसे पहले हमने कितनी ही उम्मतों को हलाक कर दिया, जो ताक़त और सामर्थ्य में उनसे कहीं बढ़-चढ़कर थीं। उनके पास विशाल सेनाएँ थीं, ऊँचे-ऊँचे किले थे, और धरती पर उनका दबदबा था। उन्होंने धरती में दूर-दूर तक सफ़र किया, उसके कोने-कोने में फैल गए, और अपनी ताक़त के दम पर देशों को अपने अधीन कर लिया। उन्होंने सोचा कि शायद कहीं कोई पनाहगाह हो, कोई ऐसी जगह हो जहाँ वे अल्लाह के अज़ाब से बच सकें। मगर जब अल्लाह का फ़ैसला आया, तो न कोई ओट मिली, न कोई बचाव का रास्ता। उनकी सारी ताक़त, उनके किले, उनकी दौलत — कुछ भी उनके काम न आया। वे हलाक कर दिए गए।

यह एक ऐतिहासिक सबक़ है — जो लोग अल्लाह के रसूलों को झुठलाते हैं और हक़ से मुँह मोड़ते हैं, उनकी ताक़त उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकती। आज के लोग भी अगर इसी राह पर चलें, तो उनका अंजाम भी वही होगा। यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ताक़त और सामर्थ्य पर घमंड न करें, बल्कि अल्लाह की तरफ़ रुजू करें। अल्लाह ही सबसे बड़ी ताक़त का मालिक है, और उसकी पकड़ से बचने की कोई जगह नहीं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें, उसकी इबादत करें और उसके दीन को अपनाएँ — यही हमारी सबसे बड़ी कामयाबी है। जो लोग इस नसीहत को क़बूल कर लेंगे, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है, और जो मुँह मोड़ेंगे, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब है। अल्लाह बड़ा मेहरबान है, वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है और रहमत से भर देता है।



📜 आयत 34-38 — काफ

34ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ الْخُلُودِ
(उसको हुक्म होगा कि) इसमें सही सलामत दाख़िल हो जाओ यहीं तो हमेशा रहने का दिन है
35لَهُم مَّا يَشَاءُونَ فِيهَا وَلَدَيْنَا مَزِيدٌ
इसमें ये लोग जो चाहेंगे उनके लिए हाज़िर है और हमारे यहॉ तो इससे भी ज्यादा है
36وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هُمْ أَشَدُّ مِنْهُم بَطْشًا فَنَقَّبُوا فِي الْبِلَادِ هَلْ مِن مَّحِيصٍ
और हमने तो इनसे पहले कितनी उम्मतें हलाक कर डाली जो इनसे क़ूवत में कहीं बढ़ कर थीं तो उन लोगों ने (मौत के ख़ौफ से) तमाम शहरों को छान मारा कि भला कहीं भी भागने का ठिकाना है
37إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِمَن كَانَ لَهُ قَلْبٌ أَوْ أَلْقَى السَّمْعَ وَهُوَ شَهِيدٌ
इसमें शक़ नहीं कि जो शख़्श (आगाह) दिल रखता है या कान लगाकर हुज़ूरे क़ल्ब से सुनता है उसके लिए इसमें (काफ़ी) नसीहत है
38وَلَقَدْ خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ وَمَا مَسَّنَا مِن لُّغُوبٍ
और हमने ही यक़ीनन सारे आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के बीच में है छह: दिन में पैदा किए और थकान तो हमको छुकर भी नहीं गयी
काफकुरान सूची
45आयत
मक्कीRevelation
36आयत

अनुवाद — काफ 36

सूरा काफ आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने तो इनसे पहले कितनी उम्मतें हलाक कर डाली…

सूरा आयत 36/45 — काफ ق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: काफ सुनें, काफ अनुवाद, काफ mp3, काफ pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए