Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
الَّذِينَ يَبْخَلُونَ (जो कंजूसी करते हैं) — यानी जो अपने माल, ज्ञान, या प्रभाव को खर्च करने से रोकते हैं, जबकि उन पर इसे खर्च करना ज़रूरी है। وَيَأْمُرُونَ النَّاسَ بِالْبُخْلِ (और लोगों को कंजूसी का आदेश देते हैं) — यह बुराई की पराकाष्ठा है कि इंसान खुद कंजूस हो और दूसरों को भी कंजूसी की सलाह दे। وَمَن يَتَوَلَّ (और जो कोई मुँह मोड़े) — यानी अल्लाह की आज्ञा से पीछे हटे। فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ (तो अल्लाह बेशक बेनियाज़ और हर हाल में प्रशंसा के योग्य है) — वह अपनी मख़लूक़ की आज्ञाकारिता का मोहताज नहीं, और हर अवस्था में उसी की प्रशंसा है।
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह की दी हुई नेमतों पर इतराते हैं और दूसरों पर फ़ख़्र करते हैं। ऐसे लोग अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते और दूसरों को भी भलाई के कामों से रोकते हैं। वे कंजूसी को अच्छा बताकर लोगों को इसकी तरफ उभारते हैं। लेकिन अल्लाह उनकी कंजूसी से बेनियाज़ है — उसकी दौलत और बादशाही में कोई कमी नहीं आती, चाहे सारे लोग ही उसकी आज्ञा से मुँह मोड़ लें। जो व्यक्ति अल्लाह की राह से हटता है, वह अपना ही नुक़सान करता है, अल्लाह का कुछ नहीं बिगाड़ता। अल्लाह हर हाल में प्रशंसा के योग्य है — उसके हर गुण में कमाल है, उसका हर काम जमील है, और उसकी हर मख़लूक़ उसकी तारीफ़ करती है।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि कंजूसी सिर्फ एक बुरी आदत नहीं, बल्कि एक ऐसा गुनाह है जो इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है। जब अल्लाह ने हमें माल दिया है, तो वह हमारी परीक्षा के लिए दिया है — क्या हम उसकी राह में खर्च करते हैं या अपने दिल को माल से जोड़ लेते हैं? कंजूस इंसान न तो खुद सुखी रहता है और न दूसरों को सुख देता है। इसके विपरीत, सखावत (उदारता) इंसान को अल्लाह का प्यारा बनाती है और उसके रिज़्क़ में बरकत लाती है। अल्लाह ने हमें जो कुछ दिया है, उसमें से दूसरों का हक़ भी है। जब हम खर्च करते हैं, तो हम अपने लिए आख़िरत का ज़ख़ीरा इकट्ठा करते हैं। याद रखिए, अल्लाह किसी का मोहताज नहीं — वह तो हम पर एहसान करता है कि हमें अपनी राह में खर्च करने का शरफ़ देता है। तो आओ, हम कंजूसी से बचें और सखावत को अपनी आदत बनाएं, ताकि दुनिया में भी सुकून मिले और आख़िरत में भी कामयाबी हासिल हो।
📜 आयत 22-26 — सूरा अल-हदीद
अनुवाद — अल-हदीद 24
सूरा अल-हदीद आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो ख़ुद भी बुख्ल करते हैं और दूसरे लोगों को…सूरा आयत 24/29 — सूरा अल-हदीद الحديد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हदीद सुनें, सूरा अल-हदीद अनुवाद, सूरा अल-हदीद mp3, सूरा अल-हदीद pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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