Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- दाब्बह: धरती पर चलने-फिरने वाला जानवर।
- उमम: समुदाय, समूह, जातियाँ।
- फ़र्रत्ना: हमने कमी की या छोड़ा।
- अल-किताब: लौह-ए-महफ़ूज़ (सुरक्षित पट्टिका)।
- युहशरून: एकत्र किए जाएँगे, उठाए जाएँगे।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें अल्लाह की सृष्टि के अद्भुत नियम और उसकी व्यापक दया पर ग़ौर करने की शिक्षा देती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि धरती पर चलने-फिरने वाला कोई भी जानवर हो, या आकाश में अपने दोनों पंखों से उड़ने वाला कोई पक्षी हो, वे सब तुम्हारी तरह ही अलग-अलग समुदाय और जातियाँ हैं। यानी जिस तरह तुम इंसानों की अलग-अलग क़ौमें और समूह हैं, उसी तरह जानवरों और पक्षियों की भी अपनी-अपनी प्रजातियाँ, अपनी-अपनी भाषाएँ, अपने-अपने रहन-सहन के तरीक़े और अपनी-अपनी ज़रूरतें हैं। वे सब अल्लाह की रज़ीक़ी पर निर्भर हैं, उनकी आयु निर्धारित है, और उनका पालन-पोषण उसी की ओर से होता है — बिल्कुल तुम्हारी तरह।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "हमने किताब (लौह-ए-महफ़ूज़) में किसी चीज़ को नहीं छोड़ा।" यानी हर छोटी-बड़ी चीज़, हर मख़लूक़ का हाल, उसका रिज़्क़, उसकी मौत का वक़्त, सब कुछ अल्लाह के इल्म और उसकी तक़दीर में लिखा हुआ है। कोई चीज़ अल्लाह के इल्म से बाहर नहीं है, और न ही उसकी हिकमत और रहमत से कोई चीज़ महरूम है।
आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "फिर वे सब अपने रब की तरफ़ इकट्ठे किए जाएँगे।" यानी जिस तरह वे इस दुनिया में अल्लाह की रहमत और रिज़्क़ के साये में ज़िंदगी गुज़ारते हैं, उसी तरह क़यामत के दिन वे भी उठाए जाएँगे और अल्लाह के सामने हाज़िर होंगे। यह अल्लाह की अदालत और उसकी हिकमत का तक़ाज़ा है कि हर मख़लूक़ अपने अमल का नतीजा पाए।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अल्लाह की सृष्टि पर ग़ौर करना चाहिए। जब हम देखते हैं कि एक छोटी सी चिड़िया, एक चींटी, एक जानवर — सब अपने रिज़्क़ के लिए अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और उसी की तरफ़ लौटने वाले हैं, तो हमें भी अपने रब की रहमत पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी इबादत में मशग़ूल रहना चाहिए। अल्लाह ने किसी को भी बेकार नहीं बनाया, हर चीज़ की एक हिकमत है, और हर चीज़ उसकी तारीफ़ करती है। यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत, उसके इल्म और उसकी अदालत पर ईमान लाने की तरफ़ बुलाती है, और यह भी सिखाती है कि हमें अपने आस-पास की मख़लूक़ात के साथ रहम और इंसाफ़ का मामला करना चाहिए, क्योंकि वे भी अल्लाह की पैदा की हुई हैं और उसी की तरफ़ लौटने वाली हैं।
📜 आयत 36-40 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 38
सूरा अल-अनआम आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ज़मीन में जो चलने फिरने वाला (हैवान) या अपने दोनों…सूरा आयत 38/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


