अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَبْطِشُونَ: पकड़ते हैं, ज़ोर से पकड़ते हैं।
- كِيدُونِ: मेरे साथ चालाकी करो, मुझे नुकसान पहुँचाने की कोशिश करो।
- فَلَا تُنظِرُونِ: मुझे मोहलत मत दो, मुझे देर मत कराओ।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बुतपरस्तों) को उनके बुतों की बेबसी और नाकारगी दिखा रहे हैं। वह फ़रमाते हैं: क्या इन बुतों के पैर हैं जिनसे वे चल सकें और तुम्हारे कामों में तुम्हारी मदद के लिए दौड़ सकें? क्या इनके हाथ हैं जिनसे वे पकड़ सकें, तुम्हारी रक्षा कर सकें या तुम्हारे दुश्मनों से तुम्हारा बचाव कर सकें? क्या इनकी आँखें हैं जिनसे वे देख सकें और तुम्हें उन चीज़ों की खबर दे सकें जो तुमसे छिपी हैं? क्या इनके कान हैं जिनसे वे सुन सकें और तुम्हें वह बता सकें जो तुम नहीं सुन पाते?
जब इन बुतों में इनमें से कोई भी शक्ति या अंग नहीं है, तो फिर तुम इन्हें किस आधार पर पूजते हो? इनसे किसी फ़ायदे की उम्मीद या किसी नुकसान से बचाव की आशा कैसे रखते हो? यह तो सिर्फ़ तुम्हारी नादानी और बेवकूफ़ी है।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि इन मुशरिकीन से कहो: अगर तुम्हें यक़ीन है कि तुम्हारे ये शरीक (बुत) कुछ कर सकते हैं, तो उन्हें बुलाओ, उनसे मदद लो, और फिर सब मिलकर मेरे खिलाफ़ चालाकी करो, मुझे नुकसान पहुँचाने की कोशिश करो, मुझे कोई मोहलत मत दो। मैं तुम्हारी इन साज़िशों की परवाह नहीं करता, क्योंकि मेरा भरोसा अकेले अल्लाह पर है, जो सब कुछ सुनता और देखता है, और वही मेरी हिफ़ाज़त करने वाला है।
फ़ायदे (सबक):
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करना सिर्फ़ बेवकूफ़ी है, क्योंकि जो चीज़ खुद बेबस और बेजान है, वह किसी का भला या बुरा नहीं कर सकती।
- हमें अपने दिल को सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ना चाहिए और उसी पर भरोसा रखना चाहिए। जब हमारे पास अल्लाह जैसा क़ादिर (सक्षम) मालिक हो, तो किसी और की मदद की ज़रूरत नहीं।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्चे ईमान वाले को किसी की धमकी या साज़िश से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है।
- हमें अपनी अक़्ल का इस्तेमाल करना चाहिए और उन चीज़ों की पूजा नहीं करनी चाहिए जो न सुन सकें, न देख सकें, न चल सकें और न ही कोई फ़ायदा पहुँचा सकें। अल्लाह ही वह है जो सब कुछ सुनता, देखता और कर सकता है।
📜 आयत 193-197 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 195
सूरा अल-आराफ आयत 195 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उनके ऐसे पॉव भी हैं जिनसे चल सकें या…सूरा आयत 195/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 193–197. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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