अल-हदीद · 24/29
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हदीद
الَّذِينَ يَبْخَلُونَ وَيَأْمُرُونَ النَّاسَ بِالْبُخْلِ ۗ وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ ۝٢٤
Allazeeena yabkhaloona wa yaamuroonan naasa bil bukhl; wa many yatawalla fa innal laaha Huwal Ghaniyyul Hameed
📖 हिंदी अर्थ
जो ख़ुद भी बुख्ल करते हैं और दूसरे लोगों को भी बुख्ल करना सिखाते हैं और जो शख़्श (इन बातों से) रूगरदानी करे तो ख़ुदा भी बेपरवा सज़ावारे हम्दोसना है

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अनुवाद — Tafsir

الَّذِينَ يَبْخَلُونَ (जो कंजूसी करते हैं) — यानी जो अपने माल, ज्ञान, या प्रभाव को खर्च करने से रोकते हैं, जबकि उन पर इसे खर्च करना ज़रूरी है। وَيَأْمُرُونَ النَّاسَ بِالْبُخْلِ (और लोगों को कंजूसी का आदेश देते हैं) — यह बुराई की पराकाष्ठा है कि इंसान खुद कंजूस हो और दूसरों को भी कंजूसी की सलाह दे। وَمَن يَتَوَلَّ (और जो कोई मुँह मोड़े) — यानी अल्लाह की आज्ञा से पीछे हटे। فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ (तो अल्लाह बेशक बेनियाज़ और हर हाल में प्रशंसा के योग्य है) — वह अपनी मख़लूक़ की आज्ञाकारिता का मोहताज नहीं, और हर अवस्था में उसी की प्रशंसा है।

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह की दी हुई नेमतों पर इतराते हैं और दूसरों पर फ़ख़्र करते हैं। ऐसे लोग अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते और दूसरों को भी भलाई के कामों से रोकते हैं। वे कंजूसी को अच्छा बताकर लोगों को इसकी तरफ उभारते हैं। लेकिन अल्लाह उनकी कंजूसी से बेनियाज़ है — उसकी दौलत और बादशाही में कोई कमी नहीं आती, चाहे सारे लोग ही उसकी आज्ञा से मुँह मोड़ लें। जो व्यक्ति अल्लाह की राह से हटता है, वह अपना ही नुक़सान करता है, अल्लाह का कुछ नहीं बिगाड़ता। अल्लाह हर हाल में प्रशंसा के योग्य है — उसके हर गुण में कमाल है, उसका हर काम जमील है, और उसकी हर मख़लूक़ उसकी तारीफ़ करती है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि कंजूसी सिर्फ एक बुरी आदत नहीं, बल्कि एक ऐसा गुनाह है जो इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है। जब अल्लाह ने हमें माल दिया है, तो वह हमारी परीक्षा के लिए दिया है — क्या हम उसकी राह में खर्च करते हैं या अपने दिल को माल से जोड़ लेते हैं? कंजूस इंसान न तो खुद सुखी रहता है और न दूसरों को सुख देता है। इसके विपरीत, सखावत (उदारता) इंसान को अल्लाह का प्यारा बनाती है और उसके रिज़्क़ में बरकत लाती है। अल्लाह ने हमें जो कुछ दिया है, उसमें से दूसरों का हक़ भी है। जब हम खर्च करते हैं, तो हम अपने लिए आख़िरत का ज़ख़ीरा इकट्ठा करते हैं। याद रखिए, अल्लाह किसी का मोहताज नहीं — वह तो हम पर एहसान करता है कि हमें अपनी राह में खर्च करने का शरफ़ देता है। तो आओ, हम कंजूसी से बचें और सखावत को अपनी आदत बनाएं, ताकि दुनिया में भी सुकून मिले और आख़िरत में भी कामयाबी हासिल हो।



📜 आयत 22-26 — सूरा अल-हदीद

22مَا أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي أَنفُسِكُمْ إِلَّا فِي كِتَابٍ مِّن قَبْلِ أَن نَّبْرَأَهَا ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
जितनी मुसीबतें रूए ज़मीन पर और ख़ुद तुम लोगों पर नाज़िल होती हैं (वह सब) क़ब्ल इसके कि हम उन्हें पैदा करें किताब (लौह महफूज़) में (लिखी हुई) हैं बेशक ये ख़ुदा पर आसान है
23لِّكَيْلَا تَأْسَوْا عَلَىٰ مَا فَاتَكُمْ وَلَا تَفْرَحُوا بِمَا آتَاكُمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍ
ताकि जब कोई चीज़ तुमसे जाती रहे तो तुम उसका रंज न किया करो और जब कोई चीज़ (नेअमत) ख़ुदा तुमको दे तो उस पर न इतराया करो और ख़ुदा किसी इतराने वाले येख़ी बाज़ को दोस्त नहीं रखता
24الَّذِينَ يَبْخَلُونَ وَيَأْمُرُونَ النَّاسَ بِالْبُخْلِ ۗ وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ
जो ख़ुद भी बुख्ल करते हैं और दूसरे लोगों को भी बुख्ल करना सिखाते हैं और जो शख़्श (इन बातों से) रूगरदानी करे तो ख़ुदा भी बेपरवा सज़ावारे हम्दोसना है
25لَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلَنَا بِالْبَيِّنَاتِ وَأَنزَلْنَا مَعَهُمُ الْكِتَابَ وَالْمِيزَانَ لِيَقُومَ النَّاسُ بِالْقِسْطِ ۖ وَأَنزَلْنَا الْحَدِيدَ فِيهِ بَأْسٌ شَدِيدٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِ وَلِيَعْلَمَ اللَّهُ مَن يَنصُرُهُ وَرُسُلَهُ بِالْغَيْبِ ۚ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٌ
हमने यक़ीनन अपने पैग़म्बरों को वाज़े व रौशन मोजिज़े देकर भेजा और उनके साथ किताब और (इन्साफ़ की) तराज़ू नाज़िल किया ताकि लोग इन्साफ़ पर क़ायम रहे और हम ही ने लोहे को नाज़िल किया जिसके ज़रिए से सख्त लड़ाई और लोगों के बहुत से नफे (की बातें) हैं और ताकि ख़ुदा देख ले कि बेदेखे भाले ख़ुदा और उसके रसूलों की कौन मदद करता है बेशक ख़ुदा बहुत ज़बरदस्त ग़ालिब है
26وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا وَإِبْرَاهِيمَ وَجَعَلْنَا فِي ذُرِّيَّتِهِمَا النُّبُوَّةَ وَالْكِتَابَ ۖ فَمِنْهُم مُّهْتَدٍ ۖ وَكَثِيرٌ مِّنْهُمْ فَاسِقُونَ
और बेशक हम ही ने नूह और इबराहीम को (पैग़म्बर बनाकर) भेजा और उनही दोनों की औलाद में नबूवत और किताब मुक़र्रर की तो उनमें के बाज़ हिदायत याफ्ता हैं और उन के बहुतेरे बदकार हैं
अल-हदीदकुरान सूची
29आयत
मदनीअवतरण स्थान
24आयत

अनुवाद — अल-हदीद 24

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Friday, October 2, 2026

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