Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حِجَابٌ: पर्दा या आड़, यहाँ इसका अर्थ है जन्नत और जहन्नम के बीच की दीवार।
- الْأَعْرَافِ: "عُرْف" का बहुवचन, जिसका अर्थ है ऊँची जगह या चोटी। यह उस दीवार की ऊँचाई को कहा गया है।
- سِيمَاهُمْ: उनकी निशानियाँ या पहचान के चिह्न।
- يَطْمَعُونَ: वे आशा रखते हैं, लालच या उम्मीद करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
जन्नत वालों और जहन्नम वालों के बीच एक ऊँची दीवार (आड़) होगी, जिसे "अआराफ" कहा जाता है। यह दीवार दोनों समूहों को अलग करेगी। इस दीवार की ऊँची चोटी पर कुछ लोग होंगे, जिनके अच्छे और बुरे कर्म बराबर होंगे। यानी उनकी नेकियाँ इतनी नहीं कि वे सीधे जन्नत में चले जाएँ, और न ही उनके गुनाह इतने कि वे जहन्नम में डाल दिए जाएँ। ये लोग दोनों समूहों को उनकी निशानियों से पहचान लेंगे—मोमिनों के चेहरे सफेद और उज्ज्वल होंगे, जबकि काफिरों के चेहरे काले और उदास होंगे।
जब ये अआराफ वाले लोग जन्नत वालों की ओर देखेंगे, तो वे उन्हें सम्मान और प्रेम के साथ सलाम करेंगे और कहेंगे: "तुम पर सलाम हो!" यानी तुम हर अज़ाब और परेशानी से सुरक्षित हो। हालाँकि ये अआराफ वाले लोग अभी जन्नत में दाखिल नहीं हुए हैं, लेकिन उनके दिलों में अल्लाह की रहमत से जन्नत में जाने की गहरी आशा और उम्मीद होगी। वे अल्लाह की दया के प्रति आशावान होंगे और यही उनकी नजात का जरिया बनेगी।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह की रहमत बेहद विशाल है—जिनके अच्छे और बुरे कर्म बराबर होंगे, वे भी अल्लाह की मेहरबानी से जन्नत पा सकते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें कभी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए।
- मोमिनों की पहचान उनके चेहरे की रोशनी और साफ सुथरी जिंदगी से होगी। यह हमें बताता है कि ईमान और नेक अमल इंसान के चेहरे और हाव-भाव पर असर छोड़ते हैं।
- सलाम करना इस्लाम की पहचान और अच्छे अख्लाक का हिस्सा है—जन्नत वालों को भी सलाम किया जाएगा, और हमें भी आपस में सलाम का चलन बढ़ाना चाहिए।
- आशा और उम्मीद (रजा) एक बहुत बड़ी नेमत है। अआराफ वाले जन्नत में नहीं थे, फिर भी उन्हें उम्मीद थी, और यही उम्मीद उन्हें आगे बढ़ाने वाली बनी। हमें भी अल्लाह की रहमत से हमेशा उम्मीद रखनी चाहिए और अपने अमल को बेहतर बनाते रहना चाहिए।
- यह आयत हमें याद दिलाती है कि आखिरत का फैसला अल्लाह के हाथ में है, और वह अपने बंदों के साथ इंसाफ और फजल (कृपा) दोनों करेगा। इसलिए हमें अपनी जिंदगी को नेकी और तकवा पर बनानी चाहिए।
📜 आयत 44-48 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 46
सूरा अल-आराफ आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बेहश्त व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है…सूरा आयत 46/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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