अल-आराफ · 194/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
إِنَّ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ عِبَادٌ أَمْثَالُكُمْ ۖ فَادْعُوهُمْ فَلْيَسْتَجِيبُوا لَكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝١٩٤
Innal lazeena tad`oona min doonil laahi `ibaadun amsaalukum fad`oohum fal yastajeeboo lakum in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक वह लोग जिनकी तुम ख़ुदा को छोड़कर हाजत करते हो वह (भी) तुम्हारी तरह (ख़ुदा के) बन्दे हैं भला तुम उन्हें पुकार के देखो तो अगर तुम सच्चे हो तो वह तुम्हारी कुछ सुन लें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَدْعُونَ: पुकारते हो, या पूजते हो।
  • مِن دُونِ اللَّهِ: अल्लाह को छोड़कर।
  • عِبَادٌ: बंदे, दास (अल्लाह के मालिक होने के अधीन)।
  • أَمْثَالُكُمْ: तुम्हारे जैसे (मख़लूक़, अल्लाह के मिल्कियत में)।
  • فَلْيَسْتَجِيبُوا: तो उन्हें जवाब देना चाहिए (तुम्हारी पुकार पर)।
  • صَادِقِينَ: सच्चे हो (अपने दावे में)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मुशरिको! अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते हो और उनकी इबादत करते हो—चाहे वो मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, या कोई और मख़लूक़—वे सब अल्लाह के बंदे हैं, ठीक उसी तरह जैसे तुम अल्लाह के बंदे हो। वे तुम्हारी तरह मख़लूक़ हैं, अल्लाह के मिल्क में हैं, उनके पास कोई इख़्तियार नहीं। हालाँकि तुम उनसे बेहतर हो, क्योंकि तुम ज़िंदा हो, बोलते हो, चलते हो, सुनते और देखते हो, जबकि तुम्हारे ये माबूद (पूज्य) न तो ज़िंदा हैं, न सुनते हैं, न देखते हैं, और न ही किसी चीज़ की क़ुदरत रखते हैं।

अल्लाह तआला चुनौती देते हुए फ़रमाता है: अगर तुम सच्चे हो अपने इस दावे में कि ये माबूद तुम्हारे लिए नुक़्सान या नफ़ा पहुँचा सकते हैं, या तुम्हारी पुकार का जवाब दे सकते हैं, तो उन्हें पुकारो और देखो क्या वे तुम्हारी पुकार का जवाब देते हैं? अगर वे तुम्हारी मदद कर सकते हैं या तुम्हारी ज़रूरत पूरी कर सकते हैं, तो करके दिखाओ। लेकिन हक़ीक़त यह है कि वे कभी जवाब नहीं दे सकते, क्योंकि वे बेजान हैं, बेख़बर हैं, और अल्लाह की मिल्कियत में महज़ मख़लूक़ हैं। जब वे जवाब नहीं दे पाएँगे, तो तुम्हारा झूठ खुल जाएगा और ये साबित हो जाएगा कि तुम अल्लाह पर सबसे बड़ा बोहतान (झूठ) बाँध रहे हो।

ये आयत हमें सिखाती है कि इबादत सिर्फ़ अल्लाह की ही होनी चाहिए। अल्लाह के सिवा कोई भी पुकारने के क़ाबिल नहीं, क्योंकि हर चीज़ उसी की मख़लूक़ है। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारते हैं, वे सिर्फ़ अपने नुक़्सान पर हैं। अल्लाह तआला अपने बंदों से मुहब्बत करता है और चाहता है कि वे सिर्फ़ उसी की तरफ़ रुजू करें, क्योंकि वही सुनने वाला, जवाब देने वाला और मदद करने वाला है। जब कोई बंदा सच्चे दिल से अल्लाह को पुकारता है, तो अल्लाह उसकी सुनता है और उसे जवाब देता है। यही सच्ची कामयाबी है—अल्लाह से जुड़ना, उसी पर भरोसा करना और उसी की इबादत करना।



📜 आयत 192-196 — अल-आराफ

192وَلَا يَسْتَطِيعُونَ لَهُمْ نَصْرًا وَلَا أَنفُسَهُمْ يَنصُرُونَ
और न उनकी मदद की कुदरत रखते हैं और न आप अपनी मदद कर सकते हैं
193وَإِن تَدْعُوهُمْ إِلَى الْهُدَىٰ لَا يَتَّبِعُوكُمْ ۚ سَوَاءٌ عَلَيْكُمْ أَدَعَوْتُمُوهُمْ أَمْ أَنتُمْ صَامِتُونَ
और अगर तुम उन्हें हिदायत की तरफ बुलाओंगे भी तो ये तुम्हारी पैरवी नहीं करने के तुम्हारे वास्ते बराबर है ख्वाह (चाहे) तुम उनको बुलाओ या तुम चुपचाप बैठे रहो
194إِنَّ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ عِبَادٌ أَمْثَالُكُمْ ۖ فَادْعُوهُمْ فَلْيَسْتَجِيبُوا لَكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
बेशक वह लोग जिनकी तुम ख़ुदा को छोड़कर हाजत करते हो वह (भी) तुम्हारी तरह (ख़ुदा के) बन्दे हैं भला तुम उन्हें पुकार के देखो तो अगर तुम सच्चे हो तो वह तुम्हारी कुछ सुन लें
195أَلَهُمْ أَرْجُلٌ يَمْشُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ أَيْدٍ يَبْطِشُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ أَعْيُنٌ يُبْصِرُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ آذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۗ قُلِ ادْعُوا شُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ كِيدُونِ فَلَا تُنظِرُونِ
क्या उनके ऐसे पॉव भी हैं जिनसे चल सकें या उनके ऐसे हाथ भी हैं जिनसे (किसी चीज़ को) पकड़ सके या उनकी ऐसी ऑखे भी है जिनसे देख सकें या उनके ऐसे कान हैं जिनसे सुन सकें (ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि तुम अपने बनाए हुए शरीको को बुलाओ फिर सब मिलकर मुझ पर दॉव चले फिर (मुझे) मोहलत न दो
196إِنَّ وَلِيِّيَ اللَّهُ الَّذِي نَزَّلَ الْكِتَابَ ۖ وَهُوَ يَتَوَلَّى الصَّالِحِينَ
(फिर देखो मेरा क्या बना सकते हो) बेशक मेरा मालिक व मुमताज़ तो बस ख़ुदा है जिस ने किताब क़ुरान को नाज़िल फरमाया और वही (अपने) नेक बन्दों का हाली (मददगार) है
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
194आयत

अनुवाद — अल-आराफ 194

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Tuesday, August 18, 2026

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