अल-अनआम · 77/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
فَلَمَّا رَأَى الْقَمَرَ بَازِغًا قَالَ هَٰذَا رَبِّي ۖ فَلَمَّا أَفَلَ قَالَ لَئِن لَّمْ يَهْدِنِي رَبِّي لَأَكُونَنَّ مِنَ الْقَوْمِ الضَّالِّينَ ۝٧٧
Falammmaa ra al qamara baazighan qaala haazaa Rabbee falammmmaaa afala qaala la`il lam yahdinee Rabbee la akoonanna minal qawmid daaalleen
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब चाँद को जगमगाता हुआ देखा तो बोल उठे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे कि अगर (कहीं) मेरा (असली) परवरदिगार मेरी हिदायत न करता तो मैं ज़रुर गुमराह लोगों में हो जाता
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بَازِغًا: उगता हुआ, निकलता हुआ (चाँद के उदय होने के समय को कहते हैं)।
  • أَفَلَ: डूब गया, अस्त हो गया, छिप गया।
  • يَهْدِنِي: मुझे मार्गदर्शन दे, मुझे सीधा रास्ता दिखाए।
  • الضَّالِّينَ: गुमराह लोग, पथभ्रष्ट लोग।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने चाँद को उगता हुआ देखा, तो उन्होंने अपनी क़ौम से मुनाज़रा (वाद-विवाद) करने के लिए, उन्हीं के तरीक़े पर बात करते हुए कहा: "यह मेरा रब है।" यह उन्होंने अपने दिल की क़सद से नहीं कहा, बल्कि अपने मुख़ातिबीन (सामने वालों) को उनकी सोच पर क़दम रखकर सच्चाई तक पहुँचाने के लिए कहा।

फिर जब वह चाँद डूब गया, तो उन्होंने उसी वक़्त उसकी नाकामी और कमज़ोरी को मशाहिदा कर लिया और कहा: "अगर मेरा रब मुझे हिदायत न दे, तो मैं भी उन लोगों में से हो जाऊँगा जो रास्ते से भटक गए हैं।" यानी उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि जो चीज़ उगती है और डूब जाती है, वह रब नहीं हो सकती, क्योंकि रब वही है जो हमेशा क़ायम रहे, कभी ज़ाइल न हो। चाँद का डूबना उसकी मख़लूक़ (पैदा की हुई चीज़) होने की दलील है, और यही वजह है कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को यह सिखाया कि सच्ची हिदायत सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से आती है, और उसी की तरफ़ रुजू करना चाहिए।


फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. अक़्ल का इस्तेमाल: यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपनी अक़्ल से ग़ौर-ओ-फ़िक्र करना चाहिए। जो चीज़ बदलती है, डूबती-उगती है, वह पूजा के क़ाबिल नहीं हो सकती। अल्लाह ही वह हस्ती है जो कभी नहीं बदलती।
  2. हक़ की तलाश: हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की तरह हमें भी सच्चाई की तलाश में लगे रहना चाहिए, और जब सच्चाई मिल जाए तो उसे बेझिझक क़बूल करना चाहिए।
  3. अल्लाह पर भरोसा: इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने यह दुआ और एहतियाज़ ज़ाहिर किया कि "अगर मेरा रब मुझे हिदायत न दे..." — यह सिखाता है कि हमें हर वक़्त अल्लाह से हिदायत की दरख़्वास्त करनी चाहिए और यह यक़ीन रखना चाहिए कि हिदायत सिर्फ़ उसी के हाथ में है।
  4. तौहीद की पुख़्तगी: यह आयत तौहीद (अल्लाह की एकता) की सबसे मज़बूत दलील है — जो चीज़ें मख़लूक़ हैं, वे रब नहीं हो सकतीं। यह हमें शिर्क से बचाती है और अल्लाह की इबादत पर मज़बूत करती है।
  5. इब्लाग़ का तरीक़ा: दावत-ओ-तब्लीग़ में हक़ीमाना तरीक़ा अपनाना चाहिए, जैसा इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनाया — पहले सामने वाले की बात को मानकर, फिर उसकी कमज़ोरी बयान करके सच्चाई तक पहुँचाया।
🎧 सुनें

📜 आयत 75-79 — अल-अनआम

75وَكَذَٰلِكَ نُرِي إِبْرَاهِيمَ مَلَكُوتَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلِيَكُونَ مِنَ الْمُوقِنِينَ
और (जिस तरह हमने इबराहीम को दिखाया था कि बुत क़ाबिले परसतिश (पूजने के क़ाबिल) नहीं) उसी तरह हम इबराहीम को सारे आसमान और ज़मीन की सल्तनत का (इन्तज़ाम) दिखाते रहे ताकि वह (हमारी वहदानियत का) यक़ीन करने वालों से हो जाएं
76فَلَمَّا جَنَّ عَلَيْهِ اللَّيْلُ رَأَىٰ كَوْكَبًا ۖ قَالَ هَٰذَا رَبِّي ۖ فَلَمَّا أَفَلَ قَالَ لَا أُحِبُّ الْآفِلِينَ
तो जब उन पर रात की तारीक़ी (अंधेरा) छा गयी तो एक सितारे को देखा तो दफअतन बोल उठे (हाए क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह डूब गया तो कहने लगे ग़ुरुब (डूब) हो जाने वाली चीज़ को तो मै (ख़ुदा बनाना) पसन्द नहीं करता
77فَلَمَّا رَأَى الْقَمَرَ بَازِغًا قَالَ هَٰذَا رَبِّي ۖ فَلَمَّا أَفَلَ قَالَ لَئِن لَّمْ يَهْدِنِي رَبِّي لَأَكُونَنَّ مِنَ الْقَوْمِ الضَّالِّينَ
फिर जब चाँद को जगमगाता हुआ देखा तो बोल उठे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे कि अगर (कहीं) मेरा (असली) परवरदिगार मेरी हिदायत न करता तो मैं ज़रुर गुमराह लोगों में हो जाता
78فَلَمَّا رَأَى الشَّمْسَ بَازِغَةً قَالَ هَٰذَا رَبِّي هَٰذَا أَكْبَرُ ۖ فَلَمَّا أَفَلَتْ قَالَ يَا قَوْمِ إِنِّي بَرِيءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ
फिर जब आफताब को दमकता हुआ देखा तो कहने लगे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है ये तो सबसे बड़ा (भी) है फिर जब ये भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे ऐ मेरी क़ौम जिन जिन चीज़ों को तुम लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो उनसे मैं बेज़ार हूँ
79إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا ۖ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ
(ये हरगिज़ नहीं हो सकते) मैने तो बातिल से कतराकर उसकी तरफ से मुँह कर लिया है जिसने बहुतेरे आसमान और ज़मीन पैदा किए और मैं मुशरेकीन से नहीं हूँ
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अनुवाद — अल-अनआम 77

सूरा अल-अनआम आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब चाँद को जगमगाता हुआ देखा तो बोल उठे…

सूरा आयत 77/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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