अल-आराफ · 45/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
الَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا وَهُم بِالْآخِرَةِ كَافِرُونَ ۝٤٥
Allazeena yasuddoona `an sabeelil laahi wa yabghoo nahaa `iwajanw wa hum bil Aakhirati kaafiroon
📖 हिंदी अर्थ
जो ख़ुदा की राह से लोगों को रोकते थे और उसमें (ख्वामख्वाह) कज़ी (टेढ़ापन) करना चाहते थे और वह रोज़े आख़ेरत से इन्कार करते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَصُدُّونَ: रोकते हैं, हटाते हैं
  • سَبِيلِ اللَّهِ: अल्लाह का रास्ता, यानी इस्लाम और ईमान
  • يَبْغُونَهَا: उस (रास्ते) में चाहते हैं, उसके लिए तलाश करते हैं
  • عِوَجًا: टेढ़ापन, विकृति
  • كَافِرُونَ: इनकार करने वाले, न मानने वाले

तफ़सीर (व्याख्या):

ये वे लोग हैं जो खुद अल्लाह के सीधे रास्ते से भटक जाते हैं और दूसरों को भी इस रास्ते पर चलने से रोकते हैं। वे न केवल खुद इस रास्ते को अपनाने से इनकार करते हैं, बल्कि अपनी पूरी कोशिश करते हैं कि इस रास्ते में टेढ़ापन और विकृति पैदा कर दें, ताकि लोगों को यह रास्ता सही न लगे और वे इसे छोड़ दें। वे इस्लाम के बारे में झूठी बातें फैलाते हैं, उसमें संदेह पैदा करते हैं और उसे बुरा दिखाने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही वे आख़िरत (परलोक) को भी नहीं मानते — न मृत्यु के बाद के जीवन पर विश्वास रखते हैं, न ही अच्छे और बुरे कर्मों के हिसाब और जज़ा-सज़ा पर ईमान लाते हैं। यही कारण है कि वे अपने कुकर्मों से बाज़ नहीं आते और दूसरों को भी सीधे रास्ते से भटकाने में लगे रहते हैं।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का रास्ता सीधा और स्पष्ट है, और हमें उसे ही अपनाना चाहिए, चाहे दुनिया में कितने ही लोग उसका विरोध करें।
  2. हमें चाहिए कि हम न केवल खुद इस रास्ते पर चलें, बल्कि दूसरों को भी इसकी ओर बुलाएँ और किसी को भी इस रास्ते से भटकाने की कोशिश न करें।
  3. आख़िरत पर ईमान इंसान को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है और बुराई से रोकता है। जो लोग आख़िरत को नहीं मानते, वे बेलगाम होकर गलत कामों में पड़ जाते हैं।
  4. यह आयत हमें सावधान करती है कि जो लोग अल्लाह के रास्ते में रुकावटें डालते हैं और उसे बदनाम करते हैं, वे अल्लाह की नज़र में बड़े अपराधी हैं और उनका अंजाम बहुत बुरा होगा।
  5. इस्लाम सिखाता है कि हमें सच्चाई और नेकी के रास्ते को साफ़ और सीधा रखना चाहिए, और किसी भी तरह की धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार से बचना चाहिए, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है।


📜 आयत 43-47 — अल-आराफ

43وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ تَجْرِي مِن تَحْتِهِمُ الْأَنْهَارُ ۖ وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي هَدَانَا لِهَٰذَا وَمَا كُنَّا لِنَهْتَدِيَ لَوْلَا أَنْ هَدَانَا اللَّهُ ۖ لَقَدْ جَاءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّ ۖ وَنُودُوا أَن تِلْكُمُ الْجَنَّةُ أُورِثْتُمُوهَا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और उन लोगों के दिल में जो कुछ (बुग़ज़ व कीना) होगा वह सब हम निकाल (बाहर कर) देगें उनके महलों के नीचे नहरें जारी होगीं और कहते होगें शुक्र है उस ख़ुदा का जिसने हमें इस (मंज़िले मक़सूद) तक पहुंचाया और अगर ख़ुदा हमें यहाँ न पहुंचाता तो हम किसी तरह यहाँ न पहुंच सकते बेशक हमारे परवरदिगार के पैग़म्बर दीने हक़ लेकर आये थे और उन लोगों से पुकार कर कह दिया जाएगा कि वह बेहिश्त हैं जिसके तुम अपनी कारग़ुज़ारियों की जज़ा में वारिस व मालिक बनाए गये हों
44وَنَادَىٰ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ أَصْحَابَ النَّارِ أَن قَدْ وَجَدْنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقًّا فَهَلْ وَجَدتُّم مَّا وَعَدَ رَبُّكُمْ حَقًّا ۖ قَالُوا نَعَمْ ۚ فَأَذَّنَ مُؤَذِّنٌ بَيْنَهُمْ أَن لَّعْنَةُ اللَّهِ عَلَى الظَّالِمِينَ
और जन्नती लोग जहन्नुमी वालों से पुकार कर कहेगें हमने तो बेशक जो हमारे परवरदिगार ने हमसे वायदा किया था ठीक ठीक पा लिया तो क्या तुमने भी जो तुमसे तम्हारे परवरदिगार ने वायदा किया था ठीक पाया (या नहीं) अहले जहन्नुम कहेगें हाँ (पाया) एक मुनादी उनके दरमियान निदा करेगा कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की लानत है
45الَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا وَهُم بِالْآخِرَةِ كَافِرُونَ
जो ख़ुदा की राह से लोगों को रोकते थे और उसमें (ख्वामख्वाह) कज़ी (टेढ़ापन) करना चाहते थे और वह रोज़े आख़ेरत से इन्कार करते थे
46وَبَيْنَهُمَا حِجَابٌ ۚ وَعَلَى الْأَعْرَافِ رِجَالٌ يَعْرِفُونَ كُلًّا بِسِيمَاهُمْ ۚ وَنَادَوْا أَصْحَابَ الْجَنَّةِ أَن سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۚ لَمْ يَدْخُلُوهَا وَهُمْ يَطْمَعُونَ
और बेहश्त व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है और कुछ लोग आराफ़ पर होगें जो हर शख्स को (बेहिश्ती हो या जहन्नुमी) उनकी पेशानी से पहचान लेगें और वह जन्नत वालों को आवाज़ देगें कि तुम पर सलाम हो या (आराफ़ वाले) लोग अभी दाख़िले जन्नत नहीं हुए हैं मगर वह तमन्ना ज़रूर रखते हैं
47۞ وَإِذَا صُرِفَتْ أَبْصَارُهُمْ تِلْقَاءَ أَصْحَابِ النَّارِ قَالُوا رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
और जब उनकी निगाहें पलटकर जहन्नुमी लोगों की तरफ जा पड़ेगीं (तो उनकी ख़राब हालत देखकर ख़ुदा से अर्ज़ करेगें) ऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना
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अनुवाद — अल-आराफ 45

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Tuesday, August 18, 2026

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