अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لا أُقْسِمُ: यहाँ "لا" अतिरिक्त (ज़ाइदा) है, जो क़सम को और अधिक दृढ़ करने के लिए आई है। अर्थात् "मैं क़सम खाता हूँ"।
- بِهَذَا الْبَلَدِ: इस शहर की क़सम, जो मक्का है।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में "इस शहर" की क़सम खाई है, जो मक्का है। यह वही पवित्र शहर है जिसे अल्लाह ने सारे संसार से श्रेष्ठ बनाया है। यह वह जगह है जहाँ काबा है, जो मुसलमानों की क़िब्ला है। इस शहर की अज़मत का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि अल्लाह ने अपनी क़समों में इस शहर को चुना।
इस क़सम के पीछे अल्लाह की मंशा यह है कि वह इसके बाद आने वाली बात की ओर ध्यान आकर्षित करे। यह क़सम इस बात की ओर इशारा करती है कि जिस तरह यह शहर पवित्र और सम्मानित है, उसी तरह इसके बाद जो हक़ीक़त बयान की जाने वाली है, वह भी अत्यंत महत्वपूर्ण और सत्य है।
यहाँ अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को भी इस शहर से जोड़कर बता रहे हैं, क्योंकि आप ﷺ इसी शहर में रहते हैं। इससे इस शहर की अज़मत और बढ़ जाती है। यह वही शहर है जहाँ इस्लाम का उदय हुआ और जहाँ से रहमत की रोशनी पूरी दुनिया में फैली।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने मक्का को कितना सम्मान दिया है। हमें चाहिए कि हम इस शहर की अज़मत को दिल में बसाएँ और वहाँ की याद करके अपने ईमान को ताज़ा करें। जो लोग मक्का जाने की तौफ़ीक़ पाते हैं, वे ख़ुशक़िस्मत हैं। हमें अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें भी इस पवित्र शहर की ज़ियारत की तौफ़ीक़ दे। यह शहर हमें याद दिलाता है कि इस्लाम की शुरुआत कितनी मुश्किलों के बीच हुई थी, फिर भी अल्लाह ने अपने नबी ﷺ की मदद की और इस्लाम को ग़ालिब किया। यह हमारे लिए सबक़ है कि मुश्किलों में भी अल्लाह पर भरोसा रखें।
📜 आयत 1-3 — अल-बलद
अनुवाद — अल-बलद 1
सूरा अल-बलद आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मुझे इस शहर (मक्का) की कसमसूरा आयत 1/20 — अल-बलद البلد (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बलद सुनें, अल-बलद अनुवाद, अल-बलद mp3, अल-बलद pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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