अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حِلٌّ (हिल्लुन): इसका अर्थ है हलाल, जायज़, या फिर इसका अर्थ "निवासी" (हाल्लुन) भी आता है। पहले अर्थ के अनुसार, आपके लिए इस शहर में वह सब जायज़ है जो दूसरों के लिए जायज़ नहीं। दूसरे अर्थ के अनुसार, आप इस शहर में निवास करते हैं।
- بِهَذَا الْبَلَدِ (बिहाज़ल-बलद): इस शहर से मुराद "मक्का" है, जो अल्लाह का पवित्र और सम्मानित शहर है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस पवित्र शहर (मक्का) की क़सम खाई है, और फरमाया कि ऐ नबी! आप इस शहर में निवास करते हैं, और आपके लिए इस शहर में वह सब कुछ जायज़ है जो दूसरों के लिए जायज़ नहीं है। यानी, आप इस शहर में जो चाहें कर सकते हैं—जैसे क़त्ल (जो सज़ा का हक़दार हो) और क़ैद (जो क़ैद का हक़दार हो)—क्योंकि आपका यहाँ अधिकार है, और आप पर वह गुनाह नहीं होगा जो दूसरों पर होता है। यह आपके लिए एक ख़ास इज़्ज़त और मर्तबा है।
इस आयत में अल्लाह ने अपने नबी ﷺ की ताज़ीम (सम्मान) और उनके शहर की अज़मत (महानता) को बयान किया है। यह भी बताया गया है कि यह शहर (मक्का) अल्लाह के नज़दीक कितना पवित्र है, और इसकी क़सम खाकर अल्लाह ने इंसान की पैदाइश और उसकी मेहनत-मशक्कत की तरफ इशारा किया है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को कितना प्यार करता है और उन्हें कितनी इज़्ज़त देता है। हमें भी चाहिए कि हम अपने नबी ﷺ की मुहब्बत को अपने दिलों में बसाएँ और उनके बताए हुए रास्ते पर चलें। यह शहर (मक्का) हमारे लिए किबला है, और यहाँ की पवित्रता हमें याद दिलाती है कि हमें अपने दिलों को भी पवित्र रखना चाहिए। अल्लाह ने अपने नबी को इस शहर में इज़्ज़त दी, और हमें भी चाहिए कि हम अपने जीवन को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक बनाएँ ताकि हम भी अल्लाह की रहमत और मुहब्बत के हक़दार बनें। याद रखें, अल्लाह की क़समें हमें उसकी अज़मत और हमारी ज़िम्मेदारियों की याद दिलाती हैं। हमें चाहिए कि हम इस पवित्र शहर की तरह अपने दिलों को भी गुनाहों से पाक रखें, और नबी ﷺ की सुन्नत पर अमल करके दुनिया और आख़िरत की कामयाबी हासिल करें।
📜 आयत 1-4 — अल-बलद
अनुवाद — अल-बलद 2
सूरा अल-बलद आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम इसी शहर में तो रहते होसूरा आयत 2/20 — अल-बलद البلد (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बलद सुनें, अल-बलद अनुवाद, अल-बलद mp3, अल-बलद pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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