अर-रहमान · 76/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ رَفْرَفٍ خُضْرٍ وَعَبْقَرِيٍّ حِسَانٍ ۝٧٦
Muttaki`eena `alaa rafratin khudrinw wa `abqariyyin hisaan
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग सब्ज़ कालीनों और नफीस व हसीन मसनदों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • रफ़रफ़ (رفرف): हरे रंग के ऊँचे बिछौने या तकिये, जो आराम के लिए होते हैं।
  • ख़ुद्र (خضر): हरा रंग, जो जन्नत की ताज़गी और सुंदरता की निशानी है।
  • अबक़री (عبقري): बेहद खूबसूरत और अनोखी चीज़, जिसे देखकर दंग रह जाएँ।
  • हिसान (حسان): बहुत ही सुंदर और खूबसूरत चीज़ें।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में जन्नत के उन मुक़ामों का ज़िक्र कर रहे हैं, जहाँ जन्नती लोग आराम और सुकून की ज़िंदगी बिताएँगे। वे हरे रंग के ऊँचे और नरम बिछौनों पर तकिया लगाकर बैठे होंगे, और उनके नीचे बेहद खूबसूरत और नायाब फ़र्श बिछे होंगे, जिनकी सुंदरता का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। ये चीज़ें इतनी अजीब और लाजवाब होंगी कि इंसान उन्हें देखकर हैरान रह जाएगा।

ये आराम और सुकून की वो नेमतें हैं जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार की हैं। जन्नत की हर चीज़ में खूबसूरती, ताज़गी और आराम होगा, और ये सब उन लोगों का इनाम है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत की और उसके हुक्मों पर अमल किया।

याद रखिए, जन्नत की ये नेमतें सिर्फ़ उन्हीं को मिलेंगी जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाएँगे और नेक अमल करेंगे। अल्लाह ने अपने रहमत से ये इनाम तैयार किए हैं, और वो चाहता है कि उसके बंदे उसकी रहमत की तरफ़ दौड़ें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल रहे, वे इस सुकून और आराम से महरूम रहेंगे।

तो आइए, हम सब अपने अमल को सुधारें और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जो इन हरे बिछौनों पर आराम करेंगे और हमेशा की खुशियों में जीएँगे। अल्लाह हमें अपनी जन्नत का मेहमान बनाए, आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 74-78 — अर-रहमान

74لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ
उनसे पहले उनको किसी इन्सान ने उनको छुआ तक नहीं और न जिन ने
75فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से मुकरोगे
76مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ رَفْرَفٍ خُضْرٍ وَعَبْقَرِيٍّ حِسَانٍ
ये लोग सब्ज़ कालीनों और नफीस व हसीन मसनदों पर तकिए लगाए (बैठे) होंगे
77فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम अपने परवरदिगार की किन किन नेअमतों से इन्कार करोगे
78تَبَارَكَ اسْمُ رَبِّكَ ذِي الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
(ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार जो साहिबे जलाल व करामत है उसी का नाम बड़ा बाबरकत है
अर-रहमानकुरान सूची
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अनुवाद — अर-रहमान 76

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सूरा आयत 76/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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