अल-अनआम · 78/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
فَلَمَّا رَأَى الشَّمْسَ بَازِغَةً قَالَ هَٰذَا رَبِّي هَٰذَا أَكْبَرُ ۖ فَلَمَّا أَفَلَتْ قَالَ يَا قَوْمِ إِنِّي بَرِيءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ ۝٧٨
Falammmaa ra ashshamsa baazighatan qaala haazaa Rabbee haazaaa akbaru falammaaa afalat qaala yaa qawmi innee bareee`um mimmaa tushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब आफताब को दमकता हुआ देखा तो कहने लगे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है ये तो सबसे बड़ा (भी) है फिर जब ये भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे ऐ मेरी क़ौम जिन जिन चीज़ों को तुम लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो उनसे मैं बेज़ार हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَازِغَةً: उगती हुई, निकलती हुई।
  • أَفَلَتْ: डूब गई, अस्त हो गई।
  • بَرِيءٌ: मुक्त, अलग, कोई संबंध नहीं।

व्याख्या:

जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने सूरज को उगते हुए देखा, तो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "यह मेरा रब है, यह तो चाँद और सितारों से भी बड़ा है।" उन्होंने यह बात अपनी क़ौम के लोगों से बहस और उन्हें समझाने के लिए कही, क्योंकि वे लोग सितारों, चाँद और सूरज की पूजा करते थे। जब सूरज भी डूब गया, तो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "मैं उन चीज़ों से बिल्कुल मुक्त और बेज़ार हूँ जिन्हें तुम अल्लाह के साथ शरीक ठहराते हो।" यानी जब सूरज भी अस्त हो गया, तो यह साबित हो गया कि यह कोई ईश्वर नहीं है, क्योंकि ईश्वर वही हो सकता है जो कभी समाप्त न हो, जो हमेशा क़ायम रहे। ये सारे ग्रह-नक्षत्र और तारे बदलते रहते हैं, उगते और डूबते रहते हैं, इसलिए ये पूजा के योग्य नहीं हैं। पूजा के योग्य तो केवल वही है जिसने इन सबको पैदा किया, जो न कभी उगता है और न डूबता है, जो हमेशा से है और हमेशा रहेगा।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की पैदा की हुई हर चीज़ बदलने वाली और फ़ानी है, इसलिए किसी भी मख़लूक़ (पैदा की हुई चीज़) की पूजा करना बिल्कुल गलत है। सिर्फ़ अल्लाह ही पूजा के लायक़ है जो हमेशा क़ायम रहने वाला है।
  2. हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की दलील बहुत ही सरल और समझने में आसान है — जो चीज़ डूब जाए, वह ईश्वर नहीं हो सकती। यह तर्क आज भी उतना ही मज़बूत है।
  3. सच्चाई की तलाश में इंसान को अपनी अक़्ल और समझ का इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे हज़रत इब्राहीम ने किया और सच्चाई तक पहुँचे।
  4. जो इंसान सच्चाई को पा लेता है, वह बातिल (झूठ) से साफ़ तौर पर अलग हो जाता है और बेख़ौफ़ होकर अपनी क़ौम के सामने सच बोलता है।


📜 आयत 76-80 — अल-अनआम

76فَلَمَّا جَنَّ عَلَيْهِ اللَّيْلُ رَأَىٰ كَوْكَبًا ۖ قَالَ هَٰذَا رَبِّي ۖ فَلَمَّا أَفَلَ قَالَ لَا أُحِبُّ الْآفِلِينَ
तो जब उन पर रात की तारीक़ी (अंधेरा) छा गयी तो एक सितारे को देखा तो दफअतन बोल उठे (हाए क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह डूब गया तो कहने लगे ग़ुरुब (डूब) हो जाने वाली चीज़ को तो मै (ख़ुदा बनाना) पसन्द नहीं करता
77فَلَمَّا رَأَى الْقَمَرَ بَازِغًا قَالَ هَٰذَا رَبِّي ۖ فَلَمَّا أَفَلَ قَالَ لَئِن لَّمْ يَهْدِنِي رَبِّي لَأَكُونَنَّ مِنَ الْقَوْمِ الضَّالِّينَ
फिर जब चाँद को जगमगाता हुआ देखा तो बोल उठे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे कि अगर (कहीं) मेरा (असली) परवरदिगार मेरी हिदायत न करता तो मैं ज़रुर गुमराह लोगों में हो जाता
78فَلَمَّا رَأَى الشَّمْسَ بَازِغَةً قَالَ هَٰذَا رَبِّي هَٰذَا أَكْبَرُ ۖ فَلَمَّا أَفَلَتْ قَالَ يَا قَوْمِ إِنِّي بَرِيءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ
फिर जब आफताब को दमकता हुआ देखा तो कहने लगे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है ये तो सबसे बड़ा (भी) है फिर जब ये भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे ऐ मेरी क़ौम जिन जिन चीज़ों को तुम लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो उनसे मैं बेज़ार हूँ
79إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِيفًا ۖ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ
(ये हरगिज़ नहीं हो सकते) मैने तो बातिल से कतराकर उसकी तरफ से मुँह कर लिया है जिसने बहुतेरे आसमान और ज़मीन पैदा किए और मैं मुशरेकीन से नहीं हूँ
80وَحَاجَّهُ قَوْمُهُ ۚ قَالَ أَتُحَاجُّونِّي فِي اللَّهِ وَقَدْ هَدَانِ ۚ وَلَا أَخَافُ مَا تُشْرِكُونَ بِهِ إِلَّا أَن يَشَاءَ رَبِّي شَيْئًا ۗ وَسِعَ رَبِّي كُلَّ شَيْءٍ عِلْمًا ۗ أَفَلَا تَتَذَكَّرُونَ
और उनकी क़ौम के लोग उनसे हुज्जत करने लगे तो इबराहीम ने कहा था क्या तुम मुझसे ख़ुदा के बारे में हुज्जत करते हो हालॉकि वह यक़ीनी मेरी हिदायत कर चुका और तुम मे जिन बुतों को उसका शरीक मानते हो मै उनसे डरता (वरता) नहीं (वह मेरा कुछ नहीं कर सकते) मगर हॉ मेरा ख़ुदा खुद (करना) चाहे तो अलबत्ता कर सकता है मेरा परवरदिगार तो बाएतबार इल्म के सब पर हावी है तो क्या उस पर भी तुम नसीहत नहीं मानते
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अनुवाद — अल-अनआम 78

सूरा अल-अनआम आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब आफताब को दमकता हुआ देखा तो कहने लगे…

सूरा आयत 78/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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