अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- जिबाल (جبال): पहाड़
- नुसिबत (نصبت): खड़ी की गईं, गाड़ दी गईं, स्थापित की गईं
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला इंसानों का ध्यान अपनी अज़ीम कुदरत की तरफ दिलाते हुए फरमाता है कि क्या वे पहाड़ों की तरफ नहीं देखते कि उन्हें किस तरह खड़ा किया गया है? पहाड़ ज़मीन में इस तरह गाड़े गए हैं जैसे खूँटे गाड़े जाते हैं। वे ज़मीन के लिए मेख़ (खूँटे) की तरह हैं, जो उसे जमाए रखते हैं और उसे डगमगाने से रोकते हैं। अगर पहाड़ न होते तो ज़मीन अपने निवासियों को लेकर हिलती-डुलती रहती और उस पर जीवन संभव न होता। ये पहाड़ अपनी बुलंद चोटियों, अपनी सख्त चट्टानों और अपनी गहरी जड़ों के साथ अल्लाह की कुदरत का ऐसा नमूना हैं जो हर देखने वाले को उसकी अज़मत का एहसास दिलाता है।
यह आयत उन लोगों को सबक सिखाती है जो आँखें रखते हुए भी नहीं देखते और दिमाग़ रखते हुए भी ग़ौर नहीं करते। पहाड़ों की मज़बूती और उनका इस तरह खड़ा होना इस बात का सबूत है कि इन्हें बनाने वाला कोई और नहीं बल्कि वही अल्लाह है जो हर चीज़ पर क़ादिर है। जिसने इन बोझल पहाड़ों को ज़मीन पर इस तरह जमा दिया कि वे न हिलते हैं और न टूटते हैं, वही अल्लाह क़यामत के दिन मुर्दों को ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।
पहाड़ों की यह स्थिरता और उनका यह अज़ीम नज़ारा अल्लाह की रहमत का पैग़ाम है। अगर ज़मीन पहाड़ों के बिना होती तो यहाँ रहना मुश्किल हो जाता। यही वजह है कि अल्लाह ने पहाड़ों को ज़मीन का सहारा बनाया और उनमें कई फ़ायदे रखे — पानी के चश्मे, कीमती खनिज, जानवरों के लिए चारागाह और इंसानों के लिए रास्ते। यह सब उस रहमान की नेअमतें हैं जो अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम अपने आस-पास की मख़लूक़ात पर ग़ौर करें। पहाड़ों की तरफ देखकर सोचें कि जिसने इन्हें खड़ा किया, उसकी कुदरत कितनी बुलंद है। यह नज़ारा हमें अल्लाह की अज़मत के सामने झुकने और उसकी इबादत करने की तरफ बुलाता है। जो इंसान इन नज़ारों से सबक हासिल कर ले, वह कभी अल्लाह का इनकार नहीं कर सकता और न ही उसकी नेअमतों का कुशुर (एहसान-फ़रामोश) हो सकता है।
📜 आयत 17-21 — अल-ग़ाशिया
अनुवाद — अल-ग़ाशिया 19
सूरा अल-ग़ाशिया आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और पहाड़ों की तरफ़ कि किस तरह खड़े किए गए…सूरा आयत 19/26 — अल-ग़ाशिया الغاشية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-ग़ाशिया सुनें, अल-ग़ाशिया अनुवाद, अल-ग़ाशिया mp3, अल-ग़ाशिया pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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