अल-अनफाल · 65/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى الْقِتَالِ ۚ إِن يَكُن مِّنكُمْ عِشْرُونَ صَابِرُونَ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ يَغْلِبُوا أَلْفًا مِّنَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ ۝٦٥
Yaaa aiyuhan Nabiyyu harridil mu`mineena `alal qitaal; iny-yakum minkum `ishroona saabiroona yaghliboo mi`atayn; wa iny-yakum minkum min`atuny yaghlibooo alfam minal lazeena kafaroo bi anahum qawmul laa yafqahoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल तुम मोमिनीन को जिहाद के वास्ते आमादा करो (वह घबराए नहीं ख़ुदा उनसे वायदा करता है कि) अगर तुम लोगों में के साबित क़दम रहने वाले बीस भी होगें तो वह दो सौ (काफिरों) पर ग़ालिब आ जायेगे और अगर तुम लोगों में से साबित कदम रहने वालों सौ होगें तो हज़ार (काफिरों) पर ग़ालिब आ जाएँगें इस सबब से कि ये लोग ना समझ हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَرِّضْ (हर्रिज़): उकसाओ, प्रोत्साहित करो, जोश दिलाओ।
  • صَابِرُونَ (साबिरून): धैर्यवान, स्थिर रहने वाले, जो युद्ध के समय डटे रहें।
  • يَغْلِبُوا (यग़लिबू): वे ग़ालिब आएँगे, वे पराजित कर देंगे।
  • لَا يَفْقَهُونَ (ला यफ़्क़हून): वे समझ नहीं रखते, उन्हें सत्य का ज्ञान नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप मोमिनों को युद्ध के लिए उकसाएँ और उनके दिलों में जोश पैदा करें। उन्हें यह बताएँ कि जब वे अल्लाह के रास्ते में लड़ने के लिए निकलें, तो उन्हें डरना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह उनके साथ है। फिर अल्लाह तआला मोमिनों को एक अद्भुत आश्वासन देता है: यदि तुममें से बीस धैर्यवान लोग हों, तो वे दो सौ काफ़िरों पर ग़ालिब आएँगे। और यदि तुममें से सौ धैर्यवान लोग हों, तो वे हज़ार काफ़िरों को हरा देंगे।

यह बात इसलिए है कि काफ़िर लोग समझ नहीं रखते। वे न तो अल्लाह के दीन (धर्म) की सच्चाई को समझते हैं, और न ही उन्हें यह मालूम है कि अल्लाह अपने मोमिन बंदों की किस तरह मदद करता है और उन्हें विजय प्रदान करता है। वे केवल दुनिया की चीज़ों के लिए लड़ते हैं — ज़मीन, माल, और बड़ाई के लिए। जबकि मोमिन लड़ते हैं अल्लाह की रज़ा (खुशी) के लिए, अपने दीन की हिफ़ाज़त (रक्षा) के लिए, और सच्चाई को बुलंद करने के लिए। यही वजह है कि उनके दिलों में अल्लाह का डर और उस पर भरोसा होता है, जिससे उन्हें ऐसी ताक़त मिलती है जो तादाद (संख्या) से कहीं बढ़कर होती है।

यह आयत मोमिनों को सिखाती है कि जीत की असली कुंजी तादाद नहीं, बल्कि सब्र (धैर्य), अल्लाह पर भरोसा, और सच्चे इरादे हैं। जब दिल अल्लाह से जुड़ा होता है, तो अल्लाह उसे ऐसी मदद देता है जो दुनिया की तमाम ताक़तों से बढ़कर होती है।


फ़ायदे (लाभ और सबक):

  1. अल्लाह पर भरोसे की ताक़त: यह आयत हमें सिखाती है कि अगर हम सच्चे दिल से अल्लाह पर भरोसा करें और उसके दीन के लिए काम करें, तो अल्लाह हमें ऐसी ताक़त देता है जो दुनिया की तमाम ताक़तों से बढ़कर है। तादाद कभी भी भरोसे का विकल्प नहीं बन सकती।
  2. सब्र की अहमियत: युद्ध के मैदान में और ज़िंदगी के हर मैदान में सब्र (धैर्य) सबसे बड़ी ताक़त है। जो लोग सब्र करते हैं, वे मुश्किल से मुश्किल हालात में भी कामयाब होते हैं।
  3. मोमिन का नज़रिया: मोमिन की लड़ाई दुनिया के लिए नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और सच्चाई की बुलंदी के लिए होती है। यही नज़रिया उसे बाक़ी लोगों से अलग करता है और उसे फ़तह (विजय) दिलाता है।
  4. काफ़िरों की कमज़ोरी: काफ़िरों की तादाद चाहे कितनी भी बड़ी हो, उनके पास वह समझ और यक़ीन नहीं होता जो मोमिनों के पास होता है। इसलिए उनकी ताक़त सिर्फ़ ज़ाहिरी होती है, जबकि मोमिन की ताक़त अल्लाह से जुड़ी होती है।
  5. जोश और हौसला: यह आयत हर मोमिन को यह सिखाती है कि वह कभी हिम्मत न हारे। चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों, अल्लाह की मदद उसके साथ है। बस उसे सब्र और यक़ीन के साथ डटे रहना है।
🎧 सुनें

📜 आयत 63-67 — अल-अनफाल

63وَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ ۚ لَوْ أَنفَقْتَ مَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مَّا أَلَّفْتَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ أَلَّفَ بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और उसी ने उन मुसलमानों के दिलों में बाहम ऐसी उलफ़त पैदा कर दी कि अगर तुम जो कुछ ज़मीन में है सब का सब खर्च कर डालते तो भी उनके दिलो में ऐसी उलफ़त पैदा न कर सकते मगर ख़ुदा ही था जिसने बाहम उलफत पैदा की बेशक वह ज़बरदस्त हिक़मत वाला है
64يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَسْبُكَ اللَّهُ وَمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
ऐ रसूल तुमको बस ख़ुदा और जो मोमिनीन तुम्हारे ताबेए फरमान (फरमाबरदार) है काफी है
65يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى الْقِتَالِ ۚ إِن يَكُن مِّنكُمْ عِشْرُونَ صَابِرُونَ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ يَغْلِبُوا أَلْفًا مِّنَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ
ऐ रसूल तुम मोमिनीन को जिहाद के वास्ते आमादा करो (वह घबराए नहीं ख़ुदा उनसे वायदा करता है कि) अगर तुम लोगों में के साबित क़दम रहने वाले बीस भी होगें तो वह दो सौ (काफिरों) पर ग़ालिब आ जायेगे और अगर तुम लोगों में से साबित कदम रहने वालों सौ होगें तो हज़ार (काफिरों) पर ग़ालिब आ जाएँगें इस सबब से कि ये लोग ना समझ हैं
66الْآنَ خَفَّفَ اللَّهُ عَنكُمْ وَعَلِمَ أَنَّ فِيكُمْ ضَعْفًا ۚ فَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ صَابِرَةٌ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُمْ أَلْفٌ يَغْلِبُوا أَلْفَيْنِ بِإِذْنِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ مَعَ الصَّابِرِينَ
अब ख़ुदा ने तुम से (अपने हुक्म की सख्ती में) तख्फ़ीफ (कमी) कर दी और देख लिया कि तुम में यक़ीनन कमज़ोरी है तो अगर तुम लोगों में से साबित क़दम रहने वाले सौ होगें तो दो सौ (काफ़िरों) पर ग़ालिब रहेंगें और अगर तुम लोगों में से (ऐसे) एक हज़ार होगें तो ख़ुदा के हुक्म से दो हज़ार (काफ़िरों) पर ग़ालिब रहेंगे और (जंग की तकलीफों को) झेल जाने वालों का ख़ुदा साथी है
67مَا كَانَ لِنَبِيٍّ أَن يَكُونَ لَهُ أَسْرَىٰ حَتَّىٰ يُثْخِنَ فِي الْأَرْضِ ۚ تُرِيدُونَ عَرَضَ الدُّنْيَا وَاللَّهُ يُرِيدُ الْآخِرَةَ ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
कोई नबी जब कि रूए ज़मीन पर (काफिरों का) खून न बहाए उसके यहाँ कैदियों का रहना मुनासिब नहीं तुम लोग तो दुनिया के साज़ो सामान के ख्वाहॉ (चाहने वाले) हो औॅर ख़ुदा (तुम्हारे लिए) आख़िरत की (भलाई) का ख्वाहॉ है और ख़ुदा ज़बरदस्त हिकमत वाला है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
65आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 65

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सूरा आयत 65/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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