अल-आराफ · 41/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
لَهُم مِّن جَهَنَّمَ مِهَادٌ وَمِن فَوْقِهِمْ غَوَاشٍ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ ۝٤١
Lahum min jahannama mihaadunw wa min fawqihim ghawaash; wa kazaalika najziz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और उनके ऊपर से (आग ही का) ओढ़ना भी और हम ज़ालिमों को ऐसी ही सज़ा देते हैं और जिन लोगों ने ईमान कुबुल किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِهَادٌ (मिहाद): बिछौना, फ़र्श, नीचे बिछाई जाने वाली चीज़।
  • غَوَاشٍ (ग़वाशी): ढकने वाली चीज़ें, ऊपर से छा जाने वाली आग की परतें। यह "غَاشِيَة" का बहुवचन है।

व्याख्या:

इन काफ़िरों और अत्याचारियों के लिए जहन्नम की आग का बिछौना होगा जो उनके नीचे होगा, और उनके ऊपर भी आग की ही परतें और आवरण होंगे जो उन्हें चारों ओर से ढक लेंगे। यानी आग उन्हें हर तरफ से घेर लेगी—नीचे से भी और ऊपर से भी। यह उन लोगों का हाल होगा जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया, उसके हुक्मों से सिर मोड़ा और अपनी सरकशी व अहंकार के कारण हद से आगे बढ़ गए। अल्लाह तआला ऐसे ही अत्याचारियों को सज़ा देता है, क्योंकि उन्होंने खुद पर ज़ुल्म किया और अल्लाह की रहमत से खुद को महरूम कर लिया।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की सज़ा बहुत सख्त है, लेकिन वह उसी को देता है जो ज़ुल्म और कुफ़्र पर अड़ा रहे।
  2. अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल सटीक है—जैसा कर्म, वैसा बदला। जिसने हक़ को ठुकराया, उसे अपने किए का नतीजा भुगतना ही पड़ेगा।
  3. यह आयत हमें अल्लाह के डर की तरफ बुलाती है और बताती है कि इस्लाम ही वह रास्ता है जो हमें ऐसे अंजाम से बचाता है। जो लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके रसूल की पैरवी करते हैं, उनके लिए जन्नत की नेमतें हैं, जबकि यह सज़ा सिर्फ उनके लिए है जो सच्चाई के आगे झुकने से इनकार करें।
  4. इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम अपनी ज़िंदगी में कभी अत्याचार और सरकशी न अपनाएं, बल्कि अल्लाह के सामने झुककर उसकी रहमत के हक़दार बनें।


📜 आयत 39-43 — सूरा अल-आराफ

39وَقَالَتْ أُولَاهُمْ لِأُخْرَاهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِن فَضْلٍ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ
और उनमें से पहली जमाअत पिछली जमाअत की तरफ मुख़ातिब होकर कहेगी कि अब तो तुमको हमपर कोई फज़ीलत न रही पस (हमारी तरह) तुम भी अपने करतूत की बदौलत अज़ाब (के मज़े) चखो बेशक जिन लोगों ने हमारे आयात को झुठलाया
40إِنَّ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ أَبْوَابُ السَّمَاءِ وَلَا يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ الْجَمَلُ فِي سَمِّ الْخِيَاطِ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُجْرِمِينَ
और उनसे सरताबी की न उनके लिए आसमान के दरवाज़े खोले जाएंगें और वह बेहश्त ही में दाखिल होने पाएगें यहाँ तक कि ऊँट सूई के नाके में होकर निकल जाए (यानि जिस तरह ये मुहाल है) उसी तरह उनका बेहश्त में दाखिल होना मुहाल है और हम मुजरिमों को ऐसी ही सज़ा दिया करते हैं उनके लिए जहन्नुम (की आग) का बिछौना होगा
41لَهُم مِّن جَهَنَّمَ مِهَادٌ وَمِن فَوْقِهِمْ غَوَاشٍ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ
और उनके ऊपर से (आग ही का) ओढ़ना भी और हम ज़ालिमों को ऐसी ही सज़ा देते हैं और जिन लोगों ने ईमान कुबुल किया
42وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَا نُكَلِّفُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और अच्छे अच्छे काम किये और हम तो किसी शख्स को उसकी ताकत से ज्यादा तकलीफ देते ही नहीं यहीं लोग जन्नती हैं कि वह हमेशा जन्नत ही में रहा (सहा) करेगें
43وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ تَجْرِي مِن تَحْتِهِمُ الْأَنْهَارُ ۖ وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي هَدَانَا لِهَٰذَا وَمَا كُنَّا لِنَهْتَدِيَ لَوْلَا أَنْ هَدَانَا اللَّهُ ۖ لَقَدْ جَاءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّ ۖ وَنُودُوا أَن تِلْكُمُ الْجَنَّةُ أُورِثْتُمُوهَا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और उन लोगों के दिल में जो कुछ (बुग़ज़ व कीना) होगा वह सब हम निकाल (बाहर कर) देगें उनके महलों के नीचे नहरें जारी होगीं और कहते होगें शुक्र है उस ख़ुदा का जिसने हमें इस (मंज़िले मक़सूद) तक पहुंचाया और अगर ख़ुदा हमें यहाँ न पहुंचाता तो हम किसी तरह यहाँ न पहुंच सकते बेशक हमारे परवरदिगार के पैग़म्बर दीने हक़ लेकर आये थे और उन लोगों से पुकार कर कह दिया जाएगा कि वह बेहिश्त हैं जिसके तुम अपनी कारग़ुज़ारियों की जज़ा में वारिस व मालिक बनाए गये हों
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
41आयत

अनुवाद — अल-आराफ 41

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Tuesday, September 29, 2026

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