अल-मुद्दस्सिर · 29/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
لَوَّاحَةٌ لِّلْبَشَرِ ۝٢٩
Lawwaahatul lilbashar
📖 हिंदी अर्थ
और बदन को जला कर सियाह कर देगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَوَّاحَةٌ: अत्यधिक जलाने वाली, त्वचा को झुलसा देने वाली।
  • لِلْبَشَرِ: इंसानों की त्वचा के लिए।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक आग (जहन्नम) का वर्णन कर रही है जो पापियों के लिए तैयार की गई है। यह आग ऐसी है जो इंसान की त्वचा को झुलसा देती है, उसे जला कर काला कर देती है, और न तो कोई गोश्त (मांस) बचाती है और न ही हड्डी को छोड़ती है। यह आग त्वचा को इस कदर बदल देती है कि उसका रंग और रूप ही बिगड़ जाता है। यह वर्णन उस दिन के भय को दिल में बैठाने के लिए है जब हर इंसान अपने कर्मों का हिसाब देगा।

दावत और नसीहत:

अल्लाह तआला ने हमें यह आग दिखाकर डराया है ताकि हम उसके हुक्मों को मानें और उसकी नाफरमानी से बचें। यह डरावना वर्णन हमारे लिए रहमत है, क्योंकि यह हमें सीधे रास्ते पर लाने का ज़रिया है। हमें चाहिए कि हम अपने अमल (कर्म) को सुधारें, नमाज़ की पाबंदी करें, अल्लाह की याद में दिल को जोड़ें, और उसकी रहमत की उम्मीद रखते हुए उसके अज़ाब से पनाह माँगें। याद रखें, जो लोग दुनिया में अल्लाह के आगे झुक जाते हैं, उन्हें क़यामत के दिन उस आग से बचा लिया जाएगा और जन्नत की नेमतें अता की जाएँगी। अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से जहन्नम की आग से महफूज़ रखे। आमीन।



📜 आयत 27-31 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

27وَمَا أَدْرَاكَ مَا سَقَرُ
और तुम क्या जानों कि जहन्नुम क्या है
28لَا تُبْقِي وَلَا تَذَرُ
वह न बाक़ी रखेगी न छोड़ देगी
29لَوَّاحَةٌ لِّلْبَشَرِ
और बदन को जला कर सियाह कर देगी
30عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَ
उस पर उन्नीस (फ़रिश्ते मुअय्यन) हैं
31وَمَا جَعَلْنَا أَصْحَابَ النَّارِ إِلَّا مَلَائِكَةً ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا لِيَسْتَيْقِنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ وَيَزْدَادَ الَّذِينَ آمَنُوا إِيمَانًا ۙ وَلَا يَرْتَابَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ وَالْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ الَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْكَافِرُونَ مَاذَا أَرَادَ اللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِيَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ
और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है और उनका ये शुमार भी काफिरों की आज़माइश के लिए मुक़र्रर किया ताकि अहले किताब (फौरन) यक़ीन कर लें और मोमिनो का ईमान और ज्यादा हो और अहले किताब और मोमिनीन (किसी तरह) शक़ न करें और जिन लोगों के दिल में (निफ़ाक का) मर्ज़ है (वह) और काफिर लोग कह बैठे कि इस मसल (के बयान करने) से ख़ुदा का क्या मतलब है यूँ ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत करता है और तुम्हारे परवरदिगार के लशकरों को उसके सिवा कोई नहीं जानता और ये तो आदमियों के लिए बस नसीहत है
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
29आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 29

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बदन को जला कर सियाह कर देगी

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Monday, September 28, 2026

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