अल-मुरसलात · 29/50
अनुवाद उच्चारण — अल-मुरसलात
انطَلِقُوا إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ ۝٢٩
Intaliqooo ilaa maa kuntum bihee tukazziboon
📖 हिंदी अर्थ
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • انطَلِقُوا: चलो, जाओ (यहाँ अर्थ है: अपनी मंज़िल की ओर बढ़ो)
  • إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ: उस चीज़ की ओर जिसे तुम झुठलाया करते थे (अर्थात उस अज़ाब की ओर जिसका वादा किया गया था और जिसे तुम सच नहीं मानते थे)

विस्तृत तफ़सीर:

क़यामत के दिन जब काफ़िरों और मुन्किरों को हश्र के मैदान में लाया जाएगा, तो उन्हें डांटते हुए, झिड़कते हुए और ताना मारते हुए कहा जाएगा: "चलो, अब उस आग की ओर बढ़ो जिसे तुम दुनिया में झुठलाया करते थे!" यह वही अज़ाब है जिसके बारे में अल्लाह के रसूलों ने डराया था, लेकिन तुमने उसे मज़ाक़ समझा और उसे सच नहीं माना। आज वही चीज़ तुम्हारे सामने है, और अब तुम्हें उसका स्वाद चखना ही होगा।

यह वह दृश्य है जब अल्लाह तआला काफ़िरों को जहन्नम की तरफ़ हाँकने का हुक्म देगा। उनसे कहा जाएगा: "जाओ, उस आग की तरफ़ जिसे तुम झुठलाते थे, और उसके धुएँ के साये में जाओ जो तीन शाखाओं में विभाजित होगा।" लेकिन वह साया न तो उस दिन की गर्मी से राहत देगा और न ही आग की लपटों से बचाएगा। जहन्नम आग के विशाल शोलों (चिंगारियों) को उगलेगी, जिनमें से हर एक चिंगारी ऊँचे महल या बड़ी इमारत जितनी बड़ी होगी। वे चिंगारियाँ ऐसी दिखेंगी जैसे पीले रंग के ऊँट जो काली ओर झुके हों — यानी उनका रंग और आकार ऐसा होगा जो देखने वालों के लिए बेहद भयानक और डरावना होगा।


दावती पहलू और सबक:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का वादा और उसका डरावा सच है। जिस चीज़ को इंसान दुनिया में हँसी-मज़ाक़ समझता है, वही उसके सामने क़यामत के दिन हक़ीक़त बनकर खड़ी होगी। इसलिए ऐ इंसान! आज ही अपने रब की तरफ़ लौट आ, अपने गुनाहों से तौबा कर, और उस दिन से डर जब कोई माफ़ी नहीं मिलेगी। अल्लाह तआला बड़ा रहम करने वाला है — उसने दुनिया में हमें मौक़ा दिया है कि हम अपने आपको सुधार लें। यह मौक़ा अनमोल है, इसे गँवाना नहीं चाहिए। क़ुरआन का यह पैग़ाम हमें जगाता है कि आज का फ़ैसला हमारे हाथ में है — या तो हम अल्लाह की रहमत के साये में आ जाएँ, या फिर उस आग की तरफ़ जाने का रास्ता चुनें। अल्लाह हमें सीधी राह दिखाए और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचाए। आमीन।



📜 आयत 27-31 — अल-मुरसलात

27وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ شَامِخَاتٍ وَأَسْقَيْنَاكُم مَّاءً فُرَاتًا
और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया
28وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
29انطَلِقُوا إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो
30انطَلِقُوا إِلَىٰ ظِلٍّ ذِي ثَلَاثِ شُعَبٍ
(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं
31لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِي مِنَ اللَّهَبِ
जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा
अल-मुरसलातकुरान सूची
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अनुवाद — अल-मुरसलात 29

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Tuesday, August 18, 2026

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