अर-रहमान · 75/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रहमान
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ۝٧٥
Fabi ayyi aalaaa`i Rabbikumaa tukazzibaan
📖 हिंदी अर्थ
फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से मुकरोगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

फिर तुम दोनों (जिन्न और इंसान) अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

इस आयत में अल्लाह तआला ने जिन्न और इंसान दोनों को सम्बोधित किया है और उनसे पूछा है कि आखिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों और एहसानों को झुठलाओगे? यह एक ऐसा सवाल है जो डाँट-फटकार और समझाने के अंदाज़ में किया गया है, ताकि इंसान और जिन्न दोनों अपने रब की बेशुमार नेमतों को याद करें और उनका शुक्र अदा करें।

अल्लाह तआला ने इस सूरह में अपनी ढेरों नेमतों का ज़िक्र किया है — आसमान, ज़मीन, सूरज, चाँद, तारे, पानी, फल, मेवे, खजूर और अनार, मोती और मूँगा, जन्नत के बाग़ और उनकी नहरें, हूरें और ख़ूबसूरत जगहें — और हर नेमत के बाद यही सवाल दोहराया है कि “तो फिर तुम अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?” यह इसलिए कि इंसान और जिन्न अपनी आँखें खोलें और देखें कि अल्लाह ने उन पर कितने एहसान किए हैं, और फिर उन एहसानों के बदले उन्हें चाहिए कि वे अल्लाह की इबादत करें, उसका शुक्र अदा करें और उसकी नेमतों को कभी न भूलें।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें इतनी ज़्यादा हैं कि उन्हें गिनना भी मुमकिन नहीं। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं — साँस लेने के लिए हवा, पीने के लिए पानी, खाने के लिए रोज़ी, सेहत, परिवार, ईमान — तो हमें समझना चाहिए कि यह सब अल्लाह की देन है। और जब अल्लाह इतना मेहरबान है कि हमें ये सब नेमतें देता है, तो हमें चाहिए कि हम उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें, उसकी नाफ़रमानी से बचें और उसके बताए हुए रास्ते पर चलें।

याद रखिए! अल्लाह की नेमतों को झुठलाने का मतलब है उसके एहसानों से मुँह मोड़ना और उसकी इबादत से इनकार करना। जो शख्स अल्लाह की नेमतों को पहचानता है और उनका शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और ज़्यादा नेमतें देता है। और जो इनकार करता है, वह खुद अपने ऊपर ज़ुल्म करता है। आओ हम सब मिलकर अपने रब का शुक्र अदा करें और उसकी नेमतों को कभी न भूलें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 73-77 — सूरा अर-रहमान

73فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे
74لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ
उनसे पहले उनको किसी इन्सान ने उनको छुआ तक नहीं और न जिन ने
75فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से मुकरोगे
76مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ رَفْرَفٍ خُضْرٍ وَعَبْقَرِيٍّ حِسَانٍ
ये लोग सब्ज़ कालीनों और नफीस व हसीन मसनदों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे
77فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों से इन्कार करोगे
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
75आयत

अनुवाद — अर-रहमान 75

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Monday, September 28, 2026

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