अल-अनआम · 7/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَلَوْ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ كِتَابًا فِي قِرْطَاسٍ فَلَمَسُوهُ بِأَيْدِيهِمْ لَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ ۝٧
Wa law nazzalnaa `alaika Kitaaban fee qirtaasin falamasoohu bi aideehim laqaalal lazeena kafarooo in haazaaa illaa sihrum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) अगर हम कागज़ पर (लिखी लिखाई) किताब (भी) तुम पर नाज़िल करते और ये लोग उसे अपने हाथों से छू भी लेते फिर भी कुफ्फार (न मानते और) कहते कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قِرْطَاسٍ (क़िर्तास): काग़ज़, पन्नी या लिखने की पतली तह।
  • فَلَمَسُوهُ (फ़लमसूहु): उसे अपने हाथों से छू लें।
  • سِحْرٌ مُبِينٌ (सिह्रुन मुबीन): स्पष्ट और प्रत्यक्ष जादू।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अगर हम आप पर आसमान से एक लिखी हुई किताब उतार देते, जो काग़ज़ पर होती, और ये काफ़िर लोग उसे अपनी आँखों से देखते और अपने हाथों से छूकर महसूस कर लेते—जिससे किसी भी तरह का कोई संदेह न रहता कि यह वाकई अल्लाह की तरफ़ से है—तब भी ये ज़िद्दी और हठधर्मी करने वाले लोग ईमान न लाते। इसके बजाय वे यही कहते कि यह तो सिर्फ़ साफ़ जादू है। उनका यह कहना किसी कमी या सबूत की कमी की वजह से नहीं था, बल्कि यह उनकी सरकशी, अकड़ और सच्चाई को मानने से इनकार करने की वजह से था। वे सच्चाई को देखकर भी उसे झुठलाने की कोशिश करते थे, क्योंकि उनके दिलों में घमंड और हठ भरा हुआ था।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान दिल की चीज़ है, सिर्फ़ चमत्कार या मुँह देखी बातों से नहीं आता। जिसका दिल सच्चाई की तलाश में नहीं होता, वह सबसे बड़े सबूत के सामने भी बहाने बनाता है।
  2. हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को अहंकार और हठ से पाक रखें, और जब सच्चाई सामने आए तो उसे विनम्रता से क़बूल करें।
  3. यह आयत हमें नबी ﷺ के सब्र और उनकी मेहनत की क़द्र करना सिखाती है—उन्होंने ऐसे हठी लोगों के बीच दीन को पहुँचाया, और हमें भी अपने समाज में सच्चाई फैलाने के लिए हिम्मत और सब्र रखना चाहिए।
  4. क़ुरआन की सच्चाई और उसकी रौशनी हर ज़माने में क़ायम है; हमें उस पर अमल करके अपनी ज़िंदगी को रोशन करना चाहिए, क्योंकि यही वह किताब है जो अल्लाह ने हमारे लिए हिदायत के तौर पर भेजी है।
🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — अल-अनआम

5فَقَدْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ فَسَوْفَ يَأْتِيهِمْ أَنبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
चुनान्चे जब उनके पास (क़ुरान बरहक़) आया तो उसको भी झुठलाया तो ये लोग जिसके साथ मसख़रापन कर रहे है उनकी हक़ीक़त उन्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगी
6أَلَمْ يَرَوْا كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّن قَرْنٍ مَّكَّنَّاهُمْ فِي الْأَرْضِ مَا لَمْ نُمَكِّن لَّكُمْ وَأَرْسَلْنَا السَّمَاءَ عَلَيْهِم مِّدْرَارًا وَجَعَلْنَا الْأَنْهَارَ تَجْرِي مِن تَحْتِهِمْ فَأَهْلَكْنَاهُم بِذُنُوبِهِمْ وَأَنشَأْنَا مِن بَعْدِهِمْ قَرْنًا آخَرِينَ
क्या उन्हें सूझता नहीं कि हमने उनसे पहले कितने गिरोह (के गिरोह) हलाक कर डाले जिनको हमने रुए ज़मीन मे वह (कूवत) क़ुदरत अता की थी जो अभी तक तुमको नहीं दी और हमने आसमान तो उन पर मूसलाधार पानी बरसता छोड़ दिया था और उनके (मकानात के) नीचे बहती हुई नहरें बना दी थी (मगर) फिर भी उनके गुनाहों की वजह से उनको मार डाला और उनके बाद एक दूसरे गिरोह को पैदा कर दिया
7وَلَوْ نَزَّلْنَا عَلَيْكَ كِتَابًا فِي قِرْطَاسٍ فَلَمَسُوهُ بِأَيْدِيهِمْ لَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और (ऐ रसूल) अगर हम कागज़ पर (लिखी लिखाई) किताब (भी) तुम पर नाज़िल करते और ये लोग उसे अपने हाथों से छू भी लेते फिर भी कुफ्फार (न मानते और) कहते कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
8وَقَالُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ مَلَكٌ ۖ وَلَوْ أَنزَلْنَا مَلَكًا لَّقُضِيَ الْأَمْرُ ثُمَّ لَا يُنظَرُونَ
और (ये भी) कहते कि उस (नबी) पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं नाज़िल किया गया (जो साथ साथ रहता) हालॉकि अगर हम फरिश्ता भेज देते तो (उनका) काम ही तमाम हो जाता (और) फिर उन्हें मोहलत भी न दी जाती
9وَلَوْ جَعَلْنَاهُ مَلَكًا لَّجَعَلْنَاهُ رَجُلًا وَلَلَبَسْنَا عَلَيْهِم مَّا يَلْبِسُونَ
और अगर हम फरिश्ते को नबी बनाते तो (आख़िर) उसको भी मर्द सूरत बनाते और जो शुबहे ये लोग कर रहे हैं वही शुबहे (गोया) हम ख़ुद उन पर (उस वक्त भी) उठा देते
अल-अनआमकुरान सूची
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7आयत

अनुवाद — अल-अनआम 7

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Tuesday, August 18, 2026

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