अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- شَرّ الدَّوَابِّ: सबसे बुरे जीव-जंतु / चलने-फिरने वाले प्राणियों में सबसे बुरे।
- عِندَ اللّهِ: अल्लाह की दृष्टि में।
- كَفَرُوا: जिन्होंने कुफ्र (अविश्वास) किया।
- لَا يُؤْمِنُونَ: वे ईमान नहीं लाते।
व्याख्या:
यह आयत बताती है कि अल्लाह तआला की दृष्टि में धरती पर चलने-फिरने वाले सभी प्राणियों में सबसे बुरे वे लोग हैं जिन्होंने कुफ्र किया और कुफ्र पर ही अड़े रहे। उन्होंने अल्लाह की एकता को नहीं माना, उसके रसूलों को झुठलाया और उसके दीन (धर्म) को नहीं अपनाया। वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी ज़िद और हठधर्मी के कारण ईमान लाने का रास्ता हमेशा के लिए बंद कर लिया। उनके पास चाहे कितनी भी निशानियाँ और सबूत आ जाएँ, वे ईमान नहीं लाएँगे, क्योंकि उन्होंने अपनी अक्ल, सुनने और देखने की शक्तियों को हिदायत (मार्गदर्शन) के लिए बेकार कर दिया है। उनके दिलों पर मुहर लग चुकी है, इसलिए उनसे ईमान की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह उनका अपना चुना हुआ रास्ता है, जिसके कारण वे अल्लाह के यहाँ सबसे बुरे प्राणी ठहरे।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह के यहाँ इंसान की इज़्ज़त उसके ईमान और अच्छे आचरण पर निर्भर है, न कि उसकी जात, रंग या दौलत पर। जो ईमान से वंचित है, वह अल्लाह की नज़र में सबसे बुरा है।
- यह आयत हमें ईमान की अहमियत समझाती है और बताती है कि कुफ्र पर अड़े रहना इंसान को सबसे निचले दर्जे पर ले जाता है।
- इंसान को चाहिए कि वह अपनी अक्ल, सुनने और देखने की शक्तियों का इस्तेमाल सही रास्ते पर चलने के लिए करे, न कि उन्हें गलत कामों में लगाए।
- यह आयत हमें अल्लाह के दीन को अपनाने की तरग़ीब देती है और बताती है कि ईमान ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के यहाँ बुलंदी देती है।
- मुसलमान को चाहिए कि वह अपने ईमान की हिफ़ाज़त करे और उसे मज़बूत करता रहे, ताकि वह अल्लाह की नज़र में उन बुरे लोगों में से न हो।
📜 आयत 53-57 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 55
सूरा अल-अनफाल आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा के नज़दीक जानवरों में कुफ्फ़ार…सूरा आयत 55/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








