अल-ग़ाशिया · 20/26
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-ग़ाशिया
وَإِلَى الْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ ۝٢٠
Wa ilal ardi kaifa sutihat
📖 हिंदी अर्थ
और ज़मीन की तरफ कि किस तरह बिछायी गयी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سُطِحَتْ: बिछाई गई, फैलाई गई, समतल की गई।

व्याख्या:

अल्लाह तआला इस आयत में इंसानों को, ख़ासकर उन लोगों को जो क़यामत और हिसाब-किताब से इनकार करते हैं, अपनी कुदरत के नज़ारों पर ग़ौर करने की दावत दे रहा है। वह कहता है: क्या ये लोग ज़मीन की तरफ़ नहीं देखते कि उसे किस तरह बिछाया गया है?

ज़मीन को देखो — यह कितनी हमवार (समतल) और फैली हुई है! इसे इस तरह बिछाया गया है कि इंसान उस पर चल सके, उसमें खेती कर सके, घर बना सके और आराम से जीवन गुज़ार सके। अगर ज़मीन ऊबड़-खाबड़ और असमतल होती, तो इंसान के लिए उस पर रहना और चलना-फिरना नामुमकिन हो जाता।

यह बिछावट अल्लाह की रहमत और कुदरत की निशानी है। जिस तरह एक मेहमान के लिए घर का फर्श बिछाया जाता है ताकि वह आराम से बैठ सके, उसी तरह अल्लाह ने इस पूरी ज़मीन को इंसान के लिए बिछा दिया है। यह कोई इत्तफ़ाक़ या ख़ुद-ब-ख़ुद नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे अल्लाह की हिकमत और तदबीर है।

ज़मीन का चपटा और समतल होना — हालाँकि यह एक गोल क्षेत्र है — अपने आप में अल्लाह की कुदरत का अजीबो-ग़रीब कमाल है। यह इस क़ाबिल है कि इंसान उस पर खड़ा हो, सजदा करे, चले और अपनी ज़रूरतें पूरी करे।

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि जिस अल्लाह ने ज़मीन को इस तरह हमारे लिए आरामदेह बनाया है, उसी अल्लाह की इबादत करनी चाहिए और उसके हुक्मों को मानना चाहिए। जो अल्लाह इतनी बड़ी ज़मीन को बिछाने पर क़ादिर है, वही अल्लाह मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

तो ऐ इंसान! ज़मीन की तरफ़ देख — यह तेरे लिए सजदे की जगह है, तेरे लिए रहने की जगह है, और तेरे लिए अल्लाह की कुदरत की निशानी है। इस निशानी से सबक़ ले और अपने रब की तरफ़ लौट आ। यही तेरी कामयाबी है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी।



📜 आयत 18-22 — सूरा अल-ग़ाशिया

18وَإِلَى السَّمَاءِ كَيْفَ رُفِعَتْ
और आसमान की तरफ कि क्या बुलन्द बनाया गया है
19وَإِلَى الْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ
और पहाड़ों की तरफ़ कि किस तरह खड़े किए गए हैं
20وَإِلَى الْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ
और ज़मीन की तरफ कि किस तरह बिछायी गयी है
21فَذَكِّرْ إِنَّمَا أَنتَ مُذَكِّرٌ
तो तुम नसीहत करते रहो तुम तो बस नसीहत करने वाले हो
22لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ
तुम कुछ उन पर दरोग़ा तो हो नहीं
अल-ग़ाशियाकुरान सूची
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20आयत

अनुवाद — अल-ग़ाशिया 20

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Friday, October 2, 2026

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