अल-मुरसलात · 28/50
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुरसलात
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٢٨
Wailuny yawma `izil lilmukazzibeen
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • वैल (وَيْلٌ): विनाश, हलाकी, सख्त अज़ाब और दुख।
  • यौमइज़िन (يَوْمَئِذٍ): उस दिन, यानी क़ियामत के दिन।
  • लिल्मुकज़्ज़िबीन (لِلْمُكَذِّبِينَ): झुठलाने वालों के लिए, यानी जो अल्लाह की नेअमतों और उसकी आयतों को नकारते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों के लिए विनाश और सख्त अज़ाब की धमकी दी है जो उसकी नेअमतों को झुठलाते हैं। यह आयत उन पिछली आयतों से जुड़ी है जिनमें अल्लाह ने अपनी बेशुमार नेअमतों का ज़िक्र किया — जैसे ज़मीन को आरामगाह बनाना, पहाड़ों को मज़बूत खूँटे बनाना, मीठा पानी पिलाना, और दूसरी कई नेअमतें। इन सब नेअमतों को देखने के बाद भी जो लोग इन्हें नकारते हैं और अल्लाह के शुक्र से मुँह मोड़ते हैं, उनके लिए उस दिन हलाकी और तबाही है।

क़ियामत का दिन वह दिन होगा जब हर इंसान अपने अमल का बदला पाएगा। जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह की नेअमतों को देखकर भी उसे नहीं पहचाना, उसके रसूलों को झुठलाया और उसकी आयतों का मज़ाक उड़ाया, उनके लिए उस दिन सिर्फ़ विनाश और दर्दनाक अज़ाब होगा। यह कोई साधारण सज़ा नहीं, बल्कि ऐसी हलाकी है जिसका कोई अंत नहीं — जहन्नम की आग, जलता हुआ पानी, और अल्लाह की नाराज़गी।

यह आयत हमें एक बड़ी सीख देती है कि अल्लाह की नेअमतें हमारे चारों ओर बिखरी हुई हैं — साँस लेने की ताक़त, खाने-पीने की चीज़ें, सुरक्षित घर, परिवार, सेहत — ये सब अल्लाह की देन हैं। जो इन नेअमतों को देखकर अल्लाह का शुक्र अदा करता है और उसकी इबादत करता है, वह क़ियामत के दिन कामयाब होगा। और जो इन्हें नकारता है या इन्हें किसी और की तरफ़ मंसूब करता है, उसके लिए विनाश है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें आगाह करती है कि हम अल्लाह की नेअमतों को कभी हल्की न समझें। हर सुबह उठना, हर साँस लेना, हर लुक़्मा खाना — ये सब अल्लाह की रहमत है। इन नेअमतों का सही इस्तेमाल यह है कि हम अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें, उसकी इबादत करें, और दूसरों के साथ भलाई करें। अल्लाह तआला हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी नेअमतों का शुक्र अदा करते हैं और उस दिन के अज़ाब से महफ़ूज़ रहें। आमीन।



📜 आयत 26-30 — सूरा अल-मुरसलात

26أَحْيَاءً وَأَمْوَاتًا
और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए
27وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ شَامِخَاتٍ وَأَسْقَيْنَاكُم مَّاءً فُرَاتًا
और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया
28وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
29انطَلِقُوا إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो
30انطَلِقُوا إِلَىٰ ظِلٍّ ذِي ثَلَاثِ شُعَبٍ
(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं
अल-मुरसलातकुरान सूची
50आयत
मक्कीअवतरण स्थान
28आयत

अनुवाद — अल-मुरसलात 28

सूरा अल-मुरसलात आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

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Friday, October 2, 2026

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