अन-नाज़ियात · 19/46
अनुवाद उच्चारण — अन-नाज़ियात
وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ ۝١٩
Wa ahdi yaka ila rabbika fatakh sha
📖 हिंदी अर्थ
और मैं तुझे तेरे परवरदिगार की राह बता दूँ तो तुझको ख़ौफ (पैदा) हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَهْدِيَكَ – मैं तुम्हें रास्ता दिखाऊँ / मार्गदर्शन करूँ
  • إِلَىٰ رَبِّكَ – तुम्हारे रब की ओर
  • فَتَخْشَىٰ – तो तुम उसका डर रखो (उसके प्रति भय और सम्मान पैदा हो)

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को पवित्र घाटी 'तुवा' में पुकारा और उन्हें फ़िरऔन के पास जाने का आदेश दिया, जो अपनी सरकशी और ज़ुल्म में हद से गुज़र चुका था। अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को यह तरीक़ा सिखाया कि वे फ़िरऔन से नरमी और हिकमत के साथ बात करें और उससे कहें: "क्या तू चाहता है कि तू अपनी बुराइयों और कमियों से पाक हो जाए? क्या तू चाहता है कि मैं तुझे तेरे रब की ओर मार्गदर्शन करूँ, ताकि तू उसकी इबादत करे, उसके अहकाम को माने और उसके अज़ाब से डरकर अपने आपको बचाए?"

यानी मूसा (अलैहिस्सलाम) फ़िरऔन को दो चीज़ों की दावत दे रहे थे: पहला—तज़्किया (आत्म-शुद्धि) और दूसरा—हिदायत (मार्गदर्शन)। तज़्किया यानी अपने दिल को शिर्क, ग़ुरूर और बुराइयों से पाक करना, और हिदायत यानी अल्लाह की पहचान और उसकी इबादत का रास्ता अपनाना। जब इंसान को अपने रब की सच्ची पहचान हो जाती है, तो उसके दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ (डर) पैदा होता है, और यही ख़ौफ़ उसे नेक कामों की तरफ़ ले जाता है और गुनाहों से रोकता है।

यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखा रहे हैं कि दावत और नसीहत का सही तरीक़ा यही है—पहले इंसान को पाकीज़गी की तरफ़ बुलाओ, फिर उसे अल्लाह की पहचान कराओ, और जब दिल में अल्लाह का डर पैदा हो जाए, तो वह अपने आप ही सीधे रास्ते पर चलने लगता है। यही वह नुस्ख़ा है जो हर दौर में इंसानों की इस्लाह (सुधार) का ज़रिया बना है।

आज भी जब हम किसी को अल्लाह की तरफ़ बुलाते हैं, तो हमें उसी अंदाज़ में बात करनी चाहिए—मुहब्बत और शफ़्क़त के साथ, उसे बुराइयों से पाक होने की तरग़ीब देनी चाहिए, और उसे अल्लाह की ज़ात, उसकी क़ुदरत और उसके हिसाब की याद दिलानी चाहिए। जब दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा हो जाता है, तो इंसान अपने आप ही गुनाहों से बचता है और नेकियों की तरफ़ बढ़ता है। यही वह कामयाबी है जो अल्लाह ने अपने नबियों के ज़रिए इंसानों को देनी चाही।

🎧 सुनें

📜 आयत 17-21 — अन-नाज़ियात

17اذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَىٰ
कि फिरऔन के पास जाओ वह सरकश हो गया है
18فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰ أَن تَزَكَّىٰ
(और उससे) कहो कि क्या तेरी ख्वाहिश है कि (कुफ्र से) पाक हो जाए
19وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ
और मैं तुझे तेरे परवरदिगार की राह बता दूँ तो तुझको ख़ौफ (पैदा) हो
20فَأَرَاهُ الْآيَةَ الْكُبْرَىٰ
ग़रज़ मूसा ने उसे (असा का बड़ा) मौजिज़ा दिखाया
21فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ
तो उसने झुठला दिया और न माना
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19आयत

अनुवाद — अन-नाज़ियात 19

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Tuesday, August 18, 2026

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