फिर जब आफताब को दमकता हुआ देखा तो कहने लगे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है ये तो सबसे बड़ा (भी) है फिर जब ये भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे ऐ मेरी क़ौम जिन जिन चीज़ों को तुम लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो उनसे मैं बेज़ार हूँ
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پھر جب سورج کو دیکھا کہ جگمگا رہا ہے تو کہنے لگے میرا پروردگار یہ ہے یہ سب سے بڑا ہے۔ مگر جب وہ بھی غروب ہوگیا تو کہنے لگے لوگو! جن چیزوں کو تم (خدا کا) شریک بناتے ہو میں ان سے بیزار ہوں
जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने सूरज को उगते हुए देखा, तो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "यह मेरा रब है, यह तो चाँद और सितारों से भी बड़ा है।" उन्होंने यह बात अपनी क़ौम के लोगों से बहस और उन्हें समझाने के लिए कही, क्योंकि वे लोग सितारों, चाँद और सूरज की पूजा करते थे। जब सूरज भी डूब गया, तो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "मैं उन चीज़ों से बिल्कुल मुक्त और बेज़ार हूँ जिन्हें तुम अल्लाह के साथ शरीक ठहराते हो।" यानी जब सूरज भी अस्त हो गया, तो यह साबित हो गया कि यह कोई ईश्वर नहीं है, क्योंकि ईश्वर वही हो सकता है जो कभी समाप्त न हो, जो हमेशा क़ायम रहे। ये सारे ग्रह-नक्षत्र और तारे बदलते रहते हैं, उगते और डूबते रहते हैं, इसलिए ये पूजा के योग्य नहीं हैं। पूजा के योग्य तो केवल वही है जिसने इन सबको पैदा किया, जो न कभी उगता है और न डूबता है, जो हमेशा से है और हमेशा रहेगा।
फ़ायदे:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की पैदा की हुई हर चीज़ बदलने वाली और फ़ानी है, इसलिए किसी भी मख़लूक़ (पैदा की हुई चीज़) की पूजा करना बिल्कुल गलत है। सिर्फ़ अल्लाह ही पूजा के लायक़ है जो हमेशा क़ायम रहने वाला है।
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की दलील बहुत ही सरल और समझने में आसान है — जो चीज़ डूब जाए, वह ईश्वर नहीं हो सकती। यह तर्क आज भी उतना ही मज़बूत है।
सच्चाई की तलाश में इंसान को अपनी अक़्ल और समझ का इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे हज़रत इब्राहीम ने किया और सच्चाई तक पहुँचे।
जो इंसान सच्चाई को पा लेता है, वह बातिल (झूठ) से साफ़ तौर पर अलग हो जाता है और बेख़ौफ़ होकर अपनी क़ौम के सामने सच बोलता है।
फिर जब आफताब को दमकता हुआ देखा तो कहने लगे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है ये तो सबसे बड़ा (भी) है फिर जब ये भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे ऐ मेरी क़ौम जिन जिन चीज़ों को तुम लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो उनसे मैं बेज़ार हूँ
तो जब उन पर रात की तारीक़ी (अंधेरा) छा गयी तो एक सितारे को देखा तो दफअतन बोल उठे (हाए क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह डूब गया तो कहने लगे ग़ुरुब (डूब) हो जाने वाली चीज़ को तो मै (ख़ुदा बनाना) पसन्द नहीं करता
फिर जब चाँद को जगमगाता हुआ देखा तो बोल उठे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे कि अगर (कहीं) मेरा (असली) परवरदिगार मेरी हिदायत न करता तो मैं ज़रुर गुमराह लोगों में हो जाता
फिर जब आफताब को दमकता हुआ देखा तो कहने लगे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है ये तो सबसे बड़ा (भी) है फिर जब ये भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे ऐ मेरी क़ौम जिन जिन चीज़ों को तुम लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो उनसे मैं बेज़ार हूँ
और उनकी क़ौम के लोग उनसे हुज्जत करने लगे तो इबराहीम ने कहा था क्या तुम मुझसे ख़ुदा के बारे में हुज्जत करते हो हालॉकि वह यक़ीनी मेरी हिदायत कर चुका और तुम मे जिन बुतों को उसका शरीक मानते हो मै उनसे डरता (वरता) नहीं (वह मेरा कुछ नहीं कर सकते) मगर हॉ मेरा ख़ुदा खुद (करना) चाहे तो अलबत्ता कर सकता है मेरा परवरदिगार तो बाएतबार इल्म के सब पर हावी है तो क्या उस पर भी तुम नसीहत नहीं मानते
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