अल-मुजादिला · 5/22
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुजादिला
إِنَّ الَّذِينَ يُحَادُّونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ كُبِتُوا كَمَا كُبِتَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَقَدْ أَنزَلْنَا آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۚ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ مُّهِينٌ ۝٥
Innal lazeena yuhaaaddoonal laaha wa Rasoolahoo kubitoo kamaa kubital lazeena min qablihim; wa qad anzalnaaa aayaatim baiyinaat; wa lilkaa fireena `azaabum muheen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग ख़ुदा की और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त करते हैं वह (उसी तरह) ज़लील किए जाएँगे जिस तरह उनके पहले लोग किए जा चुके हैं और हम तो अपनी साफ़ और सरीही आयतें नाज़िल कर चुके और काफिरों के लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُحَادُّونَ: अल्लाह और उसके रसूल की विरोधता करना, उनके आदेशों का उल्लंघन करना, और उनके खिलाफ़ मोर्चा खोलना।
  • كُبِتُوا: अपमानित किए गए, ज़लील किए गए, और उन पर प्रभुत्व जमा दिया गया।
  • آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ: स्पष्ट और प्रमाणित आयतें जो सत्य को प्रकट करती हैं।
  • عَذَابٌ مُهِينٌ: अपमानजनक यातना जो उन्हें ज़िल्लत और रुसवाई में डाल देगी।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की विरोधता करते हैं, उनके आदेशों को नहीं मानते, और उनके खिलाफ़ साज़िशें रचते हैं। ऐसे लोगों को अल्लाह ने अपमानित और ज़लील किया है, ठीक उसी तरह जैसे उनसे पहले की उम्मतों के लोगों को किया गया था, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूलों की विरोधता की थी। यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि जिन लोगों ने भी अल्लाह के दीन का मुक़ाबला किया, वे अंततः नाकाम और रुसवा हुए।

अल्लाह ने अपने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर स्पष्ट आयतें उतारी हैं जो सत्य को प्रमाणित करती हैं और हिदायत का रास्ता दिखाती हैं। ये आयतें क़ुरआन की आयतें हैं, जो अपनी वाज़ाहत और दलीलों में कोई संदेह नहीं छोड़तीं। इन आयतों को झुठलाने वालों और कुफ़्र पर अड़े रहने वालों के लिए अल्लाह ने अपमानजनक यातना तैयार की है, जो उन्हें आख़िरत में ज़िल्लत और रुसवाई में डाल देगी।

यह आयत मुसलमानों के लिए एक बड़ी नसीहत है कि वे अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की आज्ञा का पालन करें, उनकी विरोधता से बचें, और जान लें कि अल्लाह की मदद सच्चे ईमानवालों के साथ है। जो लोग अल्लाह के दीन का साथ देते हैं, अल्लाह उन्हें इज़्ज़त देता है, और जो उसका मुक़ाबला करते हैं, उन्हें ज़िल्लत का सामना करना पड़ता है। यह अल्लाह का क़ानून है जो कभी नहीं बदलता।

इस आयत में हमारे लिए एक प्यारा पैग़ाम है: अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मुहब्बत और इताअत ही कामयाबी का रास्ता है। जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में सरबुलंद होते हैं। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें, और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत को अपनाएँ, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन्हें अल्लाह ने इज़्ज़त दी है और जिन पर उसकी रहमत नाज़िल होती है।



📜 आयत 3-7 — सूरा अल-मुजादिला

3وَالَّذِينَ يُظَاهِرُونَ مِن نِّسَائِهِمْ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُوا فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ مِّن قَبْلِ أَن يَتَمَاسَّا ۚ ذَٰلِكُمْ تُوعَظُونَ بِهِ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
और जो लोग अपनी बीवियों से ज़हार कर बैठे फिर अपनी बात वापस लें तो दोनों के हमबिस्तर होने से पहले (कफ्फ़ारे में) एक ग़ुलाम का आज़ाद करना (ज़रूरी) है उसकी तुमको नसीहत की जाती है और तुम जो कुछ भी करते हो (ख़ुदा) उससे आगाह है
4فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ مِن قَبْلِ أَن يَتَمَاسَّا ۖ فَمَن لَّمْ يَسْتَطِعْ فَإِطْعَامُ سِتِّينَ مِسْكِينًا ۚ ذَٰلِكَ لِتُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ ۚ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ ۗ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ أَلِيمٌ
फिर जिसको ग़ुलाम न मिले तो दोनों की मुक़ारबत के क़ब्ल दो महीने के पै दर पै रोज़े रखें और जिसको इसकी भी क़ुदरत न हो साठ मोहताजों को खाना खिलाना फर्ज़ है ये (हुक्म इसलिए है) ताकि तुम ख़ुदा और उसके रसूल की (पैरवी) तसदीक़ करो और ये ख़ुदा की मुक़र्रर हदें हैं और काफ़िरों के लिए दर्दनाक अज़ाब है
5إِنَّ الَّذِينَ يُحَادُّونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ كُبِتُوا كَمَا كُبِتَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَقَدْ أَنزَلْنَا آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۚ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ مُّهِينٌ
बेशक जो लोग ख़ुदा की और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त करते हैं वह (उसी तरह) ज़लील किए जाएँगे जिस तरह उनके पहले लोग किए जा चुके हैं और हम तो अपनी साफ़ और सरीही आयतें नाज़िल कर चुके और काफिरों के लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है
6يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ جَمِيعًا فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا ۚ أَحْصَاهُ اللَّهُ وَنَسُوهُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबारा उठाएगा तो उनके आमाल से उनको आगाह कर देगा ये लोग (अगरचे) उनको भूल गये हैं मगर ख़ुदा ने उनको याद रखा है और ख़ुदा तो हर चीज़ का गवाह है
7أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ مَا يَكُونُ مِن نَّجْوَىٰ ثَلَاثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمْ وَلَا خَمْسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمْ وَلَا أَدْنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمْ أَيْنَ مَا كَانُوا ۖ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
क्या तुमको मालूम नहीं कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा जानता है जब तीन (आदमियों) का ख़ुफिया मशवेरा होता है तो वह (ख़ुद) उनका ज़रूर चौथा है और जब पाँच का मशवेरा होता है तो वह उनका छठा है और उससे कम हो या ज्यादा और चाहे जहाँ कहीं हो वह उनके साथ ज़रूर होता है फिर जो कुछ वह (दुनिया में) करते रहे क़यामत के दिन उनको उससे आगाह कर देगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
अल-मुजादिलाकुरान सूची
22आयत
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5आयत

अनुवाद — अल-मुजादिला 5

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Monday, September 28, 2026

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