अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جَنَّ عَلَيْهِ – (रात) उस पर छा गई, अंधेरा हो गया।
- أَفَلَ – डूब गया, अस्त हो गया, गायब हो गया।
- الْآفِلِينَ – डूबने वाले, अस्त होने वाले (जो गायब हो जाएं)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) पर रात का अंधेरा छा गया और उन्होंने अपनी क़ौम को तौहीद (एकेश्वरवाद) की ओर बुलाने का अवसर देखा, तो वे अपनी क़ौम के सामने यह प्रमाण पेश करना चाहते थे कि उनके द्वारा पूजे जाने वाले ग्रह-नक्षत्र और आकाशीय पिंड वास्तव में पूजा के योग्य नहीं हैं। उनकी क़ौम सितारों की पूजा करती थी, इसलिए इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने उन्हीं की भाषा में उन्हें जवाब देने के लिए यह तरीका अपनाया।
उन्होंने रात में एक चमकता हुआ सितारा देखा और कहा: "यह मेरा रब है?" — यह उन्होंने अपनी क़ौम को उनके ही विश्वास के अनुसार जवाब देने के लिए कहा, ताकि वे स्वयं सोचें। फिर जब वह सितारा डूब गया और गायब हो गया, तो इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने कहा: "मैं उन चीज़ों को पसंद नहीं करता जो डूब जाती हैं और गायब हो जाती हैं।" उनका इशारा यह था कि जो पूजा के योग्य है, वह सदैव मौजूद रहने वाला, कभी न मिटने वाला और सब कुछ देखने-सुनने वाला होना चाहिए। जो सितारा रात में निकलता है और दिन में डूब जाता है, वह अपनी जगह पर स्थिर नहीं रह सकता, फिर वह पूजा का हक़दार कैसे हो सकता है?
यह एक शिक्षाप्रद दृश्य था, जिसमें इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने तर्क और बुद्धि के माध्यम से अपनी क़ौम को सच्चाई की ओर बुलाया। उन्होंने यह साबित किया कि सितारे, चाँद और सूरज — ये सब मख़लूक़ (सृष्ट) हैं, इनका एक निश्चित समय और सीमा है, ये बदलते रहते हैं, इसलिए ये ख़ुदा नहीं हो सकते। असली ख़ुदा वही है जो हमेशा रहने वाला है, जो कभी नहीं बदलता, न उसे नींद आती है और न वह गायब होता है।
फ़ायदे (सबक):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चाई को समझने के लिए बुद्धि और तर्क का इस्तेमाल करना चाहिए। इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के सामने ऐसे प्रमाण पेश किए जो उनके अपने विश्वास को गलत साबित करते थे।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के अलावा किसी और चीज़ की पूजा करना — चाहे वह सितारा हो, चाँद हो, सूरज हो या कोई और मख़लूक़ — पूरी तरह बेकार और गलत है, क्योंकि हर मख़लूक़ किसी न किसी समय गायब होने वाली है।
- हमें अपने दीन (धर्म) को समझकर उस पर अमल करना चाहिए और दूसरों को भी अच्छे तरीके से, बुद्धि और नर्मी के साथ सच्चाई की ओर बुलाना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की महानता और उसकी स्थिरता पर ध्यान करें — वही एक ऐसा रब है जो कभी नहीं बदलता, कभी नहीं डूबता, और हमेशा मौजूद रहता है। यही हमारे दिलों में अल्लाह की मुहब्बत और उसके प्रति समर्पण को बढ़ाता है।
📜 आयत 74-78 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 76
सूरा अल-अनआम आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो जब उन पर रात की तारीक़ी (अंधेरा) छा गयी…सूरा आयत 76/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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