अल-अनफाल · 55/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
إِنَّ شَرَّ الدَّوَابِّ عِندَ اللَّهِ الَّذِينَ كَفَرُوا فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ ۝٥٥
Inna sharrad dawaaabbi `indal laahil lazeena kafaroo fahum laa yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा के नज़दीक जानवरों में कुफ्फ़ार सबसे बदतरीन तो (बावजूद इसके) फिर ईमान नहीं लाते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شَرّ الدَّوَابِّ: सबसे बुरे जीव-जंतु / चलने-फिरने वाले प्राणियों में सबसे बुरे।
  • عِندَ اللّهِ: अल्लाह की दृष्टि में।
  • كَفَرُوا: जिन्होंने कुफ्र (अविश्वास) किया।
  • لَا يُؤْمِنُونَ: वे ईमान नहीं लाते।

व्याख्या:

यह आयत बताती है कि अल्लाह तआला की दृष्टि में धरती पर चलने-फिरने वाले सभी प्राणियों में सबसे बुरे वे लोग हैं जिन्होंने कुफ्र किया और कुफ्र पर ही अड़े रहे। उन्होंने अल्लाह की एकता को नहीं माना, उसके रसूलों को झुठलाया और उसके दीन (धर्म) को नहीं अपनाया। वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी ज़िद और हठधर्मी के कारण ईमान लाने का रास्ता हमेशा के लिए बंद कर लिया। उनके पास चाहे कितनी भी निशानियाँ और सबूत आ जाएँ, वे ईमान नहीं लाएँगे, क्योंकि उन्होंने अपनी अक्ल, सुनने और देखने की शक्तियों को हिदायत (मार्गदर्शन) के लिए बेकार कर दिया है। उनके दिलों पर मुहर लग चुकी है, इसलिए उनसे ईमान की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह उनका अपना चुना हुआ रास्ता है, जिसके कारण वे अल्लाह के यहाँ सबसे बुरे प्राणी ठहरे।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह के यहाँ इंसान की इज़्ज़त उसके ईमान और अच्छे आचरण पर निर्भर है, न कि उसकी जात, रंग या दौलत पर। जो ईमान से वंचित है, वह अल्लाह की नज़र में सबसे बुरा है।
  2. यह आयत हमें ईमान की अहमियत समझाती है और बताती है कि कुफ्र पर अड़े रहना इंसान को सबसे निचले दर्जे पर ले जाता है।
  3. इंसान को चाहिए कि वह अपनी अक्ल, सुनने और देखने की शक्तियों का इस्तेमाल सही रास्ते पर चलने के लिए करे, न कि उन्हें गलत कामों में लगाए।
  4. यह आयत हमें अल्लाह के दीन को अपनाने की तरग़ीब देती है और बताती है कि ईमान ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के यहाँ बुलंदी देती है।
  5. मुसलमान को चाहिए कि वह अपने ईमान की हिफ़ाज़त करे और उसे मज़बूत करता रहे, ताकि वह अल्लाह की नज़र में उन बुरे लोगों में से न हो।
🎧 सुनें

📜 आयत 53-57 — अल-अनफाल

53ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ لَمْ يَكُ مُغَيِّرًا نِّعْمَةً أَنْعَمَهَا عَلَىٰ قَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ ۙ وَأَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
ये सज़ा इस वजह से (दी गई) कि जब कोई नेअमत ख़ुदा किसी क़ौम को देता है तो जब तक कि वह लोग ख़ुद अपनी कलबी हालत (न) बदलें ख़ुदा भी उसे नहीं बदलेगा और ख़ुदा तो यक़ीनी (सब की सुनता) और सब कुछ जानता है
54كَدَأْبِ آلِ فِرْعَوْنَ ۙ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ فَأَهْلَكْنَاهُم بِذُنُوبِهِمْ وَأَغْرَقْنَا آلَ فِرْعَوْنَ ۚ وَكُلٌّ كَانُوا ظَالِمِينَ
(उन लोगों की हालत) क़ौम फिरऔन और उन लोगों की सी है जो उनसे पहले थे और अपने परवरदिगार की आयतों को झुठलाते थे तो हमने भी उनके गुनाहों की वजह से उनको हलाक़ कर डाला और फिरऔन की क़ौम को डुबा मारा और (ये) सब के सब ज़ालिम थे
55إِنَّ شَرَّ الدَّوَابِّ عِندَ اللَّهِ الَّذِينَ كَفَرُوا فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा के नज़दीक जानवरों में कुफ्फ़ार सबसे बदतरीन तो (बावजूद इसके) फिर ईमान नहीं लाते
56الَّذِينَ عَاهَدتَّ مِنْهُمْ ثُمَّ يَنقُضُونَ عَهْدَهُمْ فِي كُلِّ مَرَّةٍ وَهُمْ لَا يَتَّقُونَ
ऐ रसूल जिन लोगों से तुम ने एहद व पैमान किया था फिर वह लोग अपने एहद को हर बार तोड़ डालते है और (फिर ख़ुदा से) नहीं डरते
57فَإِمَّا تَثْقَفَنَّهُمْ فِي الْحَرْبِ فَشَرِّدْ بِهِم مَّنْ خَلْفَهُمْ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَ
तो अगर वह लड़ाई में तुम्हारे हाथे चढ़ जाएँ तो (ऐसी सख्त गोश्माली दो कि) उनके साथ साथ उन लोगों का तो अगर वह लड़ाई में तुम्हारे हत्थे चढ़ जाएं तो (ऐसी सजा दो की) उनके साथ उन लोगों को भी तितिर बितिर कर दो जो उन के पुश्त पर हो ताकि ये इबरत हासिल करें
अल-अनफालकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अनफाल 55

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सूरा आयत 55/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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