अल-अनआम · 39/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا صُمٌّ وَبُكْمٌ فِي الظُّلُمَاتِ ۗ مَن يَشَإِ اللَّهُ يُضْلِلْهُ وَمَن يَشَأْ يَجْعَلْهُ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ ۝٣٩
Wallazeena kazzaboo bi Aayaatinaa summunw wa bukmun fiz zulumaat; mai yasha il laahu yudlilh; wa mai yashaa yaj`alhu `alaa Siraatim Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया गोया वह (कुफ्र के घटाटोप) ऍधेरों में गूंगें बहरे (पड़े हैं) ख़ुदा जिसे चाहे उसे गुमराही में छोड़ दे और जिसे चाहे उसे सीधे ढर्रे पर लगा दे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • صُمٌّ (बहरे): जो सुनकर भी सत्य को न सुनें और उससे लाभ न उठाएँ।
  • بُكْمٌ (गूँगे): जो सत्य बोलने और उसे स्वीकार करने से असमर्थ हों।
  • الظُّلُمَاتِ (अंधकार): अज्ञान, भ्रम और पथभ्रष्टता की अनेक परतें।
  • يُضْلِلْهُ (उसे पथभ्रष्ट कर दे): उसे उसके कर्मों के कारण हिदायत से वंचित कर दे।
  • صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ (सीधा मार्ग): वह मार्ग जिसमें कोई टेढ़ापन न हो—इस्लाम और ईमान का मार्ग।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों (निशानियों, प्रमाणों और शिक्षाओं) को झुठलाया, उनकी हालत बहरे और गूँगों जैसी है—वे सत्य की आवाज़ सुनते हुए भी उसे अनसुना कर देते हैं, और जब सत्य उनके सामने आता है तो उसे बोलने या स्वीकार करने से कतराते हैं। वे घोर अंधकारों में भटक रहे हैं, जहाँ न कोई रोशनी उन्हें रास्ता दिखाती है और न ही वे अपने लिए कोई सही दिशा चुन पाते हैं। उनका यह हाल उनके स्वयं के इनकार और हठधर्मिता का परिणाम है।

अल्लाह की सुन्नत (व्यवस्था) यह है कि जो व्यक्ति सत्य को ठुकराता है और अपनी जिद पर अड़ा रहता है, अल्लाह उसे उसकी हालत पर छोड़ देता है और उसे और अधिक भटकने देता है—यह उसका न्यायपूर्ण फैसला है। और जो व्यक्ति सत्य की तलाश में सच्ची नीयत से आगे बढ़ता है, अल्लाह उसे अपनी कृपा से सीधे मार्ग पर चलाता है, उसके दिल को रोशन करता है और उसे वह रास्ता दिखाता है जो सीधा और स्थिर है। यह सब अल्लाह की इच्छा और हिकमत (बुद्धिमत्ता) के अनुसार होता है, और उसका फैसला पूर्ण न्याय और दया पर आधारित है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को सुनना और उसे स्वीकार करना कितनी बड़ी नेमत है—जो कान और ज़ुबान से सत्य को अपनाता है, वह अंधकार से निकलकर रोशनी की ओर आता है।
  2. अल्लाह की रहमत असीम है—वह किसी को भी सीधा रास्ता दिखाना चाहे तो कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती। इसलिए हमें उससे हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए और अपने दिल को सत्य के लिए खुला रखना चाहिए।
  3. यह आयत हमें चेतावनी देती है कि सत्य से मुँह मोड़ना और उसका मज़ाक उड़ाना हमें अंधकारों में धकेल सकता है—इसलिए हमें हर हाल में सत्य के साथ रहना चाहिए।
  4. यह हमें यह भी सिखाती है कि हिदायत और गुमराही अल्लाह के हाथ में है, लेकिन उसका फैसला हमारे अपने कर्मों और इरादों पर निर्भर करता है—इसलिए हमें अपने अमल को सुधारना चाहिए और अल्लाह से लगातार सीधे रास्ते की प्रार्थना करनी चाहिए।


📜 आयत 37-41 — अल-अनआम

37وَقَالُوا لَوْلَا نُزِّلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۚ قُلْ إِنَّ اللَّهَ قَادِرٌ عَلَىٰ أَن يُنَزِّلَ آيَةً وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और कुफ्फ़ार कहते हैं कि (आख़िर) उस नबी पर उसके परवरदिगार की तरफ से कोई मौजिज़ा क्यों नहीं नाज़िल होता तो तुम (उनसे) कह दो कि ख़ुदा मौजिज़े के नाज़िल करने पर ज़रुर क़ादिर है मगर उनमें के अक्सर लोग (ख़ुदा की मसलहतों को) नहीं जानते
38وَمَا مِن دَابَّةٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا طَائِرٍ يَطِيرُ بِجَنَاحَيْهِ إِلَّا أُمَمٌ أَمْثَالُكُم ۚ مَّا فَرَّطْنَا فِي الْكِتَابِ مِن شَيْءٍ ۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِمْ يُحْشَرُونَ
ज़मीन में जो चलने फिरने वाला (हैवान) या अपने दोनों परों से उड़ने वाला परिन्दा है उनकी भी तुम्हारी तरह जमाअतें हैं और सब के सब लौह महफूज़ में मौजूद (हैं) हमने किताब (क़ुरान) में कोई बात नहीं छोड़ी है फिर सब के सब (चरिन्द हों या परिन्द) अपने परवरदिगार के हुज़ूर में लाए जायेंगे।
39وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا صُمٌّ وَبُكْمٌ فِي الظُّلُمَاتِ ۗ مَن يَشَإِ اللَّهُ يُضْلِلْهُ وَمَن يَشَأْ يَجْعَلْهُ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया गोया वह (कुफ्र के घटाटोप) ऍधेरों में गूंगें बहरे (पड़े हैं) ख़ुदा जिसे चाहे उसे गुमराही में छोड़ दे और जिसे चाहे उसे सीधे ढर्रे पर लगा दे
40قُلْ أَرَأَيْتَكُمْ إِنْ أَتَاكُمْ عَذَابُ اللَّهِ أَوْ أَتَتْكُمُ السَّاعَةُ أَغَيْرَ اللَّهِ تَدْعُونَ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि क्या तुम यह समझते हो कि अगर तुम्हारे सामने ख़ुदा का अज़ाब आ जाए या तुम्हारे सामने क़यामत ही आ खड़ी मौजूद हो तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (बताओ कि मदद के वास्ते) क्या ख़ुदा को छोड़कर दूसरे को पुकारोगे
41بَلْ إِيَّاهُ تَدْعُونَ فَيَكْشِفُ مَا تَدْعُونَ إِلَيْهِ إِن شَاءَ وَتَنسَوْنَ مَا تُشْرِكُونَ
(दूसरों को तो क्या) बल्कि उसी को पुकारोगे फिर अगर वह चाहेगा तो जिस के वास्ते तुमने उसको पुकारा है उसे दफा कर देगा और (उस वक्त) तुम दूसरे माबूदों को जिन्हे तुम (ख़ुदा का) शरीक समझते थे भूल जाओगे
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अनुवाद — अल-अनआम 39

सूरा अल-अनआम आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया गोया…

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Wednesday, August 19, 2026

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