सूरा अल-मआरिज अरबी और हिंदी

सूरा अल-मआरिज को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (44 आयत — مكية). अल-मआरिज सुनें, अल-मआरिज अनुवाद, अल-मआरिज mp3, अल-मआरिज pdf.

सूरा अल-मआरिज पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
x1
سَأَلَ سَائِلٌ بِعَذَابٍ وَاقِعٍ ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
एक माँगने वाले ने काफिरों के लिए होकर रहने वाले अज़ाब को माँगा
لِّلْكَافِرِينَ لَيْسَ لَهُ دَافِعٌ ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
जिसको कोई टाल नहीं सकता
مِّنَ اللَّهِ ذِي الْمَعَارِجِ ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
जो दर्जे वाले ख़ुदा की तरफ से (होने वाला) था
تَعْرُجُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ إِلَيْهِ فِي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍ ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
जिसकी तरफ फ़रिश्ते और रूहुल अमीन चढ़ते हैं (और ये) एक दिन में इतनी मुसाफ़त तय करते हैं जिसका अन्दाज़ा पचास हज़ार बरस का होगा
فَاصْبِرْ صَبْرًا جَمِيلًا ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
तो तुम अच्छी तरह इन तक़लीफों को बरदाश्त करते रहो
إِنَّهُمْ يَرَوْنَهُ بَعِيدًا ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
वह (क़यामत) उनकी निगाह में बहुत दूर है
وَنَرَاهُ قَرِيبًا ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
और हमारी नज़र में नज़दीक है
يَوْمَ تَكُونُ السَّمَاءُ كَالْمُهْلِ ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
जिस दिन आसमान पिघले हुए ताँबे का सा हो जाएगा
وَتَكُونُ الْجِبَالُ كَالْعِهْنِ ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
और पहाड़ धुनके हुए ऊन का सा
وَلَا يَسْأَلُ حَمِيمٌ حَمِيمًا ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
बावजूद कि एक दूसरे को देखते होंगे
يُبَصَّرُونَهُمْ ۚ يَوَدُّ الْمُجْرِمُ لَوْ يَفْتَدِي مِنْ عَذَابِ يَوْمِئِذٍ بِبَنِيهِ ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
कोई किसी दोस्त को न पूछेगा गुनेहगार तो आरज़ू करेगा कि काश उस दिन के अज़ाब के बदले उसके बेटों
وَصَاحِبَتِهِ وَأَخِيهِ ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
और उसकी बीवी और उसके भाई
وَفَصِيلَتِهِ الَّتِي تُؤْوِيهِ ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
और उसके कुनबे को जिसमें वह रहता था
وَمَن فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا ثُمَّ يُنجِيهِ ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
और जितने आदमी ज़मीन पर हैं सब को ले ले और उसको छुटकारा दे दें
كَلَّا ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
(मगर) ये हरगिज़ न होगा
نَزَّاعَةً لِّلشَّوَىٰ ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
जहन्नुम की वह भड़कती आग है कि खाल उधेड़ कर रख देगी
تَدْعُو مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
(और) उन लोगों को अपनी तरफ बुलाती होगी
وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰ ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
जिन्होंने (दीन से) पीठ फेरी और मुँह मोड़ा और (माल जमा किया)
۞ إِنَّ الْإِنسَانَ خُلِقَ هَلُوعًا ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
और बन्द कर रखा बेशक इन्सान बड़ा लालची पैदा हुआ है
إِذَا مَسَّهُ الشَّرُّ جَزُوعًا ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
जब उसे तक़लीफ छू भी गयी तो घबरा गया
وَإِذَا مَسَّهُ الْخَيْرُ مَنُوعًا ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
और जब उसे ज़रा फराग़ी हासिल हुई तो बख़ील बन बैठा
إِلَّا الْمُصَلِّينَ ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
मगर जो लोग नमाज़ पढ़ते हैं
الَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَائِمُونَ ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
जो अपनी नमाज़ का इल्तज़ाम रखते हैं
وَالَّذِينَ فِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ مَّعْلُومٌ ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
और जिनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले के
لِّلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
लिए एक मुक़र्रर हिस्सा है
وَالَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ الدِّينِ ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
और जो लोग रोज़े जज़ा की तस्दीक़ करते हैं
وَالَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
और जो लोग अपने परवरदिगार के अज़ाब से डरते रहते हैं
إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍ ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
बेशक उनको परवरदिगार के अज़ाब से बेख़ौफ न होना चाहिए
وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
और जो लोग अपनी शर्मगाहों को अपनी बीवियों और अपनी लौन्डियों के सिवा से हिफाज़त करते हैं
إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
तो इन लोगों की हरगिज़ मलामत न की जाएगी
فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
तो जो लोग उनके सिवा और के ख़ास्तगार हों तो यही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं
وَالَّذِينَ هُمْ لِأَمَانَاتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَاعُونَ ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
और जो लोग अपनी अमानतों और अहदों का लेहाज़ रखते हैं
وَالَّذِينَ هُم بِشَهَادَاتِهِمْ قَائِمُونَ ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
और जो लोग अपनी यहादतों पर क़ायम रहते हैं
وَالَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
और जो लोग अपनी नमाज़ो का ख्याल रखते हैं
أُولَٰئِكَ فِي جَنَّاتٍ مُّكْرَمُونَ ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
यही लोग बेहिश्त के बाग़ों में इज्ज़त से रहेंगे
فَمَالِ الَّذِينَ كَفَرُوا قِبَلَكَ مُهْطِعِينَ ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
तो (ऐ रसूल) काफिरों को क्या हो गया है
عَنِ الْيَمِينِ وَعَنِ الشِّمَالِ عِزِينَ ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
कि तुम्हारे पास गिरोह गिरोह दाहिने से बाएँ से दौड़े चले आ रहे हैं
أَيَطْمَعُ كُلُّ امْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍ ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
क्या इनमें से हर शख़्श इस का मुतमइनी है कि चैन के बाग़ (बेहिश्त) में दाख़िल होगा
كَلَّا ۖ إِنَّا خَلَقْنَاهُم مِّمَّا يَعْلَمُونَ ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
हरगिज़ नहीं हमने उनको जिस (गन्दी) चीज़ से पैदा किया ये लोग जानते हैं
فَلَا أُقْسِمُ بِرَبِّ الْمَشَارِقِ وَالْمَغَارِبِ إِنَّا لَقَادِرُونَ ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
तो मैं मशरिकों और मग़रिबों के परवरदिगार की क़सम खाता हूँ कि हम ज़रूर इस बात की कुदरत रखते हैं
عَلَىٰ أَن نُّبَدِّلَ خَيْرًا مِّنْهُمْ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ ۝٤١
📖 अनुवाद आयत 41
कि उनके बदले उनसे बेहतर लोग ला (बसाएँ) और हम आजिज़ नहीं हैं
فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ ۝٤٢
📖 अनुवाद आयत 42
तो तुम उनको छोड़ दो कि बातिल में पड़े खेलते रहें यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है उनके सामने आ मौजूद हो
يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍ يُوفِضُونَ ۝٤٣
📖 अनुवाद आयत 43
उसी दिन ये लोग कब्रों से निकल कर इस तरह दौड़ेंगे गोया वह किसी झन्डे की तरफ दौड़े चले जाते हैं
خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۚ ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ ۝٤٤
📖 अनुवाद आयत 44
(निदामत से) उनकी ऑंखें झुकी होंगी उन पर रूसवाई छाई हुई होगी ये वही दिन है जिसका उनसे वायदा किया जाता था
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70المعارج Al-Ma'arij 📚 44 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अल-मआरिज — 44 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए