अल-ग़ाशिया · 18/26
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-ग़ाशिया
وَإِلَى السَّمَاءِ كَيْفَ رُفِعَتْ ۝١٨
Wa ilas samaaa`i kaifa rufi`at
📖 हिंदी अर्थ
और आसमान की तरफ कि क्या बुलन्द बनाया गया है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَإِلَى السَّمَاءِ: और आकाश की ओर
  • كَيْفَ رُفِعَتْ: कैसे ऊँचा किया गया

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में इनकार करने वालों को उनकी अपनी दुनिया की उन चीज़ों पर ग़ौर करने की दावत दे रहा है जिन्हें वे हर रोज़ देखते हैं। उनसे कहा जा रहा है कि क्या वे आकाश की ओर नहीं देखते कि उसे कैसे ऊँचा उठाया गया है? यह आकाश जो उनके सिरों के ऊपर बिना किसी स्तंभ के टिका हुआ है, बिना किसी सहारे के खड़ा है, और कभी उन पर गिरता नहीं। यह अल्लाह की कुदरत का अज़ीम शाहकार है।

यह आकाश कितना विशाल है, कितना ऊँचा है, और इसमें कितने अजीबोग़रीब नज़ारे हैं — सूरज, चाँद, तारे, ग्रह — सब कुछ एक व्यवस्था के साथ चल रहे हैं। यह सब बताता है कि इसका बनाने वाला कितना क़ादिर (सक्षम) और हकीम (बुद्धिमान) है। जिसने इस विशाल आकाश को बिना किसी सहारे के ऊपर रखा है, वही अल्लाह है जो मरने के बाद लोगों को दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

प्यारे भाइयो और बहनो! जब हम आकाश की ओर देखते हैं, तो हमें अपने रब की अज़मत और कुदरत का एहसास होना चाहिए। यह आकाश हमें याद दिलाता है कि जिसने इसे बिना सहारे के ऊँचा रखा है, वह हमारी हर ज़रूरत को पूरा कर सकता है, हमारी हर दुआ को सुन सकता है। इसलिए हमें अपने दिलों को अल्लाह की तरफ़ मोड़ना चाहिए, उसी पर भरोसा रखना चाहिए, और उसकी नेमतों पर शुक्र अदा करना चाहिए। यह आकाश हमें उस दिन की याद दिलाता है जब यही आकाश फट जाएगा और सब लोग अपने रब के सामने हाज़िर होंगे। उस दिन के लिए हमें आज ही तैयारी कर लेनी चाहिए — नेक अमल करके, अल्लाह की इबादत करके, और उसके रसूल की सुन्नत पर चलकर।



📜 आयत 16-20 — सूरा अल-ग़ाशिया

16وَزَرَابِيُّ مَبْثُوثَةٌ
और नफ़ीस मसनदे बिछी हुई
17أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى الْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ
तो क्या ये लोग ऊँट की तरह ग़ौर नहीं करते कि कैसा अजीब पैदा किया गया है
18وَإِلَى السَّمَاءِ كَيْفَ رُفِعَتْ
और आसमान की तरफ कि क्या बुलन्द बनाया गया है
19وَإِلَى الْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ
और पहाड़ों की तरफ़ कि किस तरह खड़े किए गए हैं
20وَإِلَى الْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ
और ज़मीन की तरफ कि किस तरह बिछायी गयी है
अल-ग़ाशियाकुरान सूची
26आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अल-ग़ाशिया 18

सूरा अल-ग़ाशिया आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और आसमान की तरफ कि क्या बुलन्द बनाया गया है

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Friday, October 2, 2026

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