अल-अनफाल · 39/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
وَقَاتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ الدِّينُ كُلُّهُ لِلَّهِ ۚ فَإِنِ انتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ بِمَا يَعْمَلُونَ بَصِيرٌ ۝٣٩
Wa qaatiloohum hattaa laa takoona fitnatunw wa yakoonaddeenu kulluhoo lillaah; fainin tahaw fa innallaaha bimaa ya`maloona Baseer
📖 हिंदी अर्थ
मुसलमानों काफ़िरों से लड़े जाओ यहाँ तक कि कोई फसाद (बाक़ी) न रहे और (बिल्कुल सारी ख़ुदाई में) ख़ुदा की दीन ही दीन हो जाए फिर अगर ये लोग (फ़साद से) न बाज़ आएं तो ख़ुदा उनकी कारवाइयों को ख़ूब देखता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • फ़ित्ना: यहाँ इसका अर्थ शिर्क (बहुदेववाद) और अल्लाह के मार्ग से रोकना है।
  • दीन कुल्लुहु लिल्लाह: पूरा धर्म, आज्ञाकारिता और इबादत केवल अल्लाह के लिए हो।

तफ़सीर:

ऐ ईमानवालों! तुम मुशरिकों से युद्ध करते रहो, यहाँ तक कि शिर्क और अल्लाह के मार्ग से रोकने वाली फ़ित्ना (उत्पीड़न) समाप्त हो जाए, और पूरा धर्म, आज्ञाकारिता और इबादत केवल अल्लाह ही के लिए हो जाए, उसमें किसी का साझा न हो। अर्थात् यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक लोगों को धर्म की आज़ादी न मिल जाए और वे अपनी इच्छा से अल्लाह की इबादत कर सकें। यह लड़ाई किसी व्यक्ति या समूह से दुश्मनी के कारण नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ज़मीन पर अल्लाह का क़ानून लागू करना और बंदों को उत्पीड़न से मुक्त कराना है।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: यदि ये काफ़िर अपने शिर्क और रोकने के काम से बाज़ आ जाएँ, और तुम्हारे साथ मिलकर सत्य धर्म अपना लें, तो उन्हें छोड़ दो और उनसे लड़ाई मत करो। क्योंकि अल्लाह उनके सभी कर्मों को देख रहा है — चाहे वे कुफ़्र छोड़कर इस्लाम में दाख़िल हों या अपनी पिछली हालत पर रहें — वह सब कुछ जानता है और हर एक को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा। अल्लाह की निगाह से कोई चीज़ छिपी नहीं है, और वह हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब रखने वाला है।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम में जिहाद का उद्देश्य केवल अल्लाह का कलाम (शब्द) बुलंद करना और लोगों को शिर्क व उत्पीड़न से आज़ाद कराना है, न कि ज़मीन हासिल करना या लोगों को ज़बरदस्ती मुसलमान बनाना।
  2. इस्लाम धर्म की आज़ादी देता है — जब लोग अपनी मर्ज़ी से सत्य को अपना लें, तो उन्हें छोड़ देना चाहिए, उनसे बदला लेना इस्लाम का तरीक़ा नहीं।
  3. अल्लाह हर कर्म का देखने वाला और हिसाब लेने वाला है — यह विश्वास इंसान को अच्छे कामों की ओर प्रेरित करता है और बुरे कामों से रोकता है।
  4. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि उनका संघर्ष नेक नीयत और खालिस अल्लाह की रज़ा के लिए होना चाहिए, किसी दुनियावी मतलब या व्यक्तिगत दुश्मनी के लिए नहीं।
🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — अल-अनफाल

37لِيَمِيزَ اللَّهُ الْخَبِيثَ مِنَ الطَّيِّبِ وَيَجْعَلَ الْخَبِيثَ بَعْضَهُ عَلَىٰ بَعْضٍ فَيَرْكُمَهُ جَمِيعًا فَيَجْعَلَهُ فِي جَهَنَّمَ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
ताकि ख़ुदा पाक को नापाक से जुदा कर दे और नापाक लोगों को एक दूसरे पर रखके ढेर बनाए फिर सब को जहन्नुम में झोंक दे यही लोग घाटा उठाने वाले हैं
38قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا إِن يَنتَهُوا يُغْفَرْ لَهُم مَّا قَدْ سَلَفَ وَإِن يَعُودُوا فَقَدْ مَضَتْ سُنَّتُ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) तुम काफिरों से कह दो कि अगर वह लोग (अब भी अपनी शरारत से) बाज़ रहें तो उनके पिछले कुसूर माफ कर दिए जाएं और अगर फिर कहीं पलटें तो यक़ीनन अगलों के तरीक़े गुज़र चुके जो, उनकी सज़ा हुई वही इनकी भी होगी
39وَقَاتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ الدِّينُ كُلُّهُ لِلَّهِ ۚ فَإِنِ انتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ بِمَا يَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
मुसलमानों काफ़िरों से लड़े जाओ यहाँ तक कि कोई फसाद (बाक़ी) न रहे और (बिल्कुल सारी ख़ुदाई में) ख़ुदा की दीन ही दीन हो जाए फिर अगर ये लोग (फ़साद से) न बाज़ आएं तो ख़ुदा उनकी कारवाइयों को ख़ूब देखता है
40وَإِن تَوَلَّوْا فَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ مَوْلَاكُمْ ۚ نِعْمَ الْمَوْلَىٰ وَنِعْمَ النَّصِيرُ
और अगर सरताबी करें तो (मुसलमानों) समझ लो कि ख़ुदा यक़ीनी तुम्हारा मालिक है और वह क्या अच्छा मालिक है और क्या अच्छा मददगार है
41۞ وَاعْلَمُوا أَنَّمَا غَنِمْتُم مِّن شَيْءٍ فَأَنَّ لِلَّهِ خُمُسَهُ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينِ وَابْنِ السَّبِيلِ إِن كُنتُمْ آمَنتُم بِاللَّهِ وَمَا أَنزَلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا يَوْمَ الْفُرْقَانِ يَوْمَ الْتَقَى الْجَمْعَانِ ۗ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और जान लो कि जो कुछ तुम (माल लड़कर) लूटो तो उनमें का पॉचवॉ हिस्सा मख़सूस ख़ुदा और रसूल और (रसूल के) क़राबतदारों और यतीमों और मिस्कीनों और परदेसियों का है अगर तुम ख़ुदा पर और उस (ग़ैबी इमदाद) पर ईमान ला चुके हो जो हमने ख़ास बन्दे (मोहम्मद) पर फ़ैसले के दिन (जंग बदर में) नाज़िल की थी जिस दिन (मुसलमानों और काफिरों की) दो जमाअतें बाहम गुथ गयी थी और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
39आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 39

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Tuesday, August 18, 2026

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