Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سِرَّكُمْ (तुम्हारा भेद/राज़): वह बात जो तुम अपने दिलों में छिपाते हो या चुपके से करते हो।
- جَهْرَكُمْ (तुम्हारा खुला अमल): वह बात या काम जो तुम खुले तौर पर करते हो या कहते हो।
- مَا تَكْسِبُونَ (जो तुम कमाते हो): तुम्हारे सारे कर्म, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, जो तुम अपने लिए कमाते हो।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह ही वह सच्चा माबूद (पूज्य) है जो आसमानों और ज़मीन में अपनी उलूहियत (ख़ुदाई) और रुबूबियत (पालनहार होने) के साथ मौजूद है। वही अकेला इबादत के लायक़ है, कोई और उसका शरीक नहीं। उसकी अलौकिकता और क़ुदरत की सबसे बड़ी दलील यह है कि वह तुम्हारे हर भेद और राज़ को जानता है—चाहे वह दिल की गहराइयों में छिपा हो या ज़ुबान पर हो—और वह तुम्हारे हर खुले अमल को भी देखता है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी। वह तुम्हारे उन सारे कर्मों को भी जानता है जो तुम करते हो, चाहे वे नेकी हों या गुनाह। इसी ज्ञान की बिना पर वह तुम्हें बदला देगा—नेकी का अच्छा बदला और बुराई की सज़ा। यही उसकी माबूद होने की सबसे बड़ी निशानी है कि वह हर चीज़ का जानने वाला और हर अमल का हिसाब लेने वाला है।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह की हाज़िर-नाज़िर होने का एहसास: जब हमें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमारे छिपे और खुले हर अमल को जानता है, तो हमारे दिल में उसका खौफ़ और अदब पैदा होता है। यह एहसास हमें गुनाहों से रोकता है और नेकी की तरफ़ राग़िब करता है।
- इख़लास (ख़ुलूस) की तरबियत: यह आयत हमें सिखाती है कि अमल सिर्फ़ अल्लाह के लिए करना चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ देखता और जानता है। लोगों की नज़रों से छिपे अमल भी अल्लाह की नज़र में हैं, इसलिए नीयत को साफ़ रखना चाहिए।
- जवाबदेही का यक़ीन: यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमारे हर कर्म का हिसाब होगा। यह यक़ीन हमें ज़िम्मेदार बनाता है और हमें इस दुनिया में बेहतर इंसान बनने की तरफ़ ले जाता है।
- अल्लाह की मुहब्बत और उम्मीद: जब हम जानते हैं कि अल्लाह हमारी हर नेकी को जानता है, चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों न हो, तो हमें उसकी रहमत से उम्मीद बढ़ती है। यह हमें नेक काम करने की तरफ़ उभारता है और इस्लाम की रूह (आत्मा) को समझने में मदद करता है।
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 3
सूरा अल-अनआम आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (यही) तुम शक़ करते हो और वही तो आसमानों…सूरा आयत 3/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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