अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَمْ يَكُ مُغَيِّرًا نِّعْمَةً: किसी क़ौम पर की गई नेअमत (इनाम) को सैलब (छीन) नहीं करता।
- حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ: जब तक कि वे स्वयं अपनी उस अवस्था को न बदल दें जो उनके दिलों और आत्माओं में है।
- سَمِيعٌ عَلِيمٌ: सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ जानने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस भयानक अज़ाब और सज़ा की ओर इशारा करती है जो अल्लाह ने पिछली क़ौमों पर नाज़िल की, और यह बताती है कि यह सज़ा उनके अपने कर्मों का परिणाम थी। अल्लाह तआला अपने बंदों पर जो नेअमतें नाज़िल करता है, उन्हें तब तक नहीं छीनता जब तक कि वे लोग स्वयं अपनी हालत न बदल लें। यानी जब कोई क़ौम ईमान, नेकी, शुक्र और अच्छे आचरण की स्थिति में होती है, तो अल्लाह उस पर अपनी रहमतें बरसाता है। लेकिन जब वही क़ौम कुफ़्र, नाफ़रमानी, गुनाह और नेअमतों की नाशुक्री की ओर मुड़ जाती है, तो अल्लाह उसकी नेअमतों को सज़ा और अज़ाब में बदल देता है। यह अल्लाह का सुन्नत (क़ानून) है जो कभी नहीं बदलता। अल्लाह अपने बंदों की हर बात सुनता है और उनके हर अमल से पूरी तरह वाक़िफ़ है, चाहे वह ज़ाहिर हो या छिपा। वह अपने इल्म और हिकमत के मुताबिक़ उनके साथ वैसा ही सलूक करता है जैसा वे स्वयं अपने कर्मों से माँगते हैं।
फ़ायदे (उपदेश):
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेअमतें हमेशा क़ायम नहीं रहतीं; उनका बने रहना हमारे शुक्र और नेक अमल पर निर्भर करता है। जब हम नाशुक्री और गुनाह में मुब्तिला हो जाते हैं, तो नेअमतें हमसे छिन जाती हैं।
- यह हमें आत्म-निरीक्षण की तरफ़ बुलाती है कि हम अपने दिलों और आचरण को सुधारें, क्योंकि तब्दीली हमारे अपने हाथों में है। अगर हम अपनी हालत बदलेंगे, तो अल्लाह भी हमारी हालत बेहतर करेगा।
- यह आयत हमें अल्लाह की सुनने और जानने की सिफ़ात की याद दिलाती है, जिससे हमें अपनी ज़ुबान और अपने अमल पर पहरा देना चाहिए, क्योंकि हमारा हर क़ौल और हर फ़ेल अल्लाह के इल्म में है।
- यह हमें यह भी सिखाती है कि मुसीबतें और तकलीफ़ें अक्सर हमारे अपने कर्मों का नतीजा होती हैं, इसलिए बेहतरी के लिए हमें अपने अंदर सुधार लाना चाहिए, न कि केवल शिकायत करनी चाहिए।
- यह आयत मुसलमानों को शुक्रगुज़ार बनाती है और उन्हें अल्लाह की नेअमतों की क़द्र करने की तरग़ीब देती है, ताकि वे नेअमतों के बने रहने के हक़दार बनें।
📜 आयत 51-55 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 53
सूरा अल-अनफाल आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये सज़ा इस वजह से (दी गई) कि जब कोई…सूरा आयत 53/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








