अल-अनआम · 3/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
وَهُوَ اللَّهُ فِي السَّمَاوَاتِ وَفِي الْأَرْضِ ۖ يَعْلَمُ سِرَّكُمْ وَجَهْرَكُمْ وَيَعْلَمُ مَا تَكْسِبُونَ ۝٣
Wa Huwal laahu fissamaawaati wa fil ardi ya`lamu sirrakum wa jahrakum wa ya`lamu maa taksiboon
📖 हिंदी अर्थ
फिर (यही) तुम शक़ करते हो और वही तो आसमानों में (भी) और ज़मीन में (भी) ख़ुदा है वही तुम्हारे ज़ाहिर व बातिन से (भी) ख़बरदार है और वही जो कुछ भी तुम करते हो जानता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سِرَّكُمْ (तुम्हारा भेद/राज़): वह बात जो तुम अपने दिलों में छिपाते हो या चुपके से करते हो।
  • جَهْرَكُمْ (तुम्हारा खुला अमल): वह बात या काम जो तुम खुले तौर पर करते हो या कहते हो।
  • مَا تَكْسِبُونَ (जो तुम कमाते हो): तुम्हारे सारे कर्म, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, जो तुम अपने लिए कमाते हो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह ही वह सच्चा माबूद (पूज्य) है जो आसमानों और ज़मीन में अपनी उलूहियत (ख़ुदाई) और रुबूबियत (पालनहार होने) के साथ मौजूद है। वही अकेला इबादत के लायक़ है, कोई और उसका शरीक नहीं। उसकी अलौकिकता और क़ुदरत की सबसे बड़ी दलील यह है कि वह तुम्हारे हर भेद और राज़ को जानता है—चाहे वह दिल की गहराइयों में छिपा हो या ज़ुबान पर हो—और वह तुम्हारे हर खुले अमल को भी देखता है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी। वह तुम्हारे उन सारे कर्मों को भी जानता है जो तुम करते हो, चाहे वे नेकी हों या गुनाह। इसी ज्ञान की बिना पर वह तुम्हें बदला देगा—नेकी का अच्छा बदला और बुराई की सज़ा। यही उसकी माबूद होने की सबसे बड़ी निशानी है कि वह हर चीज़ का जानने वाला और हर अमल का हिसाब लेने वाला है।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की हाज़िर-नाज़िर होने का एहसास: जब हमें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमारे छिपे और खुले हर अमल को जानता है, तो हमारे दिल में उसका खौफ़ और अदब पैदा होता है। यह एहसास हमें गुनाहों से रोकता है और नेकी की तरफ़ राग़िब करता है।
  2. इख़लास (ख़ुलूस) की तरबियत: यह आयत हमें सिखाती है कि अमल सिर्फ़ अल्लाह के लिए करना चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ देखता और जानता है। लोगों की नज़रों से छिपे अमल भी अल्लाह की नज़र में हैं, इसलिए नीयत को साफ़ रखना चाहिए।
  3. जवाबदेही का यक़ीन: यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमारे हर कर्म का हिसाब होगा। यह यक़ीन हमें ज़िम्मेदार बनाता है और हमें इस दुनिया में बेहतर इंसान बनने की तरफ़ ले जाता है।
  4. अल्लाह की मुहब्बत और उम्मीद: जब हम जानते हैं कि अल्लाह हमारी हर नेकी को जानता है, चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों न हो, तो हमें उसकी रहमत से उम्मीद बढ़ती है। यह हमें नेक काम करने की तरफ़ उभारता है और इस्लाम की रूह (आत्मा) को समझने में मदद करता है।


📜 आयत 1-5 — सूरा अल-अनआम

1الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَجَعَلَ الظُّلُمَاتِ وَالنُّورَ ۖ ثُمَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ
सब तारीफ ख़ुदा ही को (सज़ावार) है जिसने बहुतेरे आसमान और ज़मीन को पैदा किया और उसमें मुख्तलिफ क़िस्मों की तारीकी रोशनी बनाई फिर (बावजूद उसके) कुफ्फार (औरों को) अपने परवरदिगार के बराबर करते हैं
2هُوَ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن طِينٍ ثُمَّ قَضَىٰ أَجَلًا ۖ وَأَجَلٌ مُّسَمًّى عِندَهُ ۖ ثُمَّ أَنتُمْ تَمْتَرُونَ
वह तो वही ख़ुदा है जिसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर (फिर तुम्हारे मरने का) एक वक्त मुक़र्रर कर दिया और (अगरचे तुमको मालूम नहीं मगर) उसके नज़दीक (क़यामत) का वक्त मुक़र्रर है
3وَهُوَ اللَّهُ فِي السَّمَاوَاتِ وَفِي الْأَرْضِ ۖ يَعْلَمُ سِرَّكُمْ وَجَهْرَكُمْ وَيَعْلَمُ مَا تَكْسِبُونَ
फिर (यही) तुम शक़ करते हो और वही तो आसमानों में (भी) और ज़मीन में (भी) ख़ुदा है वही तुम्हारे ज़ाहिर व बातिन से (भी) ख़बरदार है और वही जो कुछ भी तुम करते हो जानता है
4وَمَا تَأْتِيهِم مِّنْ آيَةٍ مِّنْ آيَاتِ رَبِّهِمْ إِلَّا كَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
और उन (लोगों का) अजब हाल है कि उनके पास ख़ुदा की आयत में से जब कोई आयत आती तो बस ये लोग ज़रुर उससे मुंह फेर लेते थे
5فَقَدْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ فَسَوْفَ يَأْتِيهِمْ أَنبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
चुनान्चे जब उनके पास (क़ुरान बरहक़) आया तो उसको भी झुठलाया तो ये लोग जिसके साथ मसख़रापन कर रहे है उनकी हक़ीक़त उन्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगी
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-अनआम 3

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Wednesday, September 30, 2026

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