Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِالْبَأْسَاءِ: कठिनाई, तंगी, फ़क़ीरी और जीविका की संकीर्णता।
- وَالضَّرَّاءِ: शारीरिक कष्ट, बीमारी, दर्द और शरीर को पहुँचने वाली तकलीफ़।
- يَضَّرَّعُونَ: झुकना, गिड़गिड़ाना, अत्यंत विनम्रता के साथ अल्लाह की ओर रुजू करना और उसके सामने अपनी लाचारी का इज़हार करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी उस सुन्नत (क़ानून) का ज़िक्र कर रहा है जो उसने पहले की उम्मतों के साथ जारी रखी। जब भी किसी बस्ती में कोई नबी भेजा गया और उसकी क़ौम ने उसे झुठलाया और उसके पैग़ाम को क़बूल करने से इनकार कर दिया, तो अल्लाह ने उन लोगों को मुसीबतों और तकलीफ़ों में डाल दिया। उनकी जानों को बीमारियों और दर्दों में मुब्तला किया, और उनके माल को तबाही, फ़क़ीरी और कमी का शिकार बनाया। यह सब कुछ उनके हालात को बदलने के लिए किया गया, ताकि उनके दिल नरम हों, उनका ग़ुरूर और घमंड टूटे, और वे अपने किए पर शर्मिंदा होकर अल्लाह की तरफ़ रुजू करें, उसके आगे गिड़गिड़ाएँ, अपनी ग़लतियों से तौबा करें और सच्चाई को क़बूल कर लें। यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी का तरीक़ा है कि वह बंदों को नरमी और सख़्ती दोनों तरह से आज़माता है, ताकि वे अपने रब की याद करें और उसकी तरफ़ पलटें। यह आयत मक्का के काफ़िरों के लिए एक सख़्त चेतावनी भी है कि अगर उन्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को झुठलाने पर क़ायम रहा, तो उन पर भी वही अज़ाब और मुसीबतें आएँगी जो पहले की झुठलाने वाली उम्मतों पर आईं।
फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):
- मुसीबतें और तकलीफ़ें अल्लाह की तरफ़ से एक नेमत भी हो सकती हैं, क्योंकि इनके ज़रिए बंदे का दिल अल्लाह की तरफ़ मुड़ता है और वह अपनी ग़लतियों से तौबा करता है।
- अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है; वह उन्हें सज़ा देने में जल्दबाज़ी नहीं करता, बल्कि पहले उन्हें मुसीबतों से आगाह करता है ताकि वे सुधर जाएँ।
- मुसीबत के वक़्त अल्लाह के आगे गिड़गिड़ाना और उससे दुआ करना बहुत पसंदीदा अमल है, और यही इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम पर कोई मुसीबत आए, तो हमें अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए, न कि उससे दूर भागना चाहिए।
- अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) कभी नहीं बदलती; जो लोग सच्चाई को झुठलाते हैं और हक़ से मुँह मोड़ते हैं, उनका अंजाम हमेशा बुरा ही रहा है।
📜 आयत 92-96 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 94
सूरा अल-आराफ आयत 94 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने किसी बस्ती में कोई नबी नही भेजा मगर…सूरा आयत 94/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 92–96. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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