Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ: अल्लाह अपनी महानता और शान के अनुरूप सिंहासन (अर्श) पर ऊँचा और बुलंद है, जैसा उसकी शान के लायक है, बिना किसी कैफियत (आकार-प्रकार) के।
- يُدَبِّرُ الْأَمْرَ: वह सृष्टि के सभी मामलों का प्रबंधन करता है—रिज़्क़ (आजीविका), जीवन, मृत्यु, और आख़िरत का हिसाब।
- شَفِيعٍ: सिफ़ारिश करने वाला।
- تَذَكَّرُونَ: नसीहत पकड़ना, सोचना-समझना।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! तुम्हारा रब अल्लाह ही है, जिसने आसमानों और ज़मीन को छह दिनों में पैदा किया। यह उसकी कुदरत (शक्ति) की निशानी है कि इतनी बड़ी और अज़ीम मख़लूक़ात को उसने अपनी हिकमत से बनाया। इसके बाद वह अपने अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ—ऐसी बुलंदी जो उसकी शान के लायक है, न कि किसी मख़लूक़ की तरह बैठना। वही अकेला इस पूरी कायनात के हर मामले का इंतज़ाम करता है: किसे रिज़्क़ देना है, किसे उठाना है, कब क़यामत लानी है—सब कुछ उसी के हाथ में है।
उसकी बादशाहत इतनी महान है कि कोई भी उसके पास किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सकता, सिवाय उसके जिसे अल्लाह ने ख़ुद इजाज़त दी हो। यानी शिफ़ाअत (सिफ़ारिश) का अधिकार भी सिर्फ़ उसी की मर्ज़ी से चलता है—कोई भी उसकी इजाज़त के बिना किसी के लिए सिफ़ारिश नहीं कर सकता। यह बात उन लोगों का जवाब है जो मानते थे कि उनके बुत या देवी-देवता उनकी सिफ़ारिश कर देंगे।
यही अल्लाह—जो इन सिफ़ात (गुणों) से मौसूफ़ है—तुम्हारा रब है। उसका कोई शरीक (साझीदार) नहीं। इसलिए तुम सिर्फ़ उसी की इबादत करो, उसी के लिए अपनी नेकियों को ख़ालिस करो। क्या तुम इन आयतों और दलीलों से नसीहत नहीं पकड़ते? क्या तुम्हारी अक़्ल इतनी भी नहीं कि तुम समझ जाओ कि जो इतनी बड़ी कायनात का ख़ालिक़ और मुदब्बिर है, वही इबादत का हक़दार है?
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह की अज़मत का एहसास: जब हम सोचते हैं कि अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को छह दिनों में बनाया और वह आज भी हर पल इसका इंतज़ाम कर रहा है, तो हमारा दिल उसकी महानता के सामने झुक जाता है। यह हमें सिखाता है कि हमारी ज़िंदगी के छोटे-बड़े हर मामले में उसी पर भरोसा करें।
- इबादत में इख़लास (ख़ालिसपन): यह आयत हमें सिखाती है कि इबादत सिर्फ़ अल्लाह की होनी चाहिए। न किसी और को उसका शरीक बनाएं, न किसी वसीले (माध्यम) को उसका हक़ दें। हमारी नमाज़, रोज़ा, दुआ—सब कुछ सिर्फ़ उसी के लिए हो।
- शिफ़ाअत की सच्ची समझ: यह आयत हमें बताती है कि क़यामत के दिन शिफ़ाअत का मामला भी अल्लाह की इजाज़त से ही होगा। इसलिए हमें किसी नबी या वली से ऐसी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए जो अल्लाह की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ हो। बल्कि हमें अल्लाह से सीधा रिश्ता बनाना चाहिए और उसकी रहमत के मुस्तहिक़ (हक़दार) बनने की कोशिश करनी चाहिए।
- अक़्ल और दिल का इस्तेमाल: आयत के आख़िर में "क्या तुम नसीहत नहीं पकड़ते" से पता चलता है कि ईमान सिर्फ़ अंधी पैरवी नहीं है, बल्कि अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करना और उनसे सबक़ लेना है। जो शख्स इन दलीलों पर ग़ौर करेगा, उसका ईमान मज़बूत होगा और वह अल्लाह की इबादत में मज़े पाएगा।
📜 आयत 1-5 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 3
सूरा यूनुस आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुमरा परवरदिगार वही ख़ुदा…सूरा आयत 3/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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