अल-अनआम · 38/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَمَا مِن دَابَّةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا طَائِرٍ يَطِيرُ بِجَنَاحَيْهِ إِلَّا أُمَمٌ أَمْثَالُكُم ۚ مَّا فَرَّطْنَا فِي الْكِتَابِ مِن شَيْءٍ ۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِمْ يُحْشَرُونَ ۝٣٨
Wa maa min daaabbatin fil ardi wa laa taaa`iriny yateeru bijanaahaihi illaaa umamun amsaalukum; maa farratnaa fil Kitaabi min shai`in summa ilaa Rabbihim yuhsharoon
📖 हिंदी अर्थ
ज़मीन में जो चलने फिरने वाला (हैवान) या अपने दोनों परों से उड़ने वाला परिन्दा है उनकी भी तुम्हारी तरह जमाअतें हैं और सब के सब लौह महफूज़ में मौजूद (हैं) हमने किताब (क़ुरान) में कोई बात नहीं छोड़ी है फिर सब के सब (चरिन्द हों या परिन्द) अपने परवरदिगार के हुज़ूर में लाए जायेंगे।

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • दाब्बह: धरती पर चलने-फिरने वाला जानवर।
  • उमम: समुदाय, समूह, जातियाँ।
  • फ़र्रत्ना: हमने कमी की या छोड़ा।
  • अल-किताब: लौह-ए-महफ़ूज़ (सुरक्षित पट्टिका)।
  • युहशरून: एकत्र किए जाएँगे, उठाए जाएँगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की सृष्टि के अद्भुत नियम और उसकी व्यापक दया पर ग़ौर करने की शिक्षा देती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि धरती पर चलने-फिरने वाला कोई भी जानवर हो, या आकाश में अपने दोनों पंखों से उड़ने वाला कोई पक्षी हो, वे सब तुम्हारी तरह ही अलग-अलग समुदाय और जातियाँ हैं। यानी जिस तरह तुम इंसानों की अलग-अलग क़ौमें और समूह हैं, उसी तरह जानवरों और पक्षियों की भी अपनी-अपनी प्रजातियाँ, अपनी-अपनी भाषाएँ, अपने-अपने रहन-सहन के तरीक़े और अपनी-अपनी ज़रूरतें हैं। वे सब अल्लाह की रज़ीक़ी पर निर्भर हैं, उनकी आयु निर्धारित है, और उनका पालन-पोषण उसी की ओर से होता है — बिल्कुल तुम्हारी तरह।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "हमने किताब (लौह-ए-महफ़ूज़) में किसी चीज़ को नहीं छोड़ा।" यानी हर छोटी-बड़ी चीज़, हर मख़लूक़ का हाल, उसका रिज़्क़, उसकी मौत का वक़्त, सब कुछ अल्लाह के इल्म और उसकी तक़दीर में लिखा हुआ है। कोई चीज़ अल्लाह के इल्म से बाहर नहीं है, और न ही उसकी हिकमत और रहमत से कोई चीज़ महरूम है।

आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "फिर वे सब अपने रब की तरफ़ इकट्ठे किए जाएँगे।" यानी जिस तरह वे इस दुनिया में अल्लाह की रहमत और रिज़्क़ के साये में ज़िंदगी गुज़ारते हैं, उसी तरह क़यामत के दिन वे भी उठाए जाएँगे और अल्लाह के सामने हाज़िर होंगे। यह अल्लाह की अदालत और उसकी हिकमत का तक़ाज़ा है कि हर मख़लूक़ अपने अमल का नतीजा पाए।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अल्लाह की सृष्टि पर ग़ौर करना चाहिए। जब हम देखते हैं कि एक छोटी सी चिड़िया, एक चींटी, एक जानवर — सब अपने रिज़्क़ के लिए अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और उसी की तरफ़ लौटने वाले हैं, तो हमें भी अपने रब की रहमत पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी इबादत में मशग़ूल रहना चाहिए। अल्लाह ने किसी को भी बेकार नहीं बनाया, हर चीज़ की एक हिकमत है, और हर चीज़ उसकी तारीफ़ करती है। यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत, उसके इल्म और उसकी अदालत पर ईमान लाने की तरफ़ बुलाती है, और यह भी सिखाती है कि हमें अपने आस-पास की मख़लूक़ात के साथ रहम और इंसाफ़ का मामला करना चाहिए, क्योंकि वे भी अल्लाह की पैदा की हुई हैं और उसी की तरफ़ लौटने वाली हैं।



📜 आयत 36-40 — अल-अनआम

36۞ إِنَّمَا يَسْتَجِيبُ الَّذِينَ يَسْمَعُونَ ۘ وَالْمَوْتَىٰ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ ثُمَّ إِلَيْهِ يُرْجَعُونَ
(तुम्हारा कहना तो) सिर्फ वही लोग मानते हैं जो (दिल से) सुनते हैं और मुर्दो को तो ख़ुदा क़यामत ही में उठाएगा फिर उसी की तरफ लौटाए जाएंगें
37وَقَالُوا لَوْلَا نُزِّلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۚ قُلْ إِنَّ اللَّهَ قَادِرٌ عَلَىٰ أَن يُنَزِّلَ آيَةً وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और कुफ्फ़ार कहते हैं कि (आख़िर) उस नबी पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई मौजिज़ा क्यों नहीं नाज़िल होता तो तुम (उनसे) कह दो कि ख़ुदा मौजिज़े के नाज़िल करने पर ज़रुर क़ादिर है मगर उनमें के अक्सर लोग (ख़ुदा की मसलहतों को) नहीं जानते
38وَمَا مِن دَابَّةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا طَائِرٍ يَطِيرُ بِجَنَاحَيْهِ إِلَّا أُمَمٌ أَمْثَالُكُم ۚ مَّا فَرَّطْنَا فِي الْكِتَابِ مِن شَيْءٍ ۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِمْ يُحْشَرُونَ
ज़मीन में जो चलने फिरने वाला (हैवान) या अपने दोनों परों से उड़ने वाला परिन्दा है उनकी भी तुम्हारी तरह जमाअतें हैं और सब के सब लौह महफूज़ में मौजूद (हैं) हमने किताब (क़ुरान) में कोई बात नहीं छोड़ी है फिर सब के सब (चरिन्द हों या परिन्द) अपने परवरदिगार के हुज़ूर में लाए जायेंगे।
39وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا صُمٌّ وَبُكْمٌ فِي الظُّلُمَاتِ ۗ مَن يَشَإِ اللَّهُ يُضْلِلْهُ وَمَن يَشَأْ يَجْعَلْهُ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया गोया वह (कुफ्र के घटाटोप) ऍधेरों में गूंगें बहरे (पड़े हैं) ख़ुदा जिसे चाहे उसे गुमराही में छोड़ दे और जिसे चाहे उसे सीधे ढर्रे पर लगा दे
40قُلْ أَرَأَيْتَكُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُ اللَّهِ أَوْ أَتَتْكُمُ السَّاعَةُ أَغَيْرَ اللَّهِ تَدْعُونَ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि क्या तुम यह समझते हो कि अगर तुम्हारे सामने ख़ुदा का अज़ाब आ जाए या तुम्हारे सामने क़यामत ही आ खड़ी मौजूद हो तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (बताओ कि मदद के वास्ते) क्या ख़ुदा को छोड़कर दूसरे को पुकारोगे
अल-अनआमकुरान सूची
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38आयत

अनुवाद — अल-अनआम 38

सूरा अल-अनआम आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ज़मीन में जो चलने फिरने वाला (हैवान) या अपने दोनों…

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Tuesday, August 18, 2026

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