अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَدْعُوهُمْ: तुम उन्हें पुकारो / बुलाओ
- الْهُدَى: सीधा मार्ग, इस्लाम
- لَا يَتَّبِعُوكُمْ: वे तुम्हारा अनुसरण नहीं करेंगे
- سَوَاءٌ: बराबर, समान
- صَامِتُونَ: चुप रहने वाले, ख़ामोश
व्याख्या:
हे मुशरिको! ये मूर्तियाँ जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो, यदि तुम उन्हें सीधे मार्ग की ओर बुलाओ, तो वे न तो तुम्हारी पुकार सुनती हैं और न ही तुम्हारा अनुसरण कर सकती हैं। तुम्हारे लिए बराबर है—चाहे तुम उन्हें पुकारो या चुप रहो। क्योंकि ये तो केवल निर्जीव वस्तुएँ हैं; इनमें न सुनने की शक्ति है, न बोलने की, न समझने की। वे न किसी को हिदायत दे सकती हैं और न स्वयं हिदायत पा सकती हैं।
कुछ मुफ़स्सिरीन के अनुसार यहाँ "उन्हें" से मुराद मुशरिकीन भी हो सकते हैं, यानी यदि तुम मुशरिकों को इस्लाम की ओर बुलाओ तो वे तुम्हारा अनुसरण नहीं करेंगे, और तुम्हारे लिए बराबर है कि तुम उन्हें बुलाओ या चुप रहो—क्योंकि उनके दिलों पर मुहर लग चुकी है और वे हक़ को क़बूल करने के लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन पहला अर्थ (मूर्तियों के संदर्भ में) अधिक प्रचलित और स्पष्ट है, क्योंकि आगे की आयतों में भी यही विषय जारी है।
फ़ायदे:
- यह आयत हमें सिखाती है कि केवल अल्लाह ही सुनने, देखने और हिदायत देने वाला है। उसके सिवा जिन्हें हम पुकारते हैं, वे हमारी मदद नहीं कर सकते। इसलिए अपनी सारी उम्मीदें और प्रार्थनाएँ केवल अल्लाह से ही जोड़नी चाहिए।
- यह तौहीद की सच्चाई को उजागर करती है—जो चीज़ें निर्जीव हैं, वे न किसी को फ़ायदा पहुँचा सकती हैं और न नुक़सान। उनकी पूजा करना सरासर बेकार है।
- इस आयत से दावत-ए-दीन की हक़ीक़त भी मालूम होती है कि हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है; नबी और दावत देने वालों का काम केवल पहुँचाना है। अगर कोई हक़ को क़बूल न करे, तो दावत देने वाले पर कोई मलामत नहीं।
- मुसलमानों के लिए यह सबक़ है कि वे अपनी दावत में सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा रखें और नतीजे की चिंता न करें; उनका काम पहुँचाना है, फ़तह अल्लाह के हाथ में है।
- यह आयत हमें मूर्तिपूजा और शिर्क की बेबुनियादी से बचाती है और हमारे दिलों में अल्लाह की महानता और उसकी क़ुदरत का एहसास पैदा करती है कि वही अकेला सुनने, देखने और जवाब देने वाला है।
📜 आयत 191-195 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 193
सूरा अल-आराफ आयत 193 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर तुम उन्हें हिदायत की तरफ बुलाओंगे भी तो…सूरा आयत 193/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 191–195. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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