Wa bainahumaa hijaab; wa `alal A`raafi rijaaluny ya`rifoona kullam biseemaahum; wa naadaw Ashaabal jannati an salaamun `alaikum; lam yadkhuloohaa wa hum yatma`oon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और बेहश्त व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है और कुछ लोग आराफ़ पर होगें जो हर शख्स को (बेहिश्ती हो या जहन्नुमी) उनकी पेशानी से पहचान लेगें और वह जन्नत वालों को आवाज़ देगें कि तुम पर सलाम हो या (आराफ़ वाले) लोग अभी दाख़िले जन्नत नहीं हुए हैं मगर वह तमन्ना ज़रूर रखते हैं
🌐 Additional reference in اردو
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ان دونوں (یعنی بہشت اور دوزخ) کے درمیان (اعراف نام) ایک دیوار ہو گی اور اعراف پر کچھ آدمی ہوں گے جو سب کو ان کی صورتوں سے پہچان لیں گے۔ تو وہ اہل بہشت کو پکار کر کہیں گے کہ تم پر سلامتی ہو۔ یہ لوگ بھی بہشت میں داخل تو نہیں ہوں گے مگر امید رکھتے ہوں گے
حِجَابٌ: पर्दा या आड़, यहाँ इसका अर्थ है जन्नत और जहन्नम के बीच की दीवार।
الْأَعْرَافِ: "عُرْف" का बहुवचन, जिसका अर्थ है ऊँची जगह या चोटी। यह उस दीवार की ऊँचाई को कहा गया है।
سِيمَاهُمْ: उनकी निशानियाँ या पहचान के चिह्न।
يَطْمَعُونَ: वे आशा रखते हैं, लालच या उम्मीद करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
जन्नत वालों और जहन्नम वालों के बीच एक ऊँची दीवार (आड़) होगी, जिसे "अआराफ" कहा जाता है। यह दीवार दोनों समूहों को अलग करेगी। इस दीवार की ऊँची चोटी पर कुछ लोग होंगे, जिनके अच्छे और बुरे कर्म बराबर होंगे। यानी उनकी नेकियाँ इतनी नहीं कि वे सीधे जन्नत में चले जाएँ, और न ही उनके गुनाह इतने कि वे जहन्नम में डाल दिए जाएँ। ये लोग दोनों समूहों को उनकी निशानियों से पहचान लेंगे—मोमिनों के चेहरे सफेद और उज्ज्वल होंगे, जबकि काफिरों के चेहरे काले और उदास होंगे।
जब ये अआराफ वाले लोग जन्नत वालों की ओर देखेंगे, तो वे उन्हें सम्मान और प्रेम के साथ सलाम करेंगे और कहेंगे: "तुम पर सलाम हो!" यानी तुम हर अज़ाब और परेशानी से सुरक्षित हो। हालाँकि ये अआराफ वाले लोग अभी जन्नत में दाखिल नहीं हुए हैं, लेकिन उनके दिलों में अल्लाह की रहमत से जन्नत में जाने की गहरी आशा और उम्मीद होगी। वे अल्लाह की दया के प्रति आशावान होंगे और यही उनकी नजात का जरिया बनेगी।
फ़ायदे (सबक):
अल्लाह की रहमत बेहद विशाल है—जिनके अच्छे और बुरे कर्म बराबर होंगे, वे भी अल्लाह की मेहरबानी से जन्नत पा सकते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें कभी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए।
मोमिनों की पहचान उनके चेहरे की रोशनी और साफ सुथरी जिंदगी से होगी। यह हमें बताता है कि ईमान और नेक अमल इंसान के चेहरे और हाव-भाव पर असर छोड़ते हैं।
सलाम करना इस्लाम की पहचान और अच्छे अख्लाक का हिस्सा है—जन्नत वालों को भी सलाम किया जाएगा, और हमें भी आपस में सलाम का चलन बढ़ाना चाहिए।
आशा और उम्मीद (रजा) एक बहुत बड़ी नेमत है। अआराफ वाले जन्नत में नहीं थे, फिर भी उन्हें उम्मीद थी, और यही उम्मीद उन्हें आगे बढ़ाने वाली बनी। हमें भी अल्लाह की रहमत से हमेशा उम्मीद रखनी चाहिए और अपने अमल को बेहतर बनाते रहना चाहिए।
यह आयत हमें याद दिलाती है कि आखिरत का फैसला अल्लाह के हाथ में है, और वह अपने बंदों के साथ इंसाफ और फजल (कृपा) दोनों करेगा। इसलिए हमें अपनी जिंदगी को नेकी और तकवा पर बनानी चाहिए।
और बेहश्त व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है और कुछ लोग आराफ़ पर होगें जो हर शख्स को (बेहिश्ती हो या जहन्नुमी) उनकी पेशानी से पहचान लेगें और वह जन्नत वालों को आवाज़ देगें कि तुम पर सलाम हो या (आराफ़ वाले) लोग अभी दाख़िले जन्नत नहीं हुए हैं मगर वह तमन्ना ज़रूर रखते हैं
और जन्नती लोग जहन्नुमी वालों से पुकार कर कहेगें हमने तो बेशक जो हमारे परवरदिगार ने हमसे वायदा किया था ठीक ठीक पा लिया तो क्या तुमने भी जो तुमसे तम्हारे परवरदिगार ने वायदा किया था ठीक पाया (या नहीं) अहले जहन्नुम कहेगें हाँ (पाया) एक मुनादी उनके दरमियान निदा करेगा कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की लानत है
और बेहश्त व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है और कुछ लोग आराफ़ पर होगें जो हर शख्स को (बेहिश्ती हो या जहन्नुमी) उनकी पेशानी से पहचान लेगें और वह जन्नत वालों को आवाज़ देगें कि तुम पर सलाम हो या (आराफ़ वाले) लोग अभी दाख़िले जन्नत नहीं हुए हैं मगर वह तमन्ना ज़रूर रखते हैं
और जब उनकी निगाहें पलटकर जहन्नुमी लोगों की तरफ जा पड़ेगीं (तो उनकी ख़राब हालत देखकर ख़ुदा से अर्ज़ करेगें) ऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना
और आराफ वाले कुछ (जहन्नुमी) लोगों को जिन्हें उनका चेहरा देखकर पहचान लेगें आवाज़ देगें और और कहेगें अब न तो तुम्हारा जत्था ही तुम्हारे काम आया और न तुम्हारी शेखी बाज़ी ही (सूद मन्द हुई)
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