अल-अनफाल · 54/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
كَدَأْبِ آلِ فِرْعَوْنَ ۙ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ فَأَهْلَكْنَاهُم بِذُنُوبِهِمْ وَأَغْرَقْنَا آلَ فِرْعَوْنَ ۚ وَكُلٌّ كَانُوا ظَالِمِينَ ۝٥٤
Kadaabi Aali Fir`awna wallazeena min qablihim; kazzaboo bi Aayaati Rabbihim faahlaknaahum bizunoobihim wa aghraqnaa Aala Fir`awn; wa kullun kaanoo zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
(उन लोगों की हालत) क़ौम फिरऔन और उन लोगों की सी है जो उनसे पहले थे और अपने परवरदिगार की आयतों को झुठलाते थे तो हमने भी उनके गुनाहों की वजह से उनको हलाक़ कर डाला और फिरऔन की क़ौम को डुबा मारा और (ये) सब के सब ज़ालिम थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَدَأْبِ: उनके तरीके और हालत की तरह, यानी उनके कर्मों के समान।
  • آلِ فِرْعَوْنَ: फ़िरऔन की क़ौम, उसके साथी और उसकी सरकार के लोग।
  • بِذُنُوبِهِمْ: अपने गुनाहों की वजह से, यानी अपने कुकर्मों के कारण।
  • أَغْرَقْنَا: हमने डुबो दिया (पानी में ग़र्क़ कर दिया)।
  • ظَالِمِينَ: अत्याचारी, ज़ालिम, यानी जिन्होंने हक़ को छोड़कर बातिल को अपनाया और हद से आगे बढ़ गए।

तफ़सीर (व्याख्या):

इन काफ़िरों का हाल बिल्कुल फ़िरऔन की क़ौम और उनसे पहले की उन उम्मतों जैसा है जिन्होंने अपने रब के भेजे हुए रसूलों को झुठलाया और उनकी आयतों (निशानियों) को नहीं माना। जब उन्होंने यह ज़ुल्म और सरकशी की तो अल्लाह ने उन्हें उन्हीं के गुनाहों की सज़ा में हलाक कर दिया। फ़िरऔन की क़ौम को तो उसने समुद्र में डुबोकर तबाह कर दिया। याद रखो कि ये सब — चाहे पहले के लोग हों या बाद के — ज़ालिम थे, क्योंकि उन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, उसकी निशानियों को झुठलाया और उसके सिवा दूसरों की इबादत की। उनका अंजाम उनके अपने किए की सज़ा थी, और अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) यही है कि ज़ालिम कभी बच नहीं सकता।


फ़ायदे (सबक़ और नसीहत):

  1. अल्लाह का क़ानून अटल है — जो उसके रसूलों को झुठलाता है और उसकी आयतों से मुँह मोड़ता है, उसे देर-सबेर अपने किए की सज़ा भुगतनी पड़ती है। यह सिर्फ़ पुरानी उम्मतों के लिए नहीं, बल्कि हर ज़माने के लिए है।
  2. गुनाहों का अंजाम बहुत भयानक होता है — चाहे इंसान कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकता। फ़िरऔन जैसी सल्तनत भी पानी में डूब गई।
  3. यह आयत हमें डराती है कि कहीं हम भी उन लोगों की तरह न बन जाएँ जो हक़ को जानकर भी उसे नहीं मानते। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह की आयतों पर अमल करे और अपने गुनाहों से तौबा करे।
  4. अल्लाह की रहमत और अदल दोनों बड़े हैं — वह मोमिनों पर रहम करता है और ज़ालिमों को उनके ज़ुल्म की सज़ा देता है। यही उसकी हिकमत है, और इसी में बंदों की भलाई है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि इतिहास से सबक़ लेना चाहिए — पुरानी उम्मतों के हालात पढ़कर हमें अपने आचरण को सुधारना चाहिए, ताकि हम उनके अंजाम से बच सकें और अल्लाह की रहमत के हक़दार बन सकें।


📜 आयत 52-56 — अल-अनफाल

52كَدَأْبِ آلِ فِرْعَوْنَ ۙ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ قَوِيٌّ شَدِيدُ الْعِقَابِ
(उन लोगों की हालत) क़ौमे फिरऔन और उनके लोगों की सी है जो उन से पहले थे और ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते थे तो ख़ुदा ने भी उनके गुनाहों की वजह से उन्हें ले डाला बेशक ख़ुदा ज़बरदस्त और बहुत सख्त अज़ाब देने वाला है
53ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ لَمْ يَكُ مُغَيِّرًا نِّعْمَةً أَنْعَمَهَا عَلَىٰ قَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ ۙ وَأَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
ये सज़ा इस वजह से (दी गई) कि जब कोई नेअमत ख़ुदा किसी क़ौम को देता है तो जब तक कि वह लोग ख़ुद अपनी कलबी हालत (न) बदलें ख़ुदा भी उसे नहीं बदलेगा और ख़ुदा तो यक़ीनी (सब की सुनता) और सब कुछ जानता है
54كَدَأْبِ آلِ فِرْعَوْنَ ۙ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ فَأَهْلَكْنَاهُم بِذُنُوبِهِمْ وَأَغْرَقْنَا آلَ فِرْعَوْنَ ۚ وَكُلٌّ كَانُوا ظَالِمِينَ
(उन लोगों की हालत) क़ौम फिरऔन और उन लोगों की सी है जो उनसे पहले थे और अपने परवरदिगार की आयतों को झुठलाते थे तो हमने भी उनके गुनाहों की वजह से उनको हलाक़ कर डाला और फिरऔन की क़ौम को डुबा मारा और (ये) सब के सब ज़ालिम थे
55إِنَّ شَرَّ الدَّوَابِّ عِندَ اللَّهِ الَّذِينَ كَفَرُوا فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा के नज़दीक जानवरों में कुफ्फ़ार सबसे बदतरीन तो (बावजूद इसके) फिर ईमान नहीं लाते
56الَّذِينَ عَاهَدتَّ مِنْهُمْ ثُمَّ يَنقُضُونَ عَهْدَهُمْ فِي كُلِّ مَرَّةٍ وَهُمْ لَا يَتَّقُونَ
ऐ रसूल जिन लोगों से तुम ने एहद व पैमान किया था फिर वह लोग अपने एहद को हर बार तोड़ डालते है और (फिर ख़ुदा से) नहीं डरते
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
54आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 54

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Tuesday, August 18, 2026

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