अल-अनआम · 4/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
وَمَا تَأْتِيهِم مِّنْ آيَةٍ مِّنْ آيَاتِ رَبِّهِمْ إِلَّا كَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ ۝٤
Wa maa taateehim min Aayatim min Aayaati Rabbihim illaa kaanoo `anhaa mu`rideen
📖 हिंदी अर्थ
और उन (लोगों का) अजब हाल है कि उनके पास ख़ुदा की आयत में से जब कोई आयत आती तो बस ये लोग ज़रुर उससे मुंह फेर लेते थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَةٍ: निशानी, प्रमाण, चमत्कार, या कोई स्पष्ट दलील।
  • مُعْرِضِينَ: मुँह मोड़ने वाले, उपेक्षा करने वाले, ध्यान न देने वाले।

व्याख्या:

यह आयत उन काफिरों (विशेषकर मक्का के मुशरिकों) के बारे में बताती है जिनके पास अल्लाह की ओर से लगातार निशानियाँ और प्रमाण आते रहे, लेकिन उन्होंने उन्हें स्वीकार नहीं किया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब भी उनके रब की कोई निशानी उनके पास आती है—चाहे वह क़ुरआन की आयतें हों, चाँद के दो टुकड़े होने का चमत्कार हो, या अन्य स्पष्ट प्रमाण जो अल्लाह की एकता और पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सच्चाई पर दलील देते हैं—तो वे उससे मुँह मोड़ लेते हैं, उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और उस पर विचार करने या उसे क़बूल करने से इनकार कर देते हैं। उनका यह रवैया ज़िद और हठ पर आधारित था, न कि किसी कमी या अस्पष्टता पर। वे सच्चाई को देखते हुए भी जानबूझकर उससे विमुख हो जाते थे, क्योंकि उनके दिलों में घमंड और अंधी परंपरा का बोलबाला था। यह आयत उनके इस व्यवहार पर अफसोस और उनकी नादानी को उजागर करती है, कि जब सच्चाई सामने आती है तो वे उसे ठुकरा देते हैं।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. अल्लाह की हर निशानी इंसान की हिदायत के लिए होती है, लेकिन जो लोग ज़िद और हठ करते हैं, वे सबसे स्पष्ट प्रमाणों से भी फ़ायदा नहीं उठाते। यह हमें सिखाता है कि दिल की पाकीज़गी और अल्लाह की तरफ़ झुकाव ही हिदायत पाने की शर्त है।
  2. यह आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अल्लाह की आयतों (क़ुरआन, कुदरत के निशान, और पैग़म्बरों के चमत्कारों) को सुनकर या देखकर उनसे मुँह न मोड़ें, बल्कि उन पर गहराई से विचार करें और उनसे सबक़ लें।
  3. इससे हमें यह समझ मिलती है कि अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं को मिलती है जो सच्चाई के तलबगार होते हैं, और जो लोग घमंड या अंधी परंपरा के कारण सच्चाई को ठुकराते हैं, वे खुद अपने नुक़सान का कारण बनते हैं।
  4. यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि वे अपने जीवन में अल्लाह की आयतों के प्रति संवेदनशील रहें—चाहे वह क़ुरआन की तिलावत हो, प्रकृति के नज़ारे हों, या जीवन की घटनाएँ—और उनसे हिदायत और इबरत हासिल करें, ताकि वे उन लोगों की तरह न हों जिन्होंने सच्चाई को देखकर भी उसे नकार दिया।


📜 आयत 2-6 — सूरा अल-अनआम

2هُوَ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن طِينٍ ثُمَّ قَضَىٰ أَجَلًا ۖ وَأَجَلٌ مُّسَمًّى عِندَهُ ۖ ثُمَّ أَنتُمْ تَمْتَرُونَ
वह तो वही ख़ुदा है जिसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर (फिर तुम्हारे मरने का) एक वक्त मुक़र्रर कर दिया और (अगरचे तुमको मालूम नहीं मगर) उसके नज़दीक (क़यामत) का वक्त मुक़र्रर है
3وَهُوَ اللَّهُ فِي السَّمَاوَاتِ وَفِي الْأَرْضِ ۖ يَعْلَمُ سِرَّكُمْ وَجَهْرَكُمْ وَيَعْلَمُ مَا تَكْسِبُونَ
फिर (यही) तुम शक़ करते हो और वही तो आसमानों में (भी) और ज़मीन में (भी) ख़ुदा है वही तुम्हारे ज़ाहिर व बातिन से (भी) ख़बरदार है और वही जो कुछ भी तुम करते हो जानता है
4وَمَا تَأْتِيهِم مِّنْ آيَةٍ مِّنْ آيَاتِ رَبِّهِمْ إِلَّا كَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
और उन (लोगों का) अजब हाल है कि उनके पास ख़ुदा की आयत में से जब कोई आयत आती तो बस ये लोग ज़रुर उससे मुंह फेर लेते थे
5فَقَدْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ فَسَوْفَ يَأْتِيهِمْ أَنبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
चुनान्चे जब उनके पास (क़ुरान बरहक़) आया तो उसको भी झुठलाया तो ये लोग जिसके साथ मसख़रापन कर रहे है उनकी हक़ीक़त उन्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगी
6أَلَمْ يَرَوْا كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّن قَرْنٍ مَّكَّنَّاهُمْ فِي الْأَرْضِ مَا لَمْ نُمَكِّن لَّكُمْ وَأَرْسَلْنَا السَّمَاءَ عَلَيْهِم مِّدْرَارًا وَجَعَلْنَا الْأَنْهَارَ تَجْرِي مِن تَحْتِهِمْ فَأَهْلَكْنَاهُم بِذُنُوبِهِمْ وَأَنشَأْنَا مِن بَعْدِهِمْ قَرْنًا آخَرِينَ
क्या उन्हें सूझता नहीं कि हमने उनसे पहले कितने गिरोह (के गिरोह) हलाक कर डाले जिनको हमने रुए ज़मीन मे वह (कूवत) क़ुदरत अता की थी जो अभी तक तुमको नहीं दी और हमने आसमान तो उन पर मूसलाधार पानी बरसता छोड़ दिया था और उनके (मकानात के) नीचे बहती हुई नहरें बना दी थी (मगर) फिर भी उनके गुनाहों की वजह से उनको मार डाला और उनके बाद एक दूसरे गिरोह को पैदा कर दिया
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-अनआम 4

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Wednesday, September 30, 2026

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