Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عَسَى: आशा की जाती है, संभावना है।
- مَوَدَّةً: प्रेम, मोहब्बत, आपसी स्नेह।
- عَادَيْتُم: जिनसे तुमने दुश्मनी की, जिन्हें तुमने अपना शत्रु बनाया।
- قَدِيرٌ: हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला।
- غَفُورٌ رَّحِيمٌ: अत्यंत क्षमाशील, बड़ा दयालु।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालो! अल्लाह तआला ने इस आयत में तुम्हें एक बहुत बड़ी खुशखबरी सुनाई है। वह फ़रमाता है कि उम्मीद है अल्लाह तुम्हारे और उन लोगों के बीच, जिनसे तुमने दुश्मनी रखी है—यानी तुम्हारे रिश्तेदारों और क़बीले वालों में से जो मुशरिक हैं—मोहब्बत और दोस्ती पैदा कर देगा। जिस तरह आज उनके दिलों में तुम्हारे लिए नफ़रत और दुश्मनी है, अल्लाह चाहे तो उसे प्रेम और भाईचारे में बदल दे। यह तब होगा जब अल्लाह उनके सीनों को इस्लाम के लिए खोल देगा और वे हिदायत पाकर तुम्हारे दीन के भाई बन जाएँगे।
यह कोई मुश्किल काम नहीं है, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। वह दिलों के मालिक है, जिसे चाहे हिदायत देता है और जिसे चाहे गुमराही में छोड़ देता है। उसकी कुदरत के आगे कुछ भी नामुमकिन नहीं। और यह भी याद रखो कि अल्लाह बड़ा क्षमाशील और दयालु है। अगर तुमसे पहले किसी वजह से उन लोगों से मोहब्बत या मेल-जोल का मामला हुआ हो, तो अल्लाह उसे माफ़ कर सकता है, बशर्ते तुम सच्चे दिल से तौबा करो।
यह आयत उस समय के हालात से जुड़ी है जब मुसलमानों को मक्का के काफ़िरों से अलग होने और उनसे बचने का हुक्म दिया गया था। लेकिन अल्लाह ने यह भी बता दिया कि यह दुश्मनी हमेशा के लिए नहीं है—हो सकता है अल्लाह उनके दिलों को बदल दे और वे इस्लाम क़बूल कर लें। और ऐसा ही हुआ भी—फ़त्ह-ए-मक्का (मक्का की विजय) के दिन बहुत से लोगों ने इस्लाम क़बूल किया और आपस में मुहब्बत और भाईचारा क़ायम हो गया।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें कभी भी अल्लाह की रहमत और कुदरत से मायूस नहीं होना चाहिए। चाहे हालात कितने भी खराब क्यों न हों, अल्लाह किसी भी वक़्त दिलों को बदल सकता है। हमें दुश्मनों के लिए भी दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह उन्हें हिदायत दे, क्योंकि हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। और अल्लाह की माफ़ी और रहमत की कोई हद नहीं—वह हर उस बंदे को माफ़ कर देता है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ लौटता है। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि वह नफ़रत के बाद भी मुहब्बत की उम्मीद दिलाता है और लोगों को एक दूसरे के करीब लाने की तरग़ीब देता है।
📜 आयत 5-9 — सूरा अल-मुमतहिना
अनुवाद — अल-मुमतहिना 7
सूरा अल-मुमतहिना आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : करीब है कि ख़ुदा तुम्हारे और उनमें से तुम्हारे दुश्मनों…सूरा आयत 7/13 — सूरा अल-मुमतहिना الممتحنة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुमतहिना सुनें, सूरा अल-मुमतहिना अनुवाद, सूरा अल-मुमतहिना mp3, सूरा अल-मुमतहिना pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुमतहिना
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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