अल-अनआम · 6/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
أَلَمْ يَرَوْا كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّن قَرْنٍ مَّكَّنَّاهُمْ فِي الْأَرْضِ مَا لَمْ نُمَكِّن لَّكُمْ وَأَرْسَلْنَا السَّمَاءَ عَلَيْهِم مِّدْرَارًا وَجَعَلْنَا الْأَنْهَارَ تَجْرِي مِن تَحْتِهِمْ فَأَهْلَكْنَاهُم بِذُنُوبِهِمْ وَأَنشَأْنَا مِن بَعْدِهِمْ قَرْنًا آخَرِينَ ۝٦
Alam yaraw kam ahlaknaa min qablihim min qarnim makkannaahum fil ardi maa lam numakkil lakum wa arsalnas samaaa`a `alaihim midraaranw wa ja`alnal anhaara tajree min tahtihim fa ahlak naahum bizunoobihim wa anshaanaa mim ba`dihim qarnan aakhareen
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन्हें सूझता नहीं कि हमने उनसे पहले कितने गिरोह (के गिरोह) हलाक कर डाले जिनको हमने रुए ज़मीन मे वह (कूवत) क़ुदरत अता की थी जो अभी तक तुमको नहीं दी और हमने आसमान तो उन पर मूसलाधार पानी बरसता छोड़ दिया था और उनके (मकानात के) नीचे बहती हुई नहरें बना दी थी (मगर) फिर भी उनके गुनाहों की वजह से उनको मार डाला और उनके बाद एक दूसरे गिरोह को पैदा कर दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • क़र्न (قرن): एक समय में रहने वाली पूरी पीढ़ी या समुदाय।
  • मक्कन्नाहुम (مكنّاهم): हमने उन्हें शक्ति और अधिकार दिया।
  • मिद्रार (مدرار): लगातार और प्रचुर मात्रा में बरसने वाली बारिश।
  • अन्शा'ना (أنشأنا): हमने पैदा किया, बनाया।

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या इन काफ़िरों ने उन पिछली उम्मतों के विनाश को नहीं देखा जो इनसे पहले गुज़र चुकी हैं? हमने उन्हें धरती में वह शक्ति और सामर्थ्य दी थी जो तुम्हें भी नहीं दी गई। हमने उन पर लगातार बारिशें बरसाईं और उनके निवास स्थानों के नीचे नहरें बहाईं। यह सब कुछ उन्हें दिया गया, लेकिन उन्होंने अल्लाह की नेमतों का कृतघ्नता के साथ सामना किया और उसकी नाफ़रमानी की। उन्होंने रसूलों को झुठलाया और अपने गुनाहों में डूबे रहे। अतः हमने उन्हें उनके गुनाहों के कारण नष्ट कर दिया। फिर हमने उनके बाद दूसरी पीढ़ियों को पैदा किया, जो उनकी जगह धरती में आबाद हुईं। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है कि वह ज़ालिमों को उनकी बुराइयों के कारण पकड़ता है, चाहे उन्हें कितनी ही ताक़त और साधन क्यों न दिए गए हों।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की शक्ति और उसके इतिहास के नियमों पर ग़ौर करना चाहिए। पिछली उम्मतों का विनाश इस बात का सबूत है कि अल्लाह अपने दुश्मनों को कभी नहीं छोड़ता।
  2. दुनिया की ताक़त और साधन किसी को अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकते। जो लोग अपनी ताक़त पर घमंड करते हैं, वे अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल हो जाते हैं और अंजाम उनके लिए बुरा होता है।
  3. अल्लाह की नेमतें (जैसे बारिश, नहरें, ताक़त) इंसान के लिए आज़माइश होती हैं। इनका सही उपयोग अल्लाह की इबादत और उसकी राह में होना चाहिए, न कि नाफ़रमानी में।
  4. यह आयत मुसलमानों को सबक़ देती है कि वे अल्लाह के दीन पर साबित क़दम रहें और काफ़िरों के ऐशो-आराम और ताक़त को देखकर न डरें, क्योंकि अल्लाह की मदद सच्चे मोमिनों के साथ है।
  5. अल्लाह का इंसाफ़ यह है कि वह गुनाहों पर तुरंत पकड़ नहीं करता, बल्कि मोहलत देता है, लेकिन जब पकड़ता है तो कोई बचा नहीं सकता। यह हमें तौबा और इस्तिग़फ़ार की तरफ़ ले जाता है।


📜 आयत 4-8 — अल-अनआम

4وَمَا تَأْتِيهِم مِّنْ آيَةٍ مِّنْ آيَاتِ رَبِّهِمْ إِلَّا كَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
और उन (लोगों का) अजब हाल है कि उनके पास ख़ुदा की आयत में से जब कोई आयत आती तो बस ये लोग ज़रुर उससे मुंह फेर लेते थे
5فَقَدْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ فَسَوْفَ يَأْتِيهِمْ أَنبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
चुनान्चे जब उनके पास (क़ुरान बरहक़) आया तो उसको भी झुठलाया तो ये लोग जिसके साथ मसख़रापन कर रहे है उनकी हक़ीक़त उन्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगी
6أَلَمْ يَرَوْا كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّن قَرْنٍ مَّكَّنَّاهُمْ فِي الْأَرْضِ مَا لَمْ نُمَكِّن لَّكُمْ وَأَرْسَلْنَا السَّمَاءَ عَلَيْهِم مِّدْرَارًا وَجَعَلْنَا الْأَنْهَارَ تَجْرِي مِن تَحْتِهِمْ فَأَهْلَكْنَاهُم بِذُنُوبِهِمْ وَأَنشَأْنَا مِن بَعْدِهِمْ قَرْنًا آخَرِينَ
क्या उन्हें सूझता नहीं कि हमने उनसे पहले कितने गिरोह (के गिरोह) हलाक कर डाले जिनको हमने रुए ज़मीन मे वह (कूवत) क़ुदरत अता की थी जो अभी तक तुमको नहीं दी और हमने आसमान तो उन पर मूसलाधार पानी बरसता छोड़ दिया था और उनके (मकानात के) नीचे बहती हुई नहरें बना दी थी (मगर) फिर भी उनके गुनाहों की वजह से उनको मार डाला और उनके बाद एक दूसरे गिरोह को पैदा कर दिया
7وَلَوْ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ كِتَابًا فِي قِرْطَاسٍ فَلَمَسُوهُ بِأَيْدِيهِمْ لَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और (ऐ रसूल) अगर हम कागज़ पर (लिखी लिखाई) किताब (भी) तुम पर नाज़िल करते और ये लोग उसे अपने हाथों से छू भी लेते फिर भी कुफ्फार (न मानते और) कहते कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
8وَقَالُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ مَلَكٌ ۖ وَلَوْ أَنزَلْنَا مَلَكًا لَّقُضِيَ الْأَمْرُ ثُمَّ لَا يُنظَرُونَ
और (ये भी) कहते कि उस (नबी) पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं नाज़िल किया गया (जो साथ साथ रहता) हालॉकि अगर हम फरिश्ता भेज देते तो (उनका) काम ही तमाम हो जाता (और) फिर उन्हें मोहलत भी न दी जाती
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अनुवाद — अल-अनआम 6

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सूरा आयत 6/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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