अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَمَن لَّمْ يَجِدْ: जिसे गुलाम (दास) न मिले या उसे आज़ाद करने की सामर्थ्य न हो।
- مُتَتَابِعَيْنِ: लगातार दो महीने, बीच में कोई दिन छूटे बिना।
- يَتَمَاسَّا: पति-पत्नी का एक-दूसरे से शारीरिक संबंध बनाना।
- حُدُودُ اللَّهِ: अल्लाह की निर्धारित की हुई सीमाएँ और आदेश।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने ज़िहार (ظهار) के बारे में जो आदेश दिए हैं, उन्हीं को आगे बढ़ाते हुए फ़रमाया कि जिस व्यक्ति को गुलाम आज़ाद करने की सामर्थ्य न हो, उस पर अनिवार्य है कि वह लगातार दो महीने रोज़े रखे, और यह रोज़े उस समय से पहले पूरे करने होंगे जब पति-पत्नी एक-दूसरे से शारीरिक संबंध बनाएं। यानी जब तक यह कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) पूरा न हो जाए, तब तक पति के लिए अपनी पत्नी से संबंध बनाना जायज़ नहीं है। और अगर कोई व्यक्ति लगातार दो महीने रोज़े रखने की ताक़त भी न रखता हो — जैसे बीमारी, बुढ़ापा या कोई और वैध कारण हो — तो उसे चाहिए कि साठ मस्कीनों (ग़रीबों) को खाना खिलाए, इतना कि वे पेट भरकर खा सकें।
यह सारा नियम अल्लाह ने इसलिए बनाया है ताकि तुम लोग अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर सच्चा ईमान लाओ, उसके आदेशों को अपने ऊपर लागू करो, और उन पुरानी जाहिलियत की बुरी रस्मों को छोड़ दो जो इस्लाम से पहले रिवाज थीं। ये सारी हदें (सीमाएँ) अल्लाह की निर्धारित की हुई हैं, इनसे आगे बढ़ना या इनमें कोई कमी-बेशी करना जायज़ नहीं है। और जो लोग इन आदेशों को नहीं मानते, उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम एक आसान और व्यावहारिक दीन है। अल्लाह ने हर हालत में रास्ता निकाला है — जिसके पास सामर्थ्य हो वह गुलाम आज़ाद करे, न हो तो रोज़े रखे, और यह भी मुमकिन न हो तो साठ ग़रीबों को खाना खिलाए। यह इस बात की सबसे बड़ी गवाही है कि अल्लाह अपने बंदों पर बोझ नहीं डालता। साथ ही, यह आयत हमें अल्लाह की हदों की पाबंदी की तालीम देती है — कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलें, क्योंकि इन्हीं हदों में हमारी भलाई और कामयाबी है। जो इनसे दूर रहेगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में नुक़सान उठाएगा। आओ, हम अल्लाह के आदेशों को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ और उसकी रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 2-6 — अल-मुजादिला
अनुवाद — अल-मुजादिला 4
सूरा अल-मुजादिला आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जिसको ग़ुलाम न मिले तो दोनों की मुक़ारबत के…सूरा आयत 4/22 — अल-मुजादिला المجادلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुजादिला सुनें, अल-मुजादिला अनुवाद, अल-मुजादिला mp3, अल-मुजादिला pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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