अल-मुरसलात · 27/50
अनुवाद उच्चारण — अल-मुरसलात
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ شَامِخَاتٍ وَأَسْقَيْنَاكُم مَّاءً فُرَاتًا ۝٢٧
Wa ja`alnaa feehaa rawaasiya shaamikhaatinw wa asqainaakum maaa`an furaataa
📖 हिंदी अर्थ
और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रवासी: पहाड़, जो ज़मीन को जमाए रखते हैं।
  • शामिखात: ऊँचे, بلند و برتر।
  • फ़ुरात: बहुत मीठा और ख़ुशगवार पानी।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी क़ुदरत के वो नज़ारे दिखाए हैं जो इंसान की आँखों के सामने हर वक़्त मौजूद हैं, लेकिन अक्सर लोग उन पर ग़ौर नहीं करते। अल्लाह ने इस ज़मीन में ऊँचे-ऊँचे पहाड़ रख दिए हैं, जो बड़े मज़बूत और स्थिर हैं। ये पहाड़ ज़मीन को हिलने-डुलने से रोकते हैं, ताकि तुम्हारी ज़िंदगी इत्मिनान और सुकून से गुज़रे। अगर ये पहाड़ न होते, तो ज़मीन लगातार हिलती रहती और उस पर रहना मुश्किल हो जाता।

फिर अल्लाह ने अपनी एक और बड़ी नेमत का ज़िक्र किया—उसने तुम्हें मीठा, साफ़ और प्यास बुझाने वाला पानी पिलाया। ये पानी बारिश से आता है, ज़मीन से निकलता है, और नदियों, झरनों और कुओं के रूप में तुम्हारी ज़रूरतें पूरी करता है। ये पानी इतना ख़ुशगवार है कि जब इंसान पीता है तो उसे ताज़गी और सुकून मिलता है।

अब ज़रा सोचो—जिस अल्लाह ने ये बड़े पहाड़ बनाए और आसमान से मीठा पानी बरसाया, क्या वो तुम्हें दोबारा ज़िंदा करके उठाने पर क़ादिर नहीं है? यक़ीनन वो हर चीज़ पर पूरी ताक़त रखता है। जिसने इतनी बड़ी-बड़ी नेमतें दीं, उसके लिए मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करना बिल्कुल आसान है।

ये आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करें और उसकी क़ुदरत को पहचानें। जब हम पहाड़ों को देखें, तो याद करें कि अल्लाह कितना बड़ा और ताक़तवर है। जब हम मीठा पानी पिएँ, तो उसका शुक्र अदा करें। ये सब नेमतें हमें उस रब की याद दिलाती हैं जो हमें पैदा करने वाला है और एक दिन हमें दोबारा ज़िंदा करके उठाएगा। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारना चाहिए, ताकि उस दिन हम कामयाब हों।

🎧 सुनें

📜 आयत 25-29 — अल-मुरसलात

25أَلَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ كِفَاتًا
क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया
26أَحْيَاءً وَأَمْوَاتًا
और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए
27وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ شَامِخَاتٍ وَأَسْقَيْنَاكُم مَّاءً فُرَاتًا
और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया
28وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
29انطَلِقُوا إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो
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अनुवाद — अल-मुरसलात 27

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Tuesday, August 18, 2026

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