अल-आराफ · 195/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
أَلَهُمْ أَرْجُلٌ يَمْشُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ أَيْدٍ يَبْطِشُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ أَعْيُنٌ يُبْصِرُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ آذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۗ قُلِ ادْعُوا شُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ كِيدُونِ فَلَا تُنظِرُونِ ۝١٩٥
A lahum arjuluny yamshoona bihaa am lahum aidiny yabtishoona bihaaa am lahum a`yunuy yubsiroona bihaaa am lahum aazaanuny yasma`oona bihaa; qulid`oo shurakaaa`akum summa keedooni falaa tunziroon
📖 हिंदी अर्थ
क्या उनके ऐसे पॉव भी हैं जिनसे चल सकें या उनके ऐसे हाथ भी हैं जिनसे (किसी चीज़ को) पकड़ सके या उनकी ऐसी ऑखे भी है जिनसे देख सकें या उनके ऐसे कान हैं जिनसे सुन सकें (ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि तुम अपने बनाए हुए शरीको को बुलाओ फिर सब मिलकर मुझ पर दॉव चले फिर (मुझे) मोहलत न दो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَبْطِشُونَ: पकड़ते हैं, ज़ोर से पकड़ते हैं।
  • كِيدُونِ: मेरे साथ चालाकी करो, मुझे नुकसान पहुँचाने की कोशिश करो।
  • فَلَا تُنظِرُونِ: मुझे मोहलत मत दो, मुझे देर मत कराओ।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बुतपरस्तों) को उनके बुतों की बेबसी और नाकारगी दिखा रहे हैं। वह फ़रमाते हैं: क्या इन बुतों के पैर हैं जिनसे वे चल सकें और तुम्हारे कामों में तुम्हारी मदद के लिए दौड़ सकें? क्या इनके हाथ हैं जिनसे वे पकड़ सकें, तुम्हारी रक्षा कर सकें या तुम्हारे दुश्मनों से तुम्हारा बचाव कर सकें? क्या इनकी आँखें हैं जिनसे वे देख सकें और तुम्हें उन चीज़ों की खबर दे सकें जो तुमसे छिपी हैं? क्या इनके कान हैं जिनसे वे सुन सकें और तुम्हें वह बता सकें जो तुम नहीं सुन पाते?

जब इन बुतों में इनमें से कोई भी शक्ति या अंग नहीं है, तो फिर तुम इन्हें किस आधार पर पूजते हो? इनसे किसी फ़ायदे की उम्मीद या किसी नुकसान से बचाव की आशा कैसे रखते हो? यह तो सिर्फ़ तुम्हारी नादानी और बेवकूफ़ी है।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि इन मुशरिकीन से कहो: अगर तुम्हें यक़ीन है कि तुम्हारे ये शरीक (बुत) कुछ कर सकते हैं, तो उन्हें बुलाओ, उनसे मदद लो, और फिर सब मिलकर मेरे खिलाफ़ चालाकी करो, मुझे नुकसान पहुँचाने की कोशिश करो, मुझे कोई मोहलत मत दो। मैं तुम्हारी इन साज़िशों की परवाह नहीं करता, क्योंकि मेरा भरोसा अकेले अल्लाह पर है, जो सब कुछ सुनता और देखता है, और वही मेरी हिफ़ाज़त करने वाला है।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करना सिर्फ़ बेवकूफ़ी है, क्योंकि जो चीज़ खुद बेबस और बेजान है, वह किसी का भला या बुरा नहीं कर सकती।
  2. हमें अपने दिल को सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ना चाहिए और उसी पर भरोसा रखना चाहिए। जब हमारे पास अल्लाह जैसा क़ादिर (सक्षम) मालिक हो, तो किसी और की मदद की ज़रूरत नहीं।
  3. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्चे ईमान वाले को किसी की धमकी या साज़िश से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है।
  4. हमें अपनी अक़्ल का इस्तेमाल करना चाहिए और उन चीज़ों की पूजा नहीं करनी चाहिए जो न सुन सकें, न देख सकें, न चल सकें और न ही कोई फ़ायदा पहुँचा सकें। अल्लाह ही वह है जो सब कुछ सुनता, देखता और कर सकता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 193-197 — अल-आराफ

193وَإِن تَدْعُوهُمْ إِلَى الْهُدَىٰ لَا يَتَّبِعُوكُمْ ۚ سَوَاءٌ عَلَيْكُمْ أَدَعَوْتُمُوهُمْ أَمْ أَنتُمْ صَامِتُونَ
और अगर तुम उन्हें हिदायत की तरफ बुलाओंगे भी तो ये तुम्हारी पैरवी नहीं करने के तुम्हारे वास्ते बराबर है ख्वाह (चाहे) तुम उनको बुलाओ या तुम चुपचाप बैठे रहो
194إِنَّ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ عِبَادٌ أَمْثَالُكُمْ ۖ فَادْعُوهُمْ فَلْيَسْتَجِيبُوا لَكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
बेशक वह लोग जिनकी तुम ख़ुदा को छोड़कर हाजत करते हो वह (भी) तुम्हारी तरह (ख़ुदा के) बन्दे हैं भला तुम उन्हें पुकार के देखो तो अगर तुम सच्चे हो तो वह तुम्हारी कुछ सुन लें
195أَلَهُمْ أَرْجُلٌ يَمْشُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ أَيْدٍ يَبْطِشُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ أَعْيُنٌ يُبْصِرُونَ بِهَا ۖ أَمْ لَهُمْ آذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۗ قُلِ ادْعُوا شُرَكَاءَكُمْ ثُمَّ كِيدُونِ فَلَا تُنظِرُونِ
क्या उनके ऐसे पॉव भी हैं जिनसे चल सकें या उनके ऐसे हाथ भी हैं जिनसे (किसी चीज़ को) पकड़ सके या उनकी ऐसी ऑखे भी है जिनसे देख सकें या उनके ऐसे कान हैं जिनसे सुन सकें (ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि तुम अपने बनाए हुए शरीको को बुलाओ फिर सब मिलकर मुझ पर दॉव चले फिर (मुझे) मोहलत न दो
196إِنَّ وَلِيِّيَ اللَّهُ الَّذِي نَزَّلَ الْكِتَابَ ۖ وَهُوَ يَتَوَلَّى الصَّالِحِينَ
(फिर देखो मेरा क्या बना सकते हो) बेशक मेरा मालिक व मुमताज़ तो बस ख़ुदा है जिस ने किताब क़ुरान को नाज़िल फरमाया और वही (अपने) नेक बन्दों का हाली (मददगार) है
197وَالَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِهِ لَا يَسْتَطِيعُونَ نَصْرَكُمْ وَلَا أَنفُسَهُمْ يَنصُرُونَ
और वह लोग (बुत) जिन्हें तुम ख़ुदा के सिवा (अपनी मदद को) पुकारते हो न तो वह तुम्हारी मदद की कुदरत रखते हैं और न ही अपनी मदद कर सकते हैं
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
195आयत

अनुवाद — अल-आराफ 195

सूरा अल-आराफ आयत 195 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उनके ऐसे पॉव भी हैं जिनसे चल सकें या…

सूरा आयत 195/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 193–197. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए