Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بَازِغًا: उगता हुआ, निकलता हुआ (चाँद के उदय होने के समय को कहते हैं)।
- أَفَلَ: डूब गया, अस्त हो गया, छिप गया।
- يَهْدِنِي: मुझे मार्गदर्शन दे, मुझे सीधा रास्ता दिखाए।
- الضَّالِّينَ: गुमराह लोग, पथभ्रष्ट लोग।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने चाँद को उगता हुआ देखा, तो उन्होंने अपनी क़ौम से मुनाज़रा (वाद-विवाद) करने के लिए, उन्हीं के तरीक़े पर बात करते हुए कहा: "यह मेरा रब है।" यह उन्होंने अपने दिल की क़सद से नहीं कहा, बल्कि अपने मुख़ातिबीन (सामने वालों) को उनकी सोच पर क़दम रखकर सच्चाई तक पहुँचाने के लिए कहा।
फिर जब वह चाँद डूब गया, तो उन्होंने उसी वक़्त उसकी नाकामी और कमज़ोरी को मशाहिदा कर लिया और कहा: "अगर मेरा रब मुझे हिदायत न दे, तो मैं भी उन लोगों में से हो जाऊँगा जो रास्ते से भटक गए हैं।" यानी उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि जो चीज़ उगती है और डूब जाती है, वह रब नहीं हो सकती, क्योंकि रब वही है जो हमेशा क़ायम रहे, कभी ज़ाइल न हो। चाँद का डूबना उसकी मख़लूक़ (पैदा की हुई चीज़) होने की दलील है, और यही वजह है कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को यह सिखाया कि सच्ची हिदायत सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से आती है, और उसी की तरफ़ रुजू करना चाहिए।
फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):
- अक़्ल का इस्तेमाल: यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपनी अक़्ल से ग़ौर-ओ-फ़िक्र करना चाहिए। जो चीज़ बदलती है, डूबती-उगती है, वह पूजा के क़ाबिल नहीं हो सकती। अल्लाह ही वह हस्ती है जो कभी नहीं बदलती।
- हक़ की तलाश: हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की तरह हमें भी सच्चाई की तलाश में लगे रहना चाहिए, और जब सच्चाई मिल जाए तो उसे बेझिझक क़बूल करना चाहिए।
- अल्लाह पर भरोसा: इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने यह दुआ और एहतियाज़ ज़ाहिर किया कि "अगर मेरा रब मुझे हिदायत न दे..." — यह सिखाता है कि हमें हर वक़्त अल्लाह से हिदायत की दरख़्वास्त करनी चाहिए और यह यक़ीन रखना चाहिए कि हिदायत सिर्फ़ उसी के हाथ में है।
- तौहीद की पुख़्तगी: यह आयत तौहीद (अल्लाह की एकता) की सबसे मज़बूत दलील है — जो चीज़ें मख़लूक़ हैं, वे रब नहीं हो सकतीं। यह हमें शिर्क से बचाती है और अल्लाह की इबादत पर मज़बूत करती है।
- इब्लाग़ का तरीक़ा: दावत-ओ-तब्लीग़ में हक़ीमाना तरीक़ा अपनाना चाहिए, जैसा इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनाया — पहले सामने वाले की बात को मानकर, फिर उसकी कमज़ोरी बयान करके सच्चाई तक पहुँचाया।
📜 आयत 75-79 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 77
सूरा अल-अनआम आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब चाँद को जगमगाता हुआ देखा तो बोल उठे…सूरा आयत 77/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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