अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَارْغَبْ: रग़बत रखना, अर्थात अपनी आशा और इच्छा को किसी एक ओर केंद्रित करना, उसी से माँगना और उसी पर भरोसा रखना।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब आप दुनिया के कामों और व्यस्तताओं से फ़ारिग़ (खाली) हो जाएँ, तो इबादत में लग जाएँ और अपनी सारी रग़बत, आशा और भरोसा केवल अपने रब की ओर रखें। अपनी हाजतें, अपनी दुआएँ, अपनी उम्मीदें — सब कुछ सिर्फ़ उसी से जोड़ें। उसी से माँगें, उसी से डरें, उसी पर तवक्कुल करें और उसी की रहमत के मुंतज़िर रहें।
यह आयत हमें सिखाती है कि मुसलमान की नज़र हमेशा अपने रब की तरफ़ होनी चाहिए। जब भी आपके पास वक़्त मिले, तो उसे अल्लाह की इबादत, ज़िक्र और दुआ में गुज़ारें। दुनिया के कामों में मशग़ूल होते हुए भी दिल का रुख़ अल्लाह ही की तरफ़ रखें। यही वह चीज़ है जो इंसान को सुकून देती है, उसके दिल को मज़बूत करती है और उसे हर मुश्किल में सब्र और हिम्मत प्रदान करती है।
जो बंदा अपनी सारी उम्मीदें अल्लाह से जोड़ लेता है, अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता। वह उसके लिए ऐसे रास्ते खोलता है जिनका उसे अंदाज़ा भी नहीं होता। इसलिए हमेशा अपने रब की तरफ़ रग़बत रखें — उसी से माँगें, उसी से उम्मीद रखें, और उसी पर भरोसा करें। यही सच्ची कामयाबी और सच्चे सुकून की कुंजी है।
📜 आयत 6-8 — अश-शरह
अनुवाद — अश-शरह 8
सूरा अश-शरह आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और फिर अपने परवरदिगार की तरफ रग़बत करोसूरा आयत 8/8 — अश-शरह الشرح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शरह सुनें, अश-शरह अनुवाद, अश-शरह mp3, अश-शरह pdf. आयत 6–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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