अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَمْ يُقَاتِلُوكُمْ فِي الدِّينِ: जिन्होंने धर्म के मामले में आपसे युद्ध नहीं किया।
- وَلَمْ يُخْرِجُوكُم مِّن دِيَارِكُمْ: और जिन्होंने आपको आपके घरों से नहीं निकाला।
- أَن تَبَرُّوهُمْ: कि आप उनके साथ भलाई करें (अच्छा व्यवहार करें)।
- وَتُقْسِطُوا إِلَيْهِمْ: और उनके साथ न्याय और इंसाफ करें।
- الْمُقْسِطِينَ: न्याय करने वाले, इंसाफ करने वाले लोग।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों को एक बहुत ही स्पष्ट और न्यायपूर्ण मार्गदर्शन दे रहा है। वह फ़रमाता है कि जो लोग (काफ़िरों में से) तुमसे धर्म के मामले में लड़े नहीं, और न ही उन्होंने तुम्हें तुम्हारे घरों और वतन से निकाला, तो अल्लाह तुम्हें उनके साथ भलाई करने और न्यायपूर्ण व्यवहार करने से नहीं रोकता। यानी उनके साथ अच्छा सलूक करना, उनके हक़ अदा करना, उनके साथ इंसाफ़ करना — यह सब जायज़ और पसंदीदा है।
यह आयत उस समय उतरी जब कुछ मुसलमानों के रिश्तेदार (जो काफ़िर थे) मक्का में रह गए थे और उन्होंने मुसलमानों से लड़ाई नहीं की थी, न ही उन्हें निकाला था। कुछ सहाबा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) अपने इन रिश्तेदारों से मेल-मिलाप और भलाई करने में संकोच करते थे, यह सोचकर कि शायद यह जायज़ न हो। तो अल्लाह ने यह आयत उतारकर साफ़ कर दिया कि जो काफ़िर तुमसे दुश्मनी नहीं रखते और न ही तुम्हें सताते हैं, उनके साथ नेकी और इंसाफ़ करना कोई गुनाह नहीं, बल्कि यह अल्लाह को बहुत पसंद है।
अल्लाह फ़रमाता है: "बेशक अल्लाह न्याय करने वालों से मुहब्बत करता है।" यानी जो लोग अपने क़ौल और फ़ेल (बात और काम) में इंसाफ़ करते हैं, अल्लाह उन्हें प्यार करता है। यह एक बहुत बड़ी फज़ीलत है — कि इंसाफ़ करने वालों को अल्लाह की मुहब्बत हासिल होती है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम दुश्मनी और बुराई का धर्म नहीं, बल्कि न्याय, भलाई और अच्छे अख़लाक़ का धर्म है। जो लोग हमारे साथ अच्छा करें, हमें सताएं नहीं, हमारे धर्म में दखल न दें — उनके साथ हमें भी अच्छा व्यवहार करना चाहिए। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि वह हर उस इंसान के साथ नेकी और इंसाफ़ का हुक्म देता है जो हमारे साथ नेकी और इंसाफ़ करता है।
इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने गैर-मुस्लिम पड़ोसियों, रिश्तेदारों और साथियों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, जब तक कि वे हमारे खिलाफ ज़ुल्म और दुश्मनी पर आमादा न हों। यह न सिर्फ़ हमारी ईमानदारी की निशानी है, बल्कि इससे दूसरों के दिलों में इस्लाम की अच्छी तस्वीर भी बनती है। अल्लाह इंसाफ़ करने वालों से मुहब्बत करता है — और यह मुहब्बत ही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 6-10 — अल-मुमतहिना
अनुवाद — अल-मुमतहिना 8
सूरा अल-मुमतहिना आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग तुमसे तुम्हारे दीन के बारे में नहीं लड़े…सूरा आयत 8/13 — अल-मुमतहिना الممتحنة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुमतहिना सुनें, अल-मुमतहिना अनुवाद, अल-मुमतहिना mp3, अल-मुमतहिना pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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