Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- طَوْعًا: अपनी इच्छा और खुशी से।
- كَرْهًا: विवश होकर, अनिच्छा के साथ।
- لَّن يُتَقَبَّلَ: कदापि स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- فَاسِقِينَ: आज्ञा का उल्लंघन करने वाले, दीन से बाहर निकल जाने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुनाफ़िक़ों से कह दीजिए कि तुम अपने माल ख़र्च करो, चाहे खुशी से खर्च करो या विवश होकर, तुम्हारा यह खर्च कभी भी अल्लाह की ओर से स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसका कारण यह है कि तुम ऐसे लोग हो जो अल्लाह के दीन से बाहर निकल चुके हो और उसकी आज्ञा का उल्लंघन करने वाले हो। तुम्हारा दिल ईमान से खाली है, तुम्हारे अंदर न तो अल्लाह की राह में खर्च करने की नीयत है और न ही उसका कोई सवाब तुम्हारे हिस्से में आ सकता है। तुम्हारा खर्च केवल दिखावा और लोगों को धोखा देने का ज़रिया है, इसलिए अल्लाह उसे क़बूल नहीं करेगा। यह आदेश वास्तव में एक ख़बर (सूचना) के रूप में है, यानी चाहे तुम किसी भी हालत में खर्च करो, उसका कोई फल तुम्हें नहीं मिलेगा, क्योंकि तुम्हारा दिल अल्लाह की तरफ़ से फिरा हुआ है और तुम्हारे अमल बुनियादी तौर पर ख़राब हैं।
फ़ायदे (लाभ और सबक):
- अल्लाह की राह में खर्च करने की क़बूलियत का आधार ईमान और सच्ची नीयत है। बिना ईमान के किया गया कोई भी अच्छा काम अल्लाह के यहाँ स्वीकार नहीं होता।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दिखावे और रियाकारी के लिए किया गया खर्च या इबादत न केवल बेकार है, बल्कि इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देती है।
- मुनाफ़िक़ों की पहचान यह है कि वे अल्लाह की आज्ञा का उल्लंघन करते हैं और उनके अमल में ईमान की मिठास नहीं होती। एक सच्चे मुसलमान को चाहिए कि वह अपने दिल को ईमान से भरा रखे और हर अच्छे काम को केवल अल्लाह की रज़ा के लिए करे।
- यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि अल्लाह के दीन की सच्चाई और उसकी पकड़ बहुत सख्त है। जो लोग उसके दीन से बाहर निकल जाते हैं, उनके सारे अमल बेकार हो जाते हैं, चाहे वे कितने ही बड़े क्यों न हों।
- इससे हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने दिल को हमेशा अल्लाह की तरफ़ मोड़े रखना चाहिए और उसकी आज्ञा का पालन करते हुए अपने माल और जान को उसकी राह में खर्च करना चाहिए, ताकि हमारे अमल क़बूल हों और हमें आख़िरत में सफलता मिले।
📜 आयत 51-55 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 53
सूरा अत-तौबा आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम लोग ख्वाह ख़ुशी…सूरा आयत 53/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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