अल-अनफाल · 64/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَسْبُكَ اللَّهُ وَمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ ۝٦٤
Yaaa aiyuhan Nabiyyu hasbukal laahu wa manittaba `aka minal mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल तुमको बस ख़ुदा और जो मोमिनीन तुम्हारे ताबेए फरमान (फरमाबरदार) है काफी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَسْبُكَ: तुम्हारे लिए काफी है, तुम्हारे लिए पर्याप्त है।
  • اتَّبَعَكَ: जिसने तुम्हारा अनुसरण किया, तुम्हारी پیروی की।
  • الْمُؤْمِنِينَ: ईमानवाले, सच्चे विश्वासी।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! तुम्हारे लिए अल्लाह ही काफी है, वह तुम्हारी हिफ़ाज़त करने वाला और तुम्हारे दुश्मनों के मुकाबले में तुम्हारा सहायक है। और जो मोमिनीन तुम्हारे साथ हैं, उनके लिए भी अल्लाह ही काफी है। यह आयत उस समय नाज़िल हुई जब मुसलमानों को दुश्मनों के मुकाबले में कमज़ोरी और डर महसूस हुआ, ख़ासकर बद्र की जंग के मौके पर। अल्लाह ने अपने नबी और मोमिनीन को तसल्ली दी कि तुम अकेले नहीं हो, अल्लाह तुम्हारे साथ है, और वही तुम्हारे लिए काफी है। तुम्हें किसी इंसानी मदद की ज़रूरत नहीं, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखो और उसी पर तवक्कुल करो। यह एक ऐसा वादा है जो अल्लाह ने अपने नबी और ईमानवालों से किया, कि वह उन्हें दुश्मनों के शर से बचाएगा और उनकी मदद करेगा।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह पर भरोसा (तवक्कुल) ही असली ताकत है। जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसके लिए काफी हो जाता है और उसे किसी और की ज़रूरत नहीं रहती।
  2. यह आयत मोमिनीन को हिम्मत और हौसला देती है कि वे कभी कमज़ोर न महसूस करें, चाहे दुश्मन कितने भी ताकतवर क्यों न हों, क्योंकि अल्लाह उनके साथ है।
  3. अल्लाह का वादा सच्चा है, और वह अपने नबी और ईमानवालों की हिफ़ाज़त करता है। इसलिए मोमिन को चाहिए कि वह अल्लाह की मदद पर यकीन रखे और उसी से मदद माँगे।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम अल्लाह की राह में हों और उसके दीन की खिदमत कर रहे हों, तो अल्लाह हमें अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि वह हमारी मदद करता है और हमें कामयाबी देता है।


📜 आयत 62-66 — सूरा अल-अनफाल

62وَإِن يُرِيدُوا أَن يَخْدَعُوكَ فَإِنَّ حَسْبَكَ اللَّهُ ۚ هُوَ الَّذِي أَيَّدَكَ بِنَصْرِهِ وَبِالْمُؤْمِنِينَ
और अगर वह लोग तुम्हें फरेब देना चाहे तो (कुछ परवा नहीं) ख़ुदा तुम्हारे वास्ते यक़ीनी काफी है-(ऐ रसूल) वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने अपनी ख़ास मदद और मोमिनीन से तुम्हारी ताईद की
63وَأَلَّفَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ ۚ لَوْ أَنفَقْتَ مَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مَّا أَلَّفْتَ بَيْنَ قُلُوبِهِمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ أَلَّفَ بَيْنَهُمْ ۚ إِنَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और उसी ने उन मुसलमानों के दिलों में बाहम ऐसी उलफ़त पैदा कर दी कि अगर तुम जो कुछ ज़मीन में है सब का सब खर्च कर डालते तो भी उनके दिलो में ऐसी उलफ़त पैदा न कर सकते मगर ख़ुदा ही था जिसने बाहम उलफत पैदा की बेशक वह ज़बरदस्त हिक़मत वाला है
64يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَسْبُكَ اللَّهُ وَمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
ऐ रसूल तुमको बस ख़ुदा और जो मोमिनीन तुम्हारे ताबेए फरमान (फरमाबरदार) है काफी है
65يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى الْقِتَالِ ۚ إِن يَكُن مِّنكُمْ عِشْرُونَ صَابِرُونَ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ يَغْلِبُوا أَلْفًا مِّنَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ
ऐ रसूल तुम मोमिनीन को जिहाद के वास्ते आमादा करो (वह घबराए नहीं ख़ुदा उनसे वायदा करता है कि) अगर तुम लोगों में के साबित क़दम रहने वाले बीस भी होगें तो वह दो सौ (काफिरों) पर ग़ालिब आ जायेगे और अगर तुम लोगों में से साबित कदम रहने वालों सौ होगें तो हज़ार (काफिरों) पर ग़ालिब आ जाएँगें इस सबब से कि ये लोग ना समझ हैं
66الْآنَ خَفَّفَ اللَّهُ عَنكُمْ وَعَلِمَ أَنَّ فِيكُمْ ضَعْفًا ۚ فَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ صَابِرَةٌ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُمْ أَلْفٌ يَغْلِبُوا أَلْفَيْنِ بِإِذْنِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ مَعَ الصَّابِرِينَ
अब ख़ुदा ने तुम से (अपने हुक्म की सख्ती में) तख्फ़ीफ (कमी) कर दी और देख लिया कि तुम में यक़ीनन कमज़ोरी है तो अगर तुम लोगों में से साबित क़दम रहने वाले सौ होगें तो दो सौ (काफ़िरों) पर ग़ालिब रहेंगें और अगर तुम लोगों में से (ऐसे) एक हज़ार होगें तो ख़ुदा के हुक्म से दो हज़ार (काफ़िरों) पर ग़ालिब रहेंगे और (जंग की तकलीफों को) झेल जाने वालों का ख़ुदा साथी है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
64आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 64

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Wednesday, September 30, 2026

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