यूनुस · 3/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
إِنَّ رَبَّكُمُ اللَّهُ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ يُدَبِّرُ الْأَمْرَ ۖ مَا مِن شَفِيعٍ إِلَّا مِن بَعْدِ إِذْنِهِ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ۝٣
Inna Rabbakumul laahul lazee khalaqas samaawaati wal arda fee sittati aiyaamin summas tawaa `alal `Arshi yudabbirul amra maa min shafee`in illaa mim ba`di iznih; zalikumul laahu Rabbukum fa`budooh; afalaa tazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुमरा परवरदिगार वही ख़ुदा है जिसने सारे आसमान व ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया फिर उसने अर्श को बुलन्द किया वही हर काम का इन्तज़ाम करता है (उसके सामने) कोई (किसी का) सिफारिशी नहीं (हो सकता) मगर उसकी इजाज़त के बाद वही ख़ुदा तो तुम्हारा परवरदिगार है तो उसी की इबादत करो तो क्या तुम अब भी ग़ौर नही करते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ: अल्लाह अपनी महानता और शान के अनुरूप सिंहासन (अर्श) पर ऊँचा और बुलंद है, जैसा उसकी शान के लायक है, बिना किसी कैफियत (आकार-प्रकार) के।
  • يُدَبِّرُ الْأَمْرَ: वह सृष्टि के सभी मामलों का प्रबंधन करता है—रिज़्क़ (आजीविका), जीवन, मृत्यु, और आख़िरत का हिसाब।
  • شَفِيعٍ: सिफ़ारिश करने वाला।
  • تَذَكَّرُونَ: नसीहत पकड़ना, सोचना-समझना।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! तुम्हारा रब अल्लाह ही है, जिसने आसमानों और ज़मीन को छह दिनों में पैदा किया। यह उसकी कुदरत (शक्ति) की निशानी है कि इतनी बड़ी और अज़ीम मख़लूक़ात को उसने अपनी हिकमत से बनाया। इसके बाद वह अपने अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ—ऐसी बुलंदी जो उसकी शान के लायक है, न कि किसी मख़लूक़ की तरह बैठना। वही अकेला इस पूरी कायनात के हर मामले का इंतज़ाम करता है: किसे रिज़्क़ देना है, किसे उठाना है, कब क़यामत लानी है—सब कुछ उसी के हाथ में है।

उसकी बादशाहत इतनी महान है कि कोई भी उसके पास किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सकता, सिवाय उसके जिसे अल्लाह ने ख़ुद इजाज़त दी हो। यानी शिफ़ाअत (सिफ़ारिश) का अधिकार भी सिर्फ़ उसी की मर्ज़ी से चलता है—कोई भी उसकी इजाज़त के बिना किसी के लिए सिफ़ारिश नहीं कर सकता। यह बात उन लोगों का जवाब है जो मानते थे कि उनके बुत या देवी-देवता उनकी सिफ़ारिश कर देंगे।

यही अल्लाह—जो इन सिफ़ात (गुणों) से मौसूफ़ है—तुम्हारा रब है। उसका कोई शरीक (साझीदार) नहीं। इसलिए तुम सिर्फ़ उसी की इबादत करो, उसी के लिए अपनी नेकियों को ख़ालिस करो। क्या तुम इन आयतों और दलीलों से नसीहत नहीं पकड़ते? क्या तुम्हारी अक़्ल इतनी भी नहीं कि तुम समझ जाओ कि जो इतनी बड़ी कायनात का ख़ालिक़ और मुदब्बिर है, वही इबादत का हक़दार है?


फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की अज़मत का एहसास: जब हम सोचते हैं कि अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को छह दिनों में बनाया और वह आज भी हर पल इसका इंतज़ाम कर रहा है, तो हमारा दिल उसकी महानता के सामने झुक जाता है। यह हमें सिखाता है कि हमारी ज़िंदगी के छोटे-बड़े हर मामले में उसी पर भरोसा करें।
  2. इबादत में इख़लास (ख़ालिसपन): यह आयत हमें सिखाती है कि इबादत सिर्फ़ अल्लाह की होनी चाहिए। न किसी और को उसका शरीक बनाएं, न किसी वसीले (माध्यम) को उसका हक़ दें। हमारी नमाज़, रोज़ा, दुआ—सब कुछ सिर्फ़ उसी के लिए हो।
  3. शिफ़ाअत की सच्ची समझ: यह आयत हमें बताती है कि क़यामत के दिन शिफ़ाअत का मामला भी अल्लाह की इजाज़त से ही होगा। इसलिए हमें किसी नबी या वली से ऐसी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए जो अल्लाह की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ हो। बल्कि हमें अल्लाह से सीधा रिश्ता बनाना चाहिए और उसकी रहमत के मुस्तहिक़ (हक़दार) बनने की कोशिश करनी चाहिए।
  4. अक़्ल और दिल का इस्तेमाल: आयत के आख़िर में "क्या तुम नसीहत नहीं पकड़ते" से पता चलता है कि ईमान सिर्फ़ अंधी पैरवी नहीं है, बल्कि अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करना और उनसे सबक़ लेना है। जो शख्स इन दलीलों पर ग़ौर करेगा, उसका ईमान मज़बूत होगा और वह अल्लाह की इबादत में मज़े पाएगा।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — यूनुस

1الر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْحَكِيمِ
अलिफ़ लाम रा ये आयतें उस किताब की हैं जो अज़सरतापा (सर से पैर तक) हिकमत से मलूउ (भरी) है
2أَكَانَ لِلنَّاسِ عَجَبًا أَنْ أَوْحَيْنَا إِلَىٰ رَجُلٍ مِّنْهُمْ أَنْ أَنذِرِ النَّاسَ وَبَشِّرِ الَّذِينَ آمَنُوا أَنَّ لَهُمْ قَدَمَ صِدْقٍ عِندَ رَبِّهِمْ ۗ قَالَ الْكَافِرُونَ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ مُّبِينٌ
क्या लोगों को इस बात से बड़ा ताज्जुब हुआ कि हमने उन्हीं लोगों में से एक आदमी के पास वही भेजी कि (बे ईमान) लोगों को डराओ और ईमानदारो को इसकी ख़ुश ख़बरी सुना दो कि उनके लिए उनके परवरदिगार की बारगाह में बुलन्द दर्जे है (मगर) कुफ्फार (उन आयतों को सुनकर) कहने लगे कि ये (शख्स तो यक़ीनन सरीही जादूगर) है
3إِنَّ رَبَّكُمُ اللَّهُ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ يُدَبِّرُ الْأَمْرَ ۖ مَا مِن شَفِيعٍ إِلَّا مِن بَعْدِ إِذْنِهِ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ فَاعْبُدُوهُ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुमरा परवरदिगार वही ख़ुदा है जिसने सारे आसमान व ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया फिर उसने अर्श को बुलन्द किया वही हर काम का इन्तज़ाम करता है (उसके सामने) कोई (किसी का) सिफारिशी नहीं (हो सकता) मगर उसकी इजाज़त के बाद वही ख़ुदा तो तुम्हारा परवरदिगार है तो उसी की इबादत करो तो क्या तुम अब भी ग़ौर नही करते
4إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ جَمِيعًا ۖ وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ إِنَّهُ يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ لِيَجْزِيَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ بِالْقِسْطِ ۚ وَالَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ شَرَابٌ مِّنْ حَمِيمٍ وَعَذَابٌ أَلِيمٌ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ
तुम सबको (आख़िर) उसी की तरफ लौटना है ख़ुदा का वायदा सच्चा है वही यक़ीनन मख़लूक को पहली मरतबा पैदा करता है फिर (मरने के बाद) वही दुबारा जिन्दा करेगा ताकि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको इन्साफ के साथ जज़ाए (ख़ैर) अता फरमाएगा और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया उन के लिए उनके कुफ्र की सज़ा में पीने को खौलता हुआ पानी और दर्दनाक अज़ाब होगा
5هُوَ الَّذِي جَعَلَ الشَّمْسَ ضِيَاءً وَالْقَمَرَ نُورًا وَقَدَّرَهُ مَنَازِلَ لِتَعْلَمُوا عَدَدَ السِّنِينَ وَالْحِسَابَ ۚ مَا خَلَقَ اللَّهُ ذَٰلِكَ إِلَّا بِالْحَقِّ ۚ يُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
वही वह (ख़ुदाए क़ादिर) है जिसने आफ़ताब को चमकदार और महताब को रौशन बनाया और उसकी मंज़िलें मुक़र्रर की ताकि तुम लोग बरसों की गिनती और हिसाब मालूम करो ख़ुदा ने उसे हिकमत व मसलहत से बनाया है वह (अपनी) आयतों का वाक़िफ़कार लोगों के लिए तफ़सीलदार बयान करता है
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अनुवाद — यूनुस 3

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Tuesday, August 18, 2026

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