Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- صُمٌّ (बहरे): जो सुनकर भी सत्य को न सुनें और उससे लाभ न उठाएँ।
- بُكْمٌ (गूँगे): जो सत्य बोलने और उसे स्वीकार करने से असमर्थ हों।
- الظُّلُمَاتِ (अंधकार): अज्ञान, भ्रम और पथभ्रष्टता की अनेक परतें।
- يُضْلِلْهُ (उसे पथभ्रष्ट कर दे): उसे उसके कर्मों के कारण हिदायत से वंचित कर दे।
- صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ (सीधा मार्ग): वह मार्ग जिसमें कोई टेढ़ापन न हो—इस्लाम और ईमान का मार्ग।
तफ़सीर (व्याख्या):
जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों (निशानियों, प्रमाणों और शिक्षाओं) को झुठलाया, उनकी हालत बहरे और गूँगों जैसी है—वे सत्य की आवाज़ सुनते हुए भी उसे अनसुना कर देते हैं, और जब सत्य उनके सामने आता है तो उसे बोलने या स्वीकार करने से कतराते हैं। वे घोर अंधकारों में भटक रहे हैं, जहाँ न कोई रोशनी उन्हें रास्ता दिखाती है और न ही वे अपने लिए कोई सही दिशा चुन पाते हैं। उनका यह हाल उनके स्वयं के इनकार और हठधर्मिता का परिणाम है।
अल्लाह की सुन्नत (व्यवस्था) यह है कि जो व्यक्ति सत्य को ठुकराता है और अपनी जिद पर अड़ा रहता है, अल्लाह उसे उसकी हालत पर छोड़ देता है और उसे और अधिक भटकने देता है—यह उसका न्यायपूर्ण फैसला है। और जो व्यक्ति सत्य की तलाश में सच्ची नीयत से आगे बढ़ता है, अल्लाह उसे अपनी कृपा से सीधे मार्ग पर चलाता है, उसके दिल को रोशन करता है और उसे वह रास्ता दिखाता है जो सीधा और स्थिर है। यह सब अल्लाह की इच्छा और हिकमत (बुद्धिमत्ता) के अनुसार होता है, और उसका फैसला पूर्ण न्याय और दया पर आधारित है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को सुनना और उसे स्वीकार करना कितनी बड़ी नेमत है—जो कान और ज़ुबान से सत्य को अपनाता है, वह अंधकार से निकलकर रोशनी की ओर आता है।
- अल्लाह की रहमत असीम है—वह किसी को भी सीधा रास्ता दिखाना चाहे तो कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती। इसलिए हमें उससे हिदायत की दुआ माँगनी चाहिए और अपने दिल को सत्य के लिए खुला रखना चाहिए।
- यह आयत हमें चेतावनी देती है कि सत्य से मुँह मोड़ना और उसका मज़ाक उड़ाना हमें अंधकारों में धकेल सकता है—इसलिए हमें हर हाल में सत्य के साथ रहना चाहिए।
- यह हमें यह भी सिखाती है कि हिदायत और गुमराही अल्लाह के हाथ में है, लेकिन उसका फैसला हमारे अपने कर्मों और इरादों पर निर्भर करता है—इसलिए हमें अपने अमल को सुधारना चाहिए और अल्लाह से लगातार सीधे रास्ते की प्रार्थना करनी चाहिए।
📜 आयत 37-41 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 39
सूरा अल-अनआम आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठला दिया गोया…सूरा आयत 39/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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