अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَن يُصِيبَنَا: हमें कभी नहीं पहुँचेगा, हम पर कभी नहीं आएगा।
- كَتَبَ اللَّهُ لَنَا: अल्लाह ने हमारे लिए लिख दिया है, अर्थात हमारे भाग्य में निर्धारित कर दिया है।
- مَوْلَانَا: हमारा संरक्षक, हमारा स्वामी, हमारा सहायक और कार्य-साधक।
- فَلْيَتَوَكَّلِ: उसे भरोसा करना चाहिए, अपने सारे मामले उसे सौंपने चाहिए।
विस्तृत तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इन कायर और पाखंडी लोगों को, जो जिहाद से पीछे रह गए और डर दिखा रहे हैं, डाँटते हुए और उन्हें झिड़कते हुए कह दीजिए: "हमें कभी कोई कष्ट या हानि नहीं पहुँच सकती, सिवाय उसके जो अल्लाह ने हमारे लिए लिख दिया है।" अर्थात जो कुछ भी हमारे साथ होता है—चाहे वह सुख हो या दुख, जीत हो या शहादत—वह सब अल्लाह के पूर्व-निर्धारित भाग्य (तक़दीर) के अनुसार ही होता है, जो लौह-ए-महफ़ूज़ में लिखा जा चुका है। कोई भी शक्ति उसे बदल नहीं सकती, और न ही कोई उसे रोक सकता है।
फिर आपने यह भी कहा: "वह (अल्लाह) हमारा मौला है"—अर्थात वही हमारा स्वामी, संरक्षक और सहायक है। हम उसी की पनाह में हैं, उसी पर हमारा भरोसा है, और वही हमारे सारे मामलों का प्रबंधक है। वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता और न ही हमें दुश्मनों के हवाले करता है।
अंत में अल्लाह तआला ने सामान्य नियम बताया: "और अल्लाह ही पर ईमानवालों को भरोसा करना चाहिए।" यानी सच्चे मोमिनों का यही तरीक़ा है कि वे अपने सारे मामलों में, अपने लाभ प्राप्त करने और हानि को दूर करने के लिए, केवल अल्लाह पर ही तवक्कुल (भरोसा) करते हैं। वे किसी इंसान, किसी ताक़त या किसी सामान से नहीं डरते, बल्कि उनका पूरा भरोसा अल्लाह पर होता है, और वही उनके लिए काफ़ी है।
फ़ायदे और सबक़:
- तक़दीर पर ईमान: इस आयत से मुसलमान को यह विश्वास मिलता है कि जो कुछ भी उसके साथ होता है, वह अल्लाह के लिखे हुए अनुसार ही होता है। इस विश्वास से इंसान के दिल से डर खत्म हो जाता है और उसे साहस मिलता है।
- बहादुरी और सच्चा साहस: जब इंसान को यक़ीन हो जाए कि मौत या ज़िंदगी सब अल्लाह के हाथ में है, तो वह किसी इंसान या ताक़त से नहीं डरता। यही वह चीज़ है जो मुसलमानों को सच्चा बहादुर बनाती है।
- अल्लाह पर भरोसा ही कामयाबी की कुंजी है: जो इंसान अपने सारे मामले अल्लाह को सौंप देता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी हो जाता है। यह तवक्कुल ही है जो इंसान को हर मुश्किल में राह दिखाता है।
- मोमिन की पहचान: इस आयत से पता चलता है कि सच्चे ईमानवाले की पहचान यह है कि वह हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखता है—खुशी में भी और ग़म में भी, आराम में भी और मुसीबत में भी।
- पाखंडियों से सबक़: यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो डर के मारे जिहाद और अच्छे कामों से पीछे रह जाते हैं। मोमिन को कभी डरकर पीछे नहीं हटना चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा करके आगे बढ़ना चाहिए।
📜 आयत 49-53 — अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 51
सूरा अत-तौबा आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हम पर हरगिज़ कोई…सूरा आयत 51/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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