अल-आराफ · 40/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
إِنَّ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ أَبْوَابُ السَّمَاءِ وَلَا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ الْجَمَلُ فِي سَمِّ الْخِيَاطِ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُجْرِمِينَ ۝٤٠
Innal lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa wastakbaroo `anhaa laa tufattahu lahum ahwaabus samaaa`i wa laa yadkhuloonal jannata hattaa yalijal jamalu fee sammil khiyaat; wa kazaalika najzil mujrimeen
📖 हिंदी अर्थ
और उनसे सरताबी की न उनके लिए आसमान के दरवाज़े खोले जाएंगें और वह बेहश्त ही में दाखिल होने पाएगें यहाँ तक कि ऊँट सूई के नाके में होकर निकल जाए (यानि जिस तरह ये मुहाल है) उसी तरह उनका बेहश्त में दाखिल होना मुहाल है और हम मुजरिमों को ऐसी ही सज़ा दिया करते हैं उनके लिए जहन्नुम (की आग) का बिछौना होगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • اسْتَكْبَرُوا عَنْهَا: उन आयतों को मानने से अहंकार किया, उनके आगे झुकने से इनकार किया।
  • لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ أَبْوَابُ السَّمَاءِ: उनके लिए आसमान के दरवाज़े नहीं खोले जाते, न उनके अच्छे कर्म ऊपर चढ़ते हैं और न ही मृत्यु के समय उनकी आत्माएँ आसमान की ओर उठाई जाती हैं।
  • يَلِجَ: दाखिल होना, भीतर घुसना।
  • سَمِّ الْخِيَاطِ: सुई का नाका (छेद), जो बहुत ही संकरा होता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने हमारी आयतों (निशानियों और प्रमाणों) को झुठलाया और उन्हें मानने से अहंकार किया, उनके लिए आसमान के दरवाज़े नहीं खोले जाते। इसका अर्थ यह है कि उनके अच्छे कर्म, दुआएँ और उनकी आत्माएँ आसमान की ओर नहीं उठाई जातीं, क्योंकि वे कुफ्र और घमंड की वजह से हर भलाई से महरूम हैं। जब वे मरते हैं तो उनकी रूह को आसमान की तरफ नहीं ले जाया जाता, बल्कि उनके लिए दरवाज़े बंद रहते हैं।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वे जन्नत में कभी दाखिल नहीं होंगे, यहाँ तक कि ऊँट सुई के नाके (छेद) में दाखिल हो जाए — और यह नामुमकिन है। यानी जिस तरह ऊँट का सुई के छेद में घुसना असंभव है, उसी तरह इन काफिरों का जन्नत में जाना असंभव है। यह उनके कुफ्र और अहंकार की सज़ा है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम ऐसे ही बदला देते हैं उन अपराधियों को जो हद से गुज़र जाते हैं और शिर्क व इंकार पर जमे रहते हैं।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की आयतों को झुठलाना और उनसे अहंकार करना सबसे बड़ा गुनाह है, जो इंसान को जन्नत से महरूम कर देता है।
  2. अहंकार (घमंड) इंसान को हक़ क़बूल करने से रोकता है, और यही वजह है कि काफिरों के अच्छे कर्म भी अल्लाह के यहाँ क़बूल नहीं होते।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने अंदर से घमंड और अकड़ को निकालना चाहिए और अल्लाह की हर आयत और हुक्म के आगे झुकना चाहिए।
  4. अल्लाह की सज़ा और अज़ाब से डरना चाहिए, क्योंकि वह अपराधियों को उनके किए का पूरा बदला देने वाला है।
  5. यह आयत मुसलमानों को यह पाठ देती है कि वे अपने ईमान को अहंकार और इंकार से बचाएँ, और नम्रता व आज्ञाकारिता को अपनाएँ ताकि उनके कर्म अल्लाह तक पहुँचें और वे जन्नत के हक़दार बनें।


📜 आयत 38-42 — सूरा अल-आराफ

38قَالَ ادْخُلُوا فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِكُم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ فِي النَّارِ ۖ كُلَّمَا دَخَلَتْ أُمَّةٌ لَّعَنَتْ أُخْتَهَا ۖ حَتَّىٰ إِذَا ادَّارَكُوا فِيهَا جَمِيعًا قَالَتْ أُخْرَاهُمْ لِأُولَاهُمْ رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ أَضَلُّونَا فَآتِهِمْ عَذَابًا ضِعْفًا مِّنَ النَّارِ ۖ قَالَ لِكُلٍّ ضِعْفٌ وَلَٰكِن لَّا تَعْلَمُونَ
(तब ख़ुदा उनसे) फरमाएगा कि जो लोग जिन व इन्स के तुम से पहले बसे हैं उन्हीं में मिलजुल कर तुम भी जहन्नुम वासिल हो जाओ (और ) अहले जहन्नुम का ये हाल होगा कि जब उसमें एक गिरोह दाख़िल होगा तो अपने साथी दूसरे गिरोह पर लानत करेगा यहाँ तक कि जब सब के सब पहुंच जाएगें तो उनमें की पिछली जमात अपने से पहली जमाअत के वास्ते बदद्आ करेगी कि परवरदिगार उन्हीं लोगों ने हमें गुमराह किया था तो उन पर जहन्नुम का दोगुना अज़ाब फरमा (इस पर) ख़ुदा फरमाएगा कि हर एक के वास्ते दो गुना अज़ाब है लेकिन (तुम पर) तुफ़ है तुम जानते नहीं
39وَقَالَتْ أُولَاهُمْ لِأُخْرَاهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِن فَضْلٍ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
और उनमें से पहली जमाअत पिछली जमाअत की तरफ मुख़ातिब होकर कहेगी कि अब तो तुमको हमपर कोई फज़ीलत न रही पस (हमारी तरह) तुम भी अपने करतूत की बदौलत अज़ाब (के मज़े) चखो बेशक जिन लोगों ने हमारे आयात को झुठलाया
40إِنَّ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ أَبْوَابُ السَّمَاءِ وَلَا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ الْجَمَلُ فِي سَمِّ الْخِيَاطِ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُجْرِمِينَ
और उनसे सरताबी की न उनके लिए आसमान के दरवाज़े खोले जाएंगें और वह बेहश्त ही में दाखिल होने पाएगें यहाँ तक कि ऊँट सूई के नाके में होकर निकल जाए (यानि जिस तरह ये मुहाल है) उसी तरह उनका बेहश्त में दाखिल होना मुहाल है और हम मुजरिमों को ऐसी ही सज़ा दिया करते हैं उनके लिए जहन्नुम (की आग) का बिछौना होगा
41لَهُم مِّن جَهَنَّمَ مِهَادٌ وَمِن فَوْقِهِمْ غَوَاشٍ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ
और उनके ऊपर से (आग ही का) ओढ़ना भी और हम ज़ालिमों को ऐसी ही सज़ा देते हैं और जिन लोगों ने ईमान कुबुल किया
42وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَا نُكَلِّفُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और अच्छे अच्छे काम किये और हम तो किसी शख्स को उसकी ताकत से ज्यादा तकलीफ देते ही नहीं यहीं लोग जन्नती हैं कि वह हमेशा जन्नत ही में रहा (सहा) करेगें
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अल-आराफ 40

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Wednesday, September 30, 2026

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