Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَرَبَّصُونَ: तुम प्रतीक्षा करते हो, इंतज़ार करते हो।
- الْحُسْنَيَيْنِ: दो अच्छी चीज़ों में से एक (अर्थात् विजय या शहादत)।
- نَتَرَبَّصُ: हम प्रतीक्षा करते हैं, इंतज़ार करते हैं।
- عَذَابٍ مِّنْ عِندِهِ: उसकी ओर से आने वाला दंड (जैसे आकाशीय बिजली, महामारी, या मृत्यु)।
- بِأَيْدِينَا: हमारे हाथों से (अर्थात् युद्ध में तुम्हें मारना या बंदी बनाना)।
विस्तृत व्याख्या:
ऐ नबी! आप इन मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों से कह दीजिए: “तुम हमारे बारे में किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हो? हमारे साथ तो केवल दो ही अच्छी स्थितियाँ हो सकती हैं—या तो हमें विजय मिलेगी और तुम पर हमारा दबदबा होगा, या हम शहीद होकर अल्लाह के दरबार में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करेंगे। दोनों ही स्थितियाँ हमारे लिए कल्याणकारी हैं।”
“इसके विपरीत, हम तुम्हारे बारे में दो बुरी चीज़ों में से एक का इंतज़ार करते हैं: या तो अल्लाह तुम्हें अपनी ओर से कोई दंड देगा—जैसे आकाशीय आपदा, बीमारी या मृत्यु—जो तुम्हें जड़ से उखाड़ देगी, या फिर अल्लाह हमें तुम पर प्रभुत्व देगा और हम तुम्हें युद्ध में मारेंगे या बंदी बनाएँगे।”
“तो अब तुम अपने इंतज़ार में लगे रहो, हम भी तुम्हारे साथ इंतज़ार कर रहे हैं। हम अल्लाह के वादे पर भरोसा रखते हैं, जो हमें विजय और सफलता देगा, और तुम अपने झूठे विश्वासों और शैतानी वादों पर निर्भर हो। देख लो, किसका इंतज़ार सही निकलता है!”
शिक्षाएँ और लाभ:
- मोमिन की दृष्टि में हर स्थिति कल्याणकारी है: एक सच्चा मुसलमान विजय और शहादत दोनों को ही अल्लाह की ओर से नेमत मानता है। यह विश्वास उसे निडर और साहसी बनाता है, क्योंकि उसे पता है कि उसका नुक़सान कभी नहीं हो सकता।
- अल्लाह पर पूर्ण भरोसा: यह आयत सिखाती है कि मुसलमान को अपने दुश्मनों की धमकियों से नहीं डरना चाहिए, बल्कि अल्लाह के वादे पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है और उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता।
- दुश्मनों के मुक़ाबले में स्पष्टता: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे अपने दुश्मनों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करें और उन्हें बताएँ कि हम किसी भी हालत में हार नहीं मानेंगे। यह आत्मविश्वास और दृढ़ता का पाठ है।
- अच्छे और बुरे का अंतर: यह आयत बताती है कि सच्चे लोगों का अंजाम हमेशा अच्छा होता है, चाहे वे जीतें या शहीद हों, जबकि झूठे लोगों का अंजाम हमेशा बुरा होता है, चाहे वे कितनी भी कोशिश कर लें। यह सच्चाई पर चलने की प्रेरणा देती है।
- इस्लाम का साहसिक दृष्टिकोण: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे जीवन और मृत्यु को अल्लाह की राह में खेल नहीं समझते, बल्कि उनका हर क़दम अल्लाह की रज़ा के लिए होता है। यही कारण है कि वे किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते।
📜 आयत 50-54 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 52
सूरा अत-तौबा आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम मुनाफिकों से कह दो कि तुम तो…सूरा आयत 52/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, September 29, 2026
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