Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَمْ يَطْمِثْهُنَّ: उन्हें किसी ने छुआ तक नहीं (अर्थात उनके साथ किसी ने संभोग नहीं किया)।
- إِنسٌ: मनुष्य।
- جَانٌّ: जिन्न।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन हूरों (स्वर्गीय पत्नियों) के गुणों का वर्णन कर रही है जो जन्नत के उन मोमिनों के लिए हैं जो अल्लाह से डरने वाले हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये हूरें ऐसी पाक और मासूम हैं कि उन्हें उनके पतियों से पहले किसी इंसान ने छुआ तक नहीं और न ही किसी जिन्न ने। यानी वे पूरी तरह से केवल अपने पतियों के लिए हैं, उनकी पवित्रता और कौमार्यता अटूट है।
यह एक बहुत बड़ा सम्मान और इनाम है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है। जिस तरह दुनिया में एक इंसान अपनी पत्नी से चाहता है कि वह सिर्फ उसी की हो, उसी तरह अल्लाह ने जन्नत में मोमिनों को ऐसी पाक और पवित्र पत्नियाँ दीं जो सिर्फ उन्हीं के लिए हैं। यह अल्लाह की रहमत और करम का एक नमूना है कि वह अपने बंदों को उनकी अच्छाइयों का बदला इतने अच्छे तरीके से देता है।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला की नेमतें और इनाम उसके डरने वालों के लिए कितने बड़े हैं। जो लोग दुनिया में अल्लाह के हुक्मों की पालना करते हैं और उसकी नाराज़गी से बचते हैं, उनके लिए जन्नत में ऐसी चीज़ें तैयार हैं जिनका अंदाज़ा हम नहीं कर सकते। यह हमारे लिए एक प्रोत्साहन है कि हम अल्लाह की इबादत में मेहनत करें, उसकी राह में भलाई के काम करें और उसकी रहमत के हक़दार बनें।
अल्लाह तआला ने इस आयत में "इंस" और "जान" दोनों का ज़िक्र किया है, ताकि यह साफ हो जाए कि ये हूरें किसी भी मख़लूक़ (प्राणी) से पहले नहीं छुई गईं। यह उनकी पाकी और पवित्रता की सबसे बड़ी गवाही है। यह हमें यह भी सिखाता है कि अल्लाह की नेमतें पूरी तरह से पाक और निर्मल हैं, और वह अपने बंदों को सिर्फ अच्छी और पاکیزہ चीज़ें ही देता है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने जीवन में पاکیزگی (पवित्रता) और सच्चाई को अपनाना चाहिए। जिस तरह अल्लाह ने जन्नत की चीज़ों को पाक बनाया है, उसी तरह हमें भी अपने दिलों और अमल को पाक रखना चाहिए। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें जन्नत की इन नेमतों का हक़दार बनाए और हमें अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।
📜 आयत 72-76 — सूरा अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 74
सूरा अर-रहमान आयत 74 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनसे पहले उनको किसी इन्सान ने उनको छुआ तक नहीं…सूरा आयत 74/78 — सूरा अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रहमान सुनें, सूरा अर-रहमान अनुवाद, सूरा अर-रहमान mp3, सूरा अर-रहमान pdf. आयत 72–76. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अर-रहमान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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