अल-आराफ · 46/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
وَبَيْنَهُمَا حِجَابٌ ۚ وَعَلَى الْأَعْرَافِ رِجَالٌ يَعْرِفُونَ كُلًّا بِسِيمَاهُمْ ۚ وَنَادَوْا أَصْحَابَ الْجَنَّةِ أَن سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۚ لَمْ يَدْخُلُوهَا وَهُمْ يَطْمَعُونَ ۝٤٦
Wa bainahumaa hijaab; wa `alal A`raafi rijaaluny ya`rifoona kullam biseemaahum; wa naadaw Ashaabal jannati an salaamun `alaikum; lam yadkhuloohaa wa hum yatma`oon
📖 हिंदी अर्थ
और बेहश्त व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है और कुछ लोग आराफ़ पर होगें जो हर शख्स को (बेहिश्ती हो या जहन्नुमी) उनकी पेशानी से पहचान लेगें और वह जन्नत वालों को आवाज़ देगें कि तुम पर सलाम हो या (आराफ़ वाले) लोग अभी दाख़िले जन्नत नहीं हुए हैं मगर वह तमन्ना ज़रूर रखते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حِجَابٌ: पर्दा या आड़, यहाँ इसका अर्थ है जन्नत और जहन्नम के बीच की दीवार।
  • الْأَعْرَافِ: "عُرْف" का बहुवचन, जिसका अर्थ है ऊँची जगह या चोटी। यह उस दीवार की ऊँचाई को कहा गया है।
  • سِيمَاهُمْ: उनकी निशानियाँ या पहचान के चिह्न।
  • يَطْمَعُونَ: वे आशा रखते हैं, लालच या उम्मीद करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

जन्नत वालों और जहन्नम वालों के बीच एक ऊँची दीवार (आड़) होगी, जिसे "अआराफ" कहा जाता है। यह दीवार दोनों समूहों को अलग करेगी। इस दीवार की ऊँची चोटी पर कुछ लोग होंगे, जिनके अच्छे और बुरे कर्म बराबर होंगे। यानी उनकी नेकियाँ इतनी नहीं कि वे सीधे जन्नत में चले जाएँ, और न ही उनके गुनाह इतने कि वे जहन्नम में डाल दिए जाएँ। ये लोग दोनों समूहों को उनकी निशानियों से पहचान लेंगे—मोमिनों के चेहरे सफेद और उज्ज्वल होंगे, जबकि काफिरों के चेहरे काले और उदास होंगे।

जब ये अआराफ वाले लोग जन्नत वालों की ओर देखेंगे, तो वे उन्हें सम्मान और प्रेम के साथ सलाम करेंगे और कहेंगे: "तुम पर सलाम हो!" यानी तुम हर अज़ाब और परेशानी से सुरक्षित हो। हालाँकि ये अआराफ वाले लोग अभी जन्नत में दाखिल नहीं हुए हैं, लेकिन उनके दिलों में अल्लाह की रहमत से जन्नत में जाने की गहरी आशा और उम्मीद होगी। वे अल्लाह की दया के प्रति आशावान होंगे और यही उनकी नजात का जरिया बनेगी।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की रहमत बेहद विशाल है—जिनके अच्छे और बुरे कर्म बराबर होंगे, वे भी अल्लाह की मेहरबानी से जन्नत पा सकते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें कभी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए।
  2. मोमिनों की पहचान उनके चेहरे की रोशनी और साफ सुथरी जिंदगी से होगी। यह हमें बताता है कि ईमान और नेक अमल इंसान के चेहरे और हाव-भाव पर असर छोड़ते हैं।
  3. सलाम करना इस्लाम की पहचान और अच्छे अख्लाक का हिस्सा है—जन्नत वालों को भी सलाम किया जाएगा, और हमें भी आपस में सलाम का चलन बढ़ाना चाहिए।
  4. आशा और उम्मीद (रजा) एक बहुत बड़ी नेमत है। अआराफ वाले जन्नत में नहीं थे, फिर भी उन्हें उम्मीद थी, और यही उम्मीद उन्हें आगे बढ़ाने वाली बनी। हमें भी अल्लाह की रहमत से हमेशा उम्मीद रखनी चाहिए और अपने अमल को बेहतर बनाते रहना चाहिए।
  5. यह आयत हमें याद दिलाती है कि आखिरत का फैसला अल्लाह के हाथ में है, और वह अपने बंदों के साथ इंसाफ और फजल (कृपा) दोनों करेगा। इसलिए हमें अपनी जिंदगी को नेकी और तकवा पर बनानी चाहिए।


📜 आयत 44-48 — सूरा अल-आराफ

44وَنَادَىٰ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ أَصْحَابَ النَّارِ أَن قَدْ وَجَدْنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقًّا فَهَلْ وَجَدتُّم مَّا وَعَدَ رَبُّكُمْ حَقًّا ۖ قَالُوا نَعَمْ ۚ فَأَذَّنَ مُؤَذِّنٌ بَيْنَهُمْ أَن لَّعْنَةُ اللَّهِ عَلَى الظَّالِمِينَ
और जन्नती लोग जहन्नुमी वालों से पुकार कर कहेगें हमने तो बेशक जो हमारे परवरदिगार ने हमसे वायदा किया था ठीक ठीक पा लिया तो क्या तुमने भी जो तुमसे तम्हारे परवरदिगार ने वायदा किया था ठीक पाया (या नहीं) अहले जहन्नुम कहेगें हाँ (पाया) एक मुनादी उनके दरमियान निदा करेगा कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की लानत है
45الَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا وَهُم بِالْآخِرَةِ كَافِرُونَ
जो ख़ुदा की राह से लोगों को रोकते थे और उसमें (ख्वामख्वाह) कज़ी (टेढ़ापन) करना चाहते थे और वह रोज़े आख़ेरत से इन्कार करते थे
46وَبَيْنَهُمَا حِجَابٌ ۚ وَعَلَى الْأَعْرَافِ رِجَالٌ يَعْرِفُونَ كُلًّا بِسِيمَاهُمْ ۚ وَنَادَوْا أَصْحَابَ الْجَنَّةِ أَن سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۚ لَمْ يَدْخُلُوهَا وَهُمْ يَطْمَعُونَ
और बेहश्त व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है और कुछ लोग आराफ़ पर होगें जो हर शख्स को (बेहिश्ती हो या जहन्नुमी) उनकी पेशानी से पहचान लेगें और वह जन्नत वालों को आवाज़ देगें कि तुम पर सलाम हो या (आराफ़ वाले) लोग अभी दाख़िले जन्नत नहीं हुए हैं मगर वह तमन्ना ज़रूर रखते हैं
47۞ وَإِذَا صُرِفَتْ أَبْصَارُهُمْ تِلْقَاءَ أَصْحَابِ النَّارِ قَالُوا رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
और जब उनकी निगाहें पलटकर जहन्नुमी लोगों की तरफ जा पड़ेगीं (तो उनकी ख़राब हालत देखकर ख़ुदा से अर्ज़ करेगें) ऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना
48وَنَادَىٰ أَصْحَابُ الْأَعْرَافِ رِجَالًا يَعْرِفُونَهُم بِسِيمَاهُمْ قَالُوا مَا أَغْنَىٰ عَنكُمْ جَمْعُكُمْ وَمَا كُنتُمْ تَسْتَكْبِرُونَ
और आराफ वाले कुछ (जहन्नुमी) लोगों को जिन्हें उनका चेहरा देखकर पहचान लेगें आवाज़ देगें और और कहेगें अब न तो तुम्हारा जत्था ही तुम्हारे काम आया और न तुम्हारी शेखी बाज़ी ही (सूद मन्द हुई)
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
46आयत

अनुवाद — अल-आराफ 46

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सूरा आयत 46/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.





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Tuesday, September 29, 2026

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